रामकोला: आज ही के दिन 1992 में पुलिस गोलीबारी में किसानों की हुई थी मौत

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कुशीनगर (मोहन राव): दस सितंबर जनपद के गन्ना किसानों के लिए अहम दिन होता है अपने हक के लिए दर्जनों दिनों तक चलने वाला धरना प्रदर्शन था। युवा पीढ़ी के किसानों के लिए यह एक प्रेरणा है। गन्ना भुगतान न होने से किसान भुखमरी के कगार पर आ गये थे। बच्चो की पढ़ाई-लिखाई, बेटियों की शादी की चिंता सताये जा रही थी। किसान मजबूर होकर धरने पर बैठ गए थेे।

आज भले ही उस गोली कांंड की 25वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही हो लेकिन उस घटना के नायकों को देखकर बरबस ही गन्ना किसानों में नया जोश आ जाता है । किसानों के साथ घटित यह घटना रामकोला को पूरे भारत के पटल पर ला दिया और किसानों से जुड़े सभी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय नेता रामकोला की धरती पर जरुर आए।

घटना की जानकारी के संबंध में अतीत के पन्नों में जाना पड़ेगा। अगस्त 1992 में पंजाब चीनी मिल के गेट पर किसान नेता राधेश्याम सिंह के नेतृत्व में गन्ना मूल्य भुगतान तथा अन्य मांगों को लेकर धरना चल रहा था उस समय भाजपा की सरकार थी। तत्कालीन सरकार जिला प्रशासन से धरने को कुचलने का प्रयास किया। किसान अपनी मांग पर अड़े रहे। 10 सितंबर 1992 को उस आंदोलन के मुखिया राधेश्याम सिंह को पुलिस थाने में जबरदस्ती उठा लाई। अपने मुखिया पर जुल्म होता देख किसान भी उग्र हो गए।

पुलिस ने उग्र किसानों पर गोलीबारी की जिस में दो किसान जमांदार मियां व पड़ोही हरिजन की मौत हो गई और दर्जनों किसान घायल हो गए ।बाद मे घायल किसानों में में विपत यादव और जग्गू कमकर की भी मौत हो गई । आंदोलन के नायक राधेश्याम सिंह पर भी पुलिसिया कहर जमकर चला।

रामकोला में कर्फ्यू लगा दिया गया तथा राधेश्याम सिंह सहित सैकड़ों किसानों को जेल भेज दिया गया। इस घटना से पूरा देश हिल गया था। किसान नेता राधेश्याम सिंह ने उसी समय प्रण किया कि जब तक मैं जीवित रहूंगा इन शहीद किसानों की याद में 10 सितंबर को पुण्यतिथि मनाऊंगा।

उन्होंने धरना स्थल पर शहीद हुए किसानों की याद में स्मारक भी बनवाया। जेल से छूटने के बाद किसानों ने राधेश्याम सिंह को हाथों हाथ ले लिया। विधानसभा के चुनाव में राधेश्याम सिंह को रामकोला विधानसभा क्षेत्र की जनता ने निर्दल विधायक चुन दिया बाद में श्री सिंह सपा पार्टी मे सम्मिलित हो गए।