भाजपा बना सकती है किसी ओबीसी को मुख्य मंत्री; केशव मौर्य, संतोष गंगवार, स्वतंत्र देव सिंह दौड़ में आगे

लखनऊ (राकेश मिश्रा): शनिवार को घोषित हुए उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव के परिणाम में भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल किया है। भाजपा इन चुनावों में बिना मुख्य मंत्री के चेहरे के गई थी। पार्टी ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्मे के भरोसे ही देश के सब से बड़े राज्य में चुनावी बैतरणी पार करने का सोचा था और उस कार्य में सफल भी हुई। अब भाजपा के सामने एक ऐसा मुख्य मंत्री चुनने की चुनौती है जो सभी वर्गों को स्वीकार्य हो।

वैसे तो कई चेहरे जैसे गोरखपुर सांसद योगी आदित्यनाथ, यूपी भाजपा अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या, केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा, लखनऊ के मेयर दिनेश शर्मा इस पद के दावेदार हैं लेकिन अगर हम सूत्रों की माने तो पार्टी सूबे का मुख्य मंत्री पिछड़े वर्ग के किसी नेता को बनाने का मन बना चुकी है। ऐसे में कहा जा सकता है की केशव मौर्य इस दौड़ में सबसे आगे हैं।

इन नामों के अतिरिक्त कुर्मी नेता संतोष गंगवार और स्वतंत्र देव सिंह, के अलावा शाहजहांपुर से 8वे बार विधायक बने सुरेश खन्ना का नाम भी इस समय चर्चाओं में शामिल है। इलाहाबाद पश्चिम से विधायक चुने गए पूर्व प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाती सिद्धार्थ नाथ सिंह का भी नाम इस समय सूबे के मुख्य मंत्री के लिए चर्चाओं में शामिल है। गौरतलब है की मोदी वाराणसी में चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व प्रधान मंत्री लाल बहादुर शाष्त्री के घर भी गए थे। यह पहले मौका था जब कोई प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री के घर गया था। कायस्थ जाति से होने का नाते सिद्दार्थ उत्तर प्रदेश में जाति समीकरणों को भी साध सकतें हैं।

वैसे चर्चाओं का बाजार तो गर्म है ही लेकिन उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की जोड़ी किसी पिछड़ी जाति के नेता का नाम पर मुहर लगा सकती है। यदि पार्टी किसी बैकवर्ड को अगर मुख्य मंत्री चुनती है तो ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष किसी सवर्ण को बना सकती है। पार्टी लखनऊ मेयर और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा को इस पद की जिम्मेदारी दे सकती है। श्री शर्मा को संगठन के कार्यों का लंबा चौड़ा अनुभव है। 53 वर्षीय श्री शर्मा 2014 में प्रधान मंत्री के गृह राज्य गुजरात में चुनावी बागडोर संभल चुके हैं। श्री शर्मा मोदी के खासमखास भी माने जाते हैं।

अगर हम महाराष्ट्र, हरियाणा, और झारखण्ड को उदहारण माने तो इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता है की मोदी-शाह की जोड़ी किसी एक नए चेहरे को सामने ला सकती है। मोदी ने जाट बाहुल्य हरियाणा में एक गैर जाट, मराठाओं के महाराष्ट्र में एक ब्राह्मण और झारखण्ड में गैर जन जाति को मुख्य मंत्री बना कर सबको चौका दिया था। साथ में यही भी सन्देश दिया था पार्टी द्वारा किसी जाति विशेष को समर्थन नहीं दिया जायेगा।

वहीँ अगर हम स्वन्त्र देव की बात करे तो सूत्रों के अनुसार शनिवार को चुनाव परिणाम के रुझान आने के बाद उन्हें दिल्ली बुला लिया गया। ऐसे में सम्भावना है की उन्हें पार्टी सूबे का मुख्य मंत्री घोषित कर सकती है। गौरतलब है की मौर्या को प्रदेश अध्यक्ष चुनने से पहले स्वन्त्र देव का नाम भी चर्चा में आया था और मौर्या के साथ वो भी फ्रोन्टरनर थे।

केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार प्रदेश में पार्टी के बहुत पुराने नेता हैं और पिछड़ों के नेता भी माने जातें हैं। वहीँ सुरेश खन्ना की सम्भावना तो बहुत नहीं है लेकिन पार्टी उन्हें विधान सभा अध्यक्ष बना सकती है।

सूत्रों के अनुसार पार्टी रविवार को होने वाली संसदीय बोर्ड में मुख्य मंत्री का नाम तो फाइनल कर लेगी लेकिन उसकी घोषणा होली के बाद ही होने की सम्भावना है। पार्टी संभवतः उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्य मंत्रियों के नाम एक साथ घोषित कर सकती है।