अंतिम तिथि बीतने के 10 दिन बाद भी नहीं मिल पाया है स्कूल के बच्चों को नया यूनिफार्म

गोरखपुर: प्रदेश की योगी सरकार ने इस सत्र में नया यूनिफार्म कोड लागू किया है। जिसमें 400 रूपये में दो जोडी ड्रेस बनवाना है और बच्‍चों केा ड्रेस मिलने के पहले इस स्कूल ड्रेस की गुणवत्ता जांच भी होगी। सरकार की स्कूली बच्चों के हित में उठाए गए इस कल्याकारी कदम से स्कूल प्रबंधन समितियों के पसीने छूट रहें हैं। क्योंकि दी गयी तिथि बीतने के बाद भी अब तक स्कूलों में उक्त गणवेश नही पहुंच सका है। हालांकि जिला समन्वयक प्रशिक्षण सुनील कुमार चौबे ने कहा कि अधिकतर स्कूलों के समितियों में धन भेज दिया गया है और दूसरे स्‍कूलों में भी धन मिलने के बाद भेज दिया जायेगा।

गौरतलब है कि प्रदेश के प्राथमिक विद्यालय के बच्‍चों को 15 जुलाई तक ड्रेस, जूते-मोजे, कापी किताबें और बैग देने का फरमान मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने दिया था लेकिन दी गयी तिथि बीतने के बाद भी अब तक उनके जिले गोरखपुर में मात्र 0.62 प्रतिशत बच्‍चों केा ही यह चीजें मिल पाई हैं। एक बच्‍चे को दो सेट ड्रेस और टाई बेल्‍ट 400 रूपये में देना शिक्षा विभाग के लिये टेढी खीर बन गया है। अधिकारियों का कहना है कि शासन से अ‍भी तक इसके लिये फंड नही आ पाया है । जिसके कारण बच्‍चों को यह चीजें नही मिल पा रही हैं और स्‍कूलों को रूपया नही मिल पाया है।

गोरखपुर जिले में दस-बीस हजार नहीं बल्कि पूरे 3,49,500 बच्चे प्राथमिक स्कूलों में अप्रैल माह तक नामांकित हैं जिनको आज तक ड्रेस, बैंग, कापी किताब, जूते मोजे और टाईबेेल्‍ट का वितरण किया जाना था।

हालांकि मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने गोरखपुर में अपने पांचवे दौरे के समय 500 ब‍च्‍चों केा यह चीजें बांटी थी और बेसिक शिक्षा विभाग के आश्‍वासन पर दावा किया था कि 15 जुलाई तक सभी स्‍कूलों में इन चीजों केा बांट दिया जायेगा। विभाग ने भी दावा किया था कि जिले के शिक्षक महाअभियान चलाएंगे और हर बच्चे को ड्रेस दिलवाएंगे।

जिले के 2900 परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले 3.5 लाख बच्चों में से महज 600 को 8 जुलाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ड्रेस वितरित किया और कुल 1583 एपीएल बच्‍चों के लिये स्‍कूलों के रूपये भेजे गये हैं। इसके आलावा जिन बच्‍चों का जुलाई मेंं सर्वशिक्षा अभियान के तहत नामांकन हो रहा है उनकी भी संख्‍या हजारों में है।

एस. के. चौबे, जिला समन्वयक प्रशिक्षण, गोरखपुर के अनुसार विभाग के द्वारा इन 2200 बच्‍चों के अलावा बाकी किसी भी बच्‍चे के ड्रेस के लिये किसी भी स्‍कूल में धन नही जा सका है। आज मुख्‍यमंत्री की समय सीमा समाप्‍त भी हो गई और सारे दावे फेल हो गये। जिन बच्‍चों बच्चों में अभी ड्रेस बांटी जानी है उनको लेकर अभी कोई तैयारी दिख नहीं रही है। स्‍कूलों में शिक्षकों को बच्चों की ड्रेस की रकम मिलने का इंतजार जारी है।

हालांकि शासन ने 2 जुलाई को ही सर्व शिक्षा अभियान के खाते में 9 करोड़ 36 लाख रुपया भेज दिया है।लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग की धीमी कार्यप्रणाली की वजह से शिक्षक भी बेपरवाह बने हैं। नियम के अनुसार धन जारी होने के पहले शिक्षकों को ड्रेस की कवायद शुरू कर देनी थी, मगर अभी किसी भी विद्यालय में बच्चों का नाप तक नहीं लिया गया है।

जबकि शिक्षा विभाग से जुडे लोगों का कहना है कि अभी तक यह तय ही नही है कि बच्‍चों केा ड्रेस रेडीमेड दिया जायेगा या फिर उनको सिलवाना पडेगा। कपडे के लिये धनराशि विद्यालय के प्रबंध समिति के खाते में आनी है पर अबतक एक भी रूपया किसी के खाते में नही आ सका है।

अध्‍यापकों का कहना है कि 400 रूपये में दो जेाडी ड्रेस तो अभी मिला नही है, कॉपी-किताब, टाई-बेल्‍ट और जूता-मोजा तो दूर की बात है। स्‍कूलों में बच्‍चे आज भी नंगे पैर और फटी किताबों के जरिये अपना ज्ञान बढा रहे हैं। छह साल पहले शासन द्वारा बच्चों के ड्रेस के लिए 200 रूपए की धनराशी स्वीकृति की गई थी। इन 6 सालों में कपड़े के दाम और मजदूरी दोनो में इजाफा हुआ मगर प्रति ड्रेस तय धनराशि जस की तस रही।

प्रबंध समितियां एक लाख से कम धनराशि खर्च के लिए कोटेशन और एक लाख से अधिक के धनराशि खर्च के लिए टेण्डर के जरिये ड्रेस की खरीददारी कराएंगी। कोटेशन के लिए 3 दुकानों से मानक के हिसाब से कपड़ों का रेट लेना होगा और सबसे कम रेट पर खरीददारी करनी होगी। एक लाख से ज्यादा के बजट वाले स्कूलों के लिए टेंडर निकला जाएगा। टेंडर या कोटेशन पाने वाले को ही ड्रेस का कपड़ा खरीदना और सिलाना होगा। सिलाई के पहले सभी बच्चों की माप भी लेनी होगी।कपड़े की क्वालिटी की जांच सर्व शिक्षा अभियान से नियुक्त व्यक्ति करेगा। शिक्षकों और विभागीय अधिकारियों की माने तो यह पूरी प्रक्रिया इस महीने में होना सम्भव ही नहीं है।

गड्ढामुक्त सड़कों के लिए दी गयी टाइम लाइन के फेल होने के बाद अब बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में ड्रेस यूनिफार्म किट वितरण की टाइम लाइन भी फेल हो गयी है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि शासन से ही रूपया अब तक जिले में नही आ सका है इसलिये यह समस्‍या आ रही है। यह हाल सिर्फ ड्रेस का है जबकि जूते मोजे और बेल्‍ट टाई के बारे में तो अभी कोई बात ही नही कर रहा है।

जिस तेजी के साथ सर्व शिक्षा अभियान के तहत ड्रेस और कॉपी किताब वितरण करने की शुरूआत मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने की थी, बेसिक शिक्षा विभाग ने मुख्‍यमंत्री की सारी योजनाओं को धरासायी कर दिया और बच्‍चों को आज भी फटी खाकी की पुरानी ड्रेस और नंगे पैर, प्राइवेट स्‍कूलों की शिक्षा व्‍यवस्‍था के स्‍तर पर तैयार करने की कवायद की जा रही है।

GFR Desk


अंतिम तिथि बीतने के 10 दिन बाद भी नहीं मिल पाया है स्कूल के बच्चों को नया यूनिफार्म