खुशखबरी: सभी सुविधाओं से परिपूर्ण 2020 तक तैयार हो जायेगा एम्स

गोरखपुर: सभी सुविधाओं से युक्त एम्स का निर्माण महानगर में 2020 तक हो जायेगा। शहर के गन्ना शोध संस्थान में महादेव झारखंडी में बनने वाले एम्स के लिए गुरुवार को राज्य सरकार और केंद्र के बीच एम ओ यू पर दस्तखत हो गए। राज्य सरकार ने एम्स के लिए केंद्र सरकार को 90 साल से लिए लीज पर जमीन दी है। एम्स तक बिजली पहुंचाने के उद्देश्य से स्वतंत्र फीडर की स्थापना के लिए मौजूदा वित्तीय वर्ष के बजट में नई मांग के जरिये 36 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं।

गोरखपुर में एम्स के लिए चुनी गई जगह पर केंद्र सरकार एम्स एक्ट के तहत निर्माण कराएगी और संचालन करेगी। इसके अलावा एम्स में शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक पदों के सृजन और भर्ती की कार्यवाही केंद्र सरकार करेगी।मेडिकल व नर्सिंग पाठ्यक्रमों का संचालन भी केंद्र सरकार ही करेगी।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करीब एक साल पहले 22 जुलाई 2016 को गोरखपुर के फर्टिलाइजर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की बुनियाद रखी थी। मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ ने गुरुवार को उसके लिए केंद्र सरकार से करार करके एम्स के निर्माण की राह सुनिश्चित कर दी।

मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई है कि एम्स बनने के बाद पूर्वांचल के लोगों को बेहतर इलाज के लिए कहीं दूर नहीं जाना पड़ेगा। एम्स के लिए आज केंद्र व राज्य सरकार के बीच एमओयू साइन होते वक्त सीएम योगी आदित्यनाथ भी थे।

केंद्र सरकार से करार में प्रदेश सरकार द्वारा लीज पर जमीन दिए जाने, चिह्नित स्थल पर चार लेन का संपर्क मार्ग बनाने, जलापूर्ति करने और स्वतंत्र विद्युत फीडर की स्थापना के बिंदु शामिल किए गए हैैं। इस मौके पर केंद्रीय स्वास्थ्य संयुक्त सचिव सुनील शर्मा और अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ.अनीता भटनागर जैन द्वारा हस्ताक्षर के बाद मुख्यमंत्री ने तेजी से एम्स की स्थापना होने की उम्मीद जताई।

सीएम योगी ने इस मौके पर कहा कि गोरखपुर में एकमात्र बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज है, जिस पर आसपास के जिलों के मरीजों का दबाव रहता है। गंभीर मरीजों को ऐसे में लखनऊ या दिल्ली जाना पड़ता है। इसी में कई मरीजों का बचना मुश्किल हो जाता है। इस मौके पर चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन, चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह, महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ.केके गुप्ता, केजीएमयू के कुलपति डॉ.एमएलबी भट्ट, पीजीआइ निदेशक डॉ.राकेश कपूर, आरएमएल इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ.दीपक मालवीया सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

गोरखपुर में एम्स निर्माण से सम्बंधित खास बातें

1:-यहाँ चलाये जाने वाले ओपीडी ( बहिरंग रोगी विभाग)में तीन संकाय होंगे। जिनमें सर्जिकल व अन्य विशिष्टता, मेडिसिन व अन्य विशिष्टता तथा स्त्री एवं प्रसूति रोग सहित कुल 29 विभाग प्रस्तावित हैं।

2:-एम्स की स्थायी ओपीडी का निर्माण सितंबर 2018 तक पूरा होगा, जबकि चिकित्सालय का निर्माण मार्च 2019 तक हो जाएगा।

3:- 172 आवासों के साथ 120 छात्रों व 240 छात्राओं सहित कुल 360 विद्यार्थियों के लिए यूजी हॉस्टल की भी स्थापना की जाएगी। साथ ही 599 विद्यार्थियों के लिए पीजी हॉस्टल व 432 नर्सिंग विद्यार्थियों के लिए भी हॉस्टल की स्थापना की जाएगी।

4:- चिकित्सालय में दिसंबर 2019 तक 300 बेड, मार्च 2020 तक 500 बेड, और 750 बेड जून 2020 तक उपलब्ध हो जाएंगे। ट्रामा सेंटर का काम मार्च 2020 तक पूरा हो जाएगा।

5:- प्रस्तावित एम्स में मरीजों के लिए 750 बेड होंगे।साथ ही इसमें एक एकेडमिक ब्लॉक होगा और मरीजों के परिजनों के लिए रैन बसेरे भी बनाए जाएंगे। एक ऑडीटोरियम व गेस्ट हाउस का निर्माण भी किया जाएगा।

6:-गन्ना शोध संस्थान की 45.326 हेक्टेयर यानी 112.2 एकड़ क्षेत्रफल में 1750 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा एम्स।

7:-एम्स में प्रारंभिक गतिविधियों के लिए केंद्र सरकार ने एचएससी सीआइ को कार्यदायी संस्था नामित किया है।