प्रदेश के शीर्षस्थ तीनों नेताओं को छह माह में लेनी होगी किसी एक सदन की सदस्यता

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गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के नए विधानसभा की सदस्यता ले रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनो उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व दिनेश शर्मा, यह तीनों न तो विधायक है और न ही विधान परिषद के सदस्य। ऐसे में आगामी छः माह के भीतर इन तीन शीर्षस्थ नेताओं को प्रदेश के दोनों सदनों में से किसी एक की सदस्यता ग्रहण करनी होगी।

मालूम हो कि आज शपथ ग्रहण समारोह की शोभा बढ़ा रहे योगी आदित्यनाथ, दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्य प्रदेश के किसी भी सदन के सदस्य नही है। वैधानिक रूप से किसी भी मंत्री को कार्यभार ग्रहण करने के अगले छः माह के भीतर प्रदेश के एक सदन की सदस्यता अनिवार्य है।बात करें विधान परिषद की तो अगले छह माह तक कोई भी विधान परिषद की सीट रिक्त नहीं हो रही है, इसलिए इन्हें विधानसभा के रास्ते ही सदन में पहुंचना होगा।
योगी आदित्यनाथ:- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने भाजपा के फायर ब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ अभी गोरखपुर से भाजपा सांसद हैं। इन्हें अब अगले छह माह के भीतर किसी भी विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचना होगा। इसके लिए प्रदेश के निर्वाचित विधायकों को में से किसी एक को अपने पद से इस्तीफा देना होगा। मालूम हो कि योगी आदित्यनाथ सन् 1998 से लगातार गोरखपुर से सांसद निर्वाचित होते आ रहे हैं। संभावनाओं के मुताबिक उन्हें गोरखपुर जनपद की सदर विधानसभा सीट खाली करवाकर लड़ाया जा सकता है।जहाँ वर्तमान में चौथी बार जीते डॉ आर एम डी अग्रवाल काबिज है।जिन्हें संगठन में शीर्षस्थो द्वारा कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है।
केशव प्रसाद मौर्य:- केशव प्रसाद मौर्य वर्तमान में इलाहाबाद के फूलपुर क्षेत्र से भाजपा सांसद हैं। वे भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। अब जबकि वे उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे हैं, ऐसे में उन्हें भी अगले छह महीने के भीतर किसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचना होगा।उनके लिए भी आवश्यक है कि वे अपने क्षेत्र के किसी विधानसभा क्षेत्र या विधान परिषद का चुनाव लड़कर विधान परिषद की सदस्यता ग्रहण करेंं।
दिनेश शर्मा :-लखनऊ के महापौर व भाजपा के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। अब वे उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे हैं। जिन्हें अपनी महापौर की सीट छोड़कर कहीं से भी चुनाव लड़कर प्रदेश के सदन की सदस्यता लेनी होगी।

भाजपा के सामने अग्नि परीक्षा होगी अपनी दो सांसद सीट व एक मेयर की खाली जगह पर काबिज होना

भाजपा के फायरब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें गोरखपुर सांसद के पद से इस्तीफा देना होगा। इसके लिए पार्टी के भीतरखाने में खुसर पुसर शुरू हो चुकी है। माना जा रहा है कि शुरू से ही बीजेपी की इस परम्परागत सीट पर किसी संघी को लड़ाया जाएगा। ऐसे में पार्टी में किसी वरिष्ठ के नाम पर चर्चा हो सकती है।

वहीं इलाहाबाद के फूलपुर सीट से एमपी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य को भी अपने पद को बरकरार रखने के लिए यह सीट छोड़नी पड़ेगी।

जबकि दूसरे उप मुख्यमंत्री पद पर शपथ ले रहे लखनऊ के महापौर दिनेश शर्मा को भी अपने पद से इस्तीफा देना होगा। ऐसे में प्रदेश की दो संसदीय सीट और एक महापौर की सीट रिक्त हो जाएगी। जिन्हें अपने कब्जे में बनाए रखने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ेगी।

ऐसे में प्रदेश की शीर्षस्थ तीनों कुर्सियों पर आज शपथ लिए इन तीन नेताओं के लिए किसी तीन नवनिर्वाचित विधायकों को अपनी सीट से इस्तीफा देना होगा। इसके बाद ये ये तीनों नेता चुनाव लड़कर विधानसभा या विधान परिषद पहुंचेंगे।