गठबंधन के सहयोगी भी हुए बीजेपी से नाराज

प्रतापगढ़: योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रदेश की कानून व्यवस्था की हालत बद से बदतर होती जा रही है। हालांकि इसमें आश्चर्य जैसी कोई बात नहीं लेकिन फिर भी ऐसा देखने-सुनने को मिल रहा है कि सत्ता से जुड़े नेताओं खासकर सीएम की जाति के नेताओं से लेकर सामान्य लोगों में भी अचानक से सत्ता का रौब और धौंस आ गई है। इसका गुंडागर्दी के सबसे ज्यादा शिकार प्रदेश में दलित और पिछड़ी जाति के लोग ही हो रहे हैं।

लेकिन इस बार मामला सत्ता के सहयोगी के रूप में काम कर रहे अपना दल एस की प्रतापगढ़ के मगरौरा ब्लॉक की प्रमुख प्रमुख कंचन पटेल और बीजेपी सरकार के कैबिनेट मंत्री ठाकुर राजेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह के बीच का है। गौरतलब है कि कंचन पटेल ने कैबिनेट मंत्री से खुद को और परिवार को जान का खतरा बताया है। इस मामले के तूल पकड़ने से फिलहाल प्रतापगढ़ का माहौल गर्माया हुआ है। मामले में बीच बचाव को लेकर भाजपा और अपना दल के नेताओ में जुबानी जंग समाप्त होने का आसार नही दिख रहा है। अपना दल और बीजेपी खेमें में तलवारें खिची हुई हैं।

ब्लॉक प्रमुख कंचन पटेल का आरोप है कि कैबिनेट मंत्री मोती सिंह मगरौरा ब्लॉक में अपने किसी स्वजातीय को ब्लॉक प्रमुख बनाना चाहते हैं। इसलिए वो किसी भी तरह से अविश्वास प्रस्ताव लाकर मुझे हटाना चाहते हैं। इसलिए 29 मई को मंत्री के भतीजे और उनके समर्थकों ने ब्लॉक परिसर में घुसकर मुझे धमकाया था और मेरे साथ अभद्रता भी की थी।

कंचन पटेल ने आरोप लगाया की उनके पति कुलदीप वर्मा को राजनीतिक साजिश में फंसाने के लिए उन पर फर्जी लूट का मुकदमा दर्ज करा दिया गया। उनका कहना है कि लूट का आरोप लगाने वाला राम प्रताप बीजेपी का कार्यकर्ता है। जिस समय की घटना बताई जा रही है उस समय मेरे पति सदर विधायक के अपना दल विधायक संगम लाल गुप्ता के साथ अपना दल के कार्यक्रम में थे।

प्रतापगढ़ में दो नेताओ की जंग चल रही है। जहां मोती सिंह प्रमुख को हटाने में लगे हैं वही अपना दल के विधायक संगम लाल गुप्ता प्रमुख को संरक्षण दे रहे है और बचाने में जुटे हुये है। लेकिन अपना दल के ही विश्वनाथ गंज विधायक इस समय अपना दल से नाराज होकर मोती सिंह के आगे पीछे सभी कार्यक्रमो में भाजपा के मंच पर दिख रहे है। जनता पूरी तरह से भ्रमित है कि कौन अपना दल का है कौन भाजपा से।

फिलहाल संगम लाल गुप्ता व अपना दल पार्टी के लोग प्रमुख को बचा पाने में सफल होंगे या मोती सिंह प्रमुख को हटाकर किसी अपने को प्रमुख बना लेंगे ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। इस मामले से प्रतापगढ़ में एक बार फिर राजनीति का सियासी भूचाल लोगो को देखने को मिल रहा है।