काबीना मंत्री राजकिशोर सिंह की हॉट सीट हरैया पर सभी की लगी निगाहें

बस्ती: विधानसभा के पांचवें चरण के मतदान क्षेत्रों में शामिल जनपद की पांच शब्द विधानसभा सीटों में हरैया विधान सभा सीट हॉट मानी जाती है। जहां से सीटिंग एमएलए समाजवादी पार्टी के पूर्व काबीना मंत्री राज किशोर सिंह ने अब तक लगातार हैट्रिक लगाया है। जबकि इस चुनाव में उनका मुकाबला उनके ही समकक्ष दो अन्य प्रत्याशियों से है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि इस विधानसभा के में जीत का सेहरा किसके सर बंधेगा।

बस्ती जनपद के हरैया विधान सभा क्षेत्र में 197959 पुरुष तथा 170319 महिला मतदाताओं को मिलाकर कुल 368278 मतदाता है। जबकि यह आंकड़ा पिछले चुनाव से लगभग 975 मतदाताओं के बढ़ने के बाद पूरा हुआ है। इस विधानसभा क्षेत्र में करीब 55 से 60 फ़ीसदी मतदाताओं के वोट गिरते हैं और सभी दलों में वोटकटवा उम्मीदवार के नाम से लड़ रहे कुछ प्रत्याशी लगभग 15000 वोटों को छिन्न-भिन्न कर सकते हैं। कुल ले देकर इस विधानसभा क्षेत्र में जिस प्रत्याशी के हिस्से में 80 हजार से ज्यादा वोट गिरा, जीत उसी की होगी।

हर्रैया विधानसभा क्षेत्र में अगर पूर्व के विधायकी जितने वाले प्रत्याशियों की बात करें तो राजकिशोर सिंह से पहले बहुजन समाज पार्टी के सुखपाल पांडे, 1993 में जगदंबा सिंह, 1991 में जगदंबा सिंह, 1989 में सुरेंद्र प्रताप नारायण, 1985 में एल के डी के सुखपाल पांडे, 1980 में कांग्रेस के सुरेंद्र ने और 1977 में सुखपाल पांडे ने अपनी जीत दर्ज की थी।

बात करें इस हरैया विधान सभा क्षेत्र के चुनाव की तो पिछले विधानसभा चुनाव 2012 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर लड़े राज किशोर सिंह ने बहुजन समाज पार्टी की प्रत्याशी ममता पांडे को 22986 मतों से हराकर चुनाव जीता था। हलाकि चुनाव हारने के बाद ममता ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। जबकि इस बार भारतीय जनता पार्टी ने ममता की जगह अजय सिंह को टिकट दिया है।

अगर कहें तो अजय सिंह भी शुद्ध भाजपाई या संघी नहीं है। उन्होंने भी पिछला चुनाव पंजे के बल पर लड़ा था और स्थानीय मतदाताओं ने उन्हें 25600 मत देकर विश्वास जताया था। एक दुर्घटना में जिला पंचायत चुनाव के दौरान अजय सिंह पर एक बुजुर्ग को गाड़ी से कुचलकर मार डालने का आरोप लगा था, उनको गिरफ्तार न कर पाने से नाराज पुलिस ने उनके घर पर तोड़-फोड़ कर घंटों तांडव मचाया था। हालांकि वह इसे एक कद्दावर नेता की साजिश करार दिये थे और उस वक्त बीजेपी ने उनका साथ दिया था।

बाद में जब टिकट पाने की बारी आई तो उन्हें अपने संबंधों का लाभ मिला और बीजेपी के प्रत्याशी बन गए। इस बार हर्रैया विधानसभा के चुनाव में उनका मुकाबला बाहूबली व धनबली का तमगा चिपकाए निवर्तमान विधायक राजकिशोर सिंह से है। हालांकि अजय सिंह को जिताने के लिए भाजपा ने अपना पूरा दम लगा दिया है यहां तक कि स्वयं स्थानीय सांसद हरीश द्विवेदी हरैया की सीट को अपना मान सम्मान मानकर चल रहे हैं।

जबकि प्रदेश की सत्ता में काबीना मंत्री के पद पर आसीन रहे और विकास कार्यों के नाम पर राज किशोर सिंह का क्षेत्रीय जनता में अच्छा खासा जनाधार है। उनके मतों में अजय सिंह कितने फीसद सेंध लगा पाएंगे, यह तो मतगणना के बाद ही पता चलेगा। लेकिन एक चीज पूरी तरह से साफ दिख रही है कि सत्ता से बेदखल राजकिशोर सिंह की राह इस बार कांटो भरी है।

एक और बात, जहां 2012 के चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी अनुराधा चौधरी महज पौने 11000 वोट पाकर चौथे स्थान पर थी और चर्चाओं के अनुसार वर्ष 14 में केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद इस विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी का वोट बैंक बढ़ा है तो दूसरी ओर इस बार गठबंधन के चलते राजकिशोर सिंह को पंजे का भी समर्थन मिल रहा है।

कांग्रेस की बात करें तो इस पार्टी को वर्ष 1977 के बाद यहां कोई भी सफलता नहीं मिली। जबकि बसपा ने यहां से विपिन शुक्ला को उम्मीदवार बनाया है जो मूलतः व्यवसाई हैं। कहा जा रहा है कि कि इस बार इस विधानसभा क्षेत्र में एक साथ इतने दिग्गज खड़े हैं तो मुकाबला भी दिलचस्प होगा। जहां बसपा का वोट बैंक एक तरह से महफूज है तो टिकट वितरण से नाराज भाजपा के बागी उम्मीदवार चंद्रमणि पांडे रालोद से ताल ठोक रहे हैं। जो कुल मिलाकर बीजेपी के ही मतों में सेध लगाएंगे।