देवरिया एसिड अटैक: क्या पुलिस की तत्पर कार्यवाही ने बेगुनाहों को पंहुचा दिया जेल!

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देवरिया (राकेश मिश्रा): बीते महीने की 31 जुलाई को जिले एक युवती पर पुलिस अधीक्षक आवास से चन्द कदम दूर मोटरसाइकिल सवार बदमाश तेजाब फेंक झुलसा कर फरार हो गये। झुलसी युवती को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने बड़ी तत्परता दिखते हुए तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार भी कर लिया। लेकिन मामला यहीं ख़त्म नहीं हो जाता है। गिरफ्तार व्यक्तियों के घरवालों ने आरोप लगाया है की पुलिस ने आनन फानन में बिना किसी जांच पड़ताल के जिन लोगों को गिरफ्तार किया है वो पूरी तरह से बेकसूर हैं।

पुलिस महानिदेशक और देवरिया पुलिस अधीक्षक राजीव मल्होत्रा को लिखे एक पत्र में घरवालों ने आरोप लगाया है की पुलिस ने जिन तीन लोगों को गिरफ्तार किया है और जिन्हे बदमाश बता रही है दरअसल उनमे से दो सीधे साधे सरकारी कर्मचारी हैं और वहीँ एक रिटायर्ड शिक्षक हैं।

गिरफ्तार तीन व्यक्तियों में से एक कुबेरनाथ की उम्र 70 वर्ष है वहीँ अशोक की उम्र 50 और ब्रजेश मिश्रा की उम्र 40 वर्ष है। अशोक और बृजेश दोनों सरकारी कर्मचारी है।

अशोक उत्तर प्रदेश सरकार के रजिस्ट्रेशन विभाग में कर्मचारी हैं वहीँ ब्रजेश मिश्रा पेशे से अध्यापक हैं। अशोक की गिरफ्तारी उनके ऑफिस सलेमपुर से करीब 11 बजे हुई वहीँ ब्रजेश मिश्रा की गिरफतारी बरहज बाजार से उस वक़्त हुई जब वो बच्चों को अपने स्कूल में पढ़ा रहे थे।

घरवालों का कहना है की लड़की ने इन लोगों के ऊपर गलत आरोप लगाया है और पुलिस ने जल्दबाजी में इनको आनन फानन में गिरफ्तार कर लिया। कुछ बातें हैं जिन पर गौर करने पर यह लगता है की कहीं सचमुच पुलिस इस मामले में जल्दबाजी में कोई गलती तो नहीं हुई। जरा इन बातों पर गौर करें-

–लड़की पर तेजाब से हमला देवरिया के एसपी ऑफिस के पास सुबह 9 से 9.30 के बीच होता है।
–पुलिस तत्परता दिखाते हुए इस मामले को दोपहर तक सॉल्व भी कर देती है और तीनों लोगों को गिरफ्तार कर लेती है।
— पुलिस ने एक को बरहज के एक गाँव से, दूसरे को बरहज बाजार से और तीसरे को सलेमपुर से 11 बजे के करीब गिरफ्तार किया।

अब यहाँ यह सवाल उठता है की 9.30 बजे तक यह तीनों लड़की पर तेजाब फेंक कर बिजली की तेज गति से अपने अपने गंतव्य स्थान पर पंहुच जाते हैं। जो की सामान्य तौर पर बरहज या सलेमपुर के रास्ते को देखते हुए संभव नहीं है। मतलब कोई फ़िल्मी व्यवस्था की तरह प्लानिंग करके और उसी गति से अपने पाने जगह पंहुच जाए। ऐसा करना 70 और 50 साल के व्यक्ति के लिए तो संभव नहीं ही लगता है। यहाँ यह ध्यान देने योग्य बात है की पुलिस ने इन तीनों लोगों को तेजाब फेँकने के आरोप में गिरफ्तार किया है ना की उसकी प्लानिंग के लिए। अगर पुलिस इस बात के लिए इन्हे गिरफ्तार करती की इनलोगों ने प्लान कर के किसी और से तेजाब फेंकवाया है तो वो बात कुछ अलग होती।

घरवालों का कहना है की लड़की के घरवालों ने पूरी प्लानिंग कर के उन्हें फसाया है। उनका कहना है की क्या पुलिस ने इस बात को जांचने की कोशिश की वो लड़की कहाँ सिलाई कढ़ाई सीखती है और कब से सीख रही है? कहीं ऐसा तो नहीं की इस आरोप को लगवाने के लिए ही लड़की की पढाई का नाटक रचा गया है!

गिरफ्तार व्यक्तियों के घरवालों का कहना है की अगर पुलिस कह रही है की इन तीनों ने ही तेजाब फेका है तो क्या पुलिस ने उनके मोबाइल को सर्विलैंस पर डाल यह जानने की कोशिश की यह लोग उस समय घटनास्थल पर उपस्थित थे या नहीं! कुबेरनाथ मिश्रा का मोबाइल नंबर 97920 92287, ब्रजेश कुमार मिश्रा 9450667835, अशोक कुमार मिश्रा 9450667835 का मोबाइल क्या उस समय घटना वाली जगह पर था यह जानना जरुरी है और पुलिस को इस बारे में तफ्तीश करना चाहिए। अब इनलोगों ने अपना मोबाइल कहीं और रख इतनी गहरी प्लानिंग कर तेजाब फेंक अपने अपने स्थान पर पंहुच गए तो वो बात अलग है और ऐसा हो भी सकता है लेकिन अगर ऐसा हुआ तो पुलिस को इस बात को सामने लाना चाहिए की ये सब कैसे हुआ।

हालांकि जब इस बाबत इस संवाददाता ने देवरिया एसपी राजीव मल्होत्रा से बात करनी चाही तो उनके पीआरओ ने बताया की लड़की ने इन तीनों लोगों को अपने ऊपर तेजाब फेकते हुए देखा है और यही कारण है पुलिस ने बड़ी तत्पर कार्यवाही कर इन तीनों को गिरफ्तार किया।

जानकारी के अनुसार लड़की और गिरफ्तार व्यक्तियों के परिवार के बीच बहुत पुरानी रंजिश है। इन दोनों परिवार के बीच कई बार पहले भी विवाद, यहाँ तक की रेप के आरोप भी लग चुके हैं। इनके बीच मुकदमेबाजी भी चल रही है। गिरफ्तार व्यक्ति के परिवारवालों ने लड़की के घर के सदस्यों के खिलाफ 135/16 धारा 147, 148, 149, 307, 326, 323, 504 आईपीसी के अंतर्गत मुकदमा भी लिखवाया है। इस मुक़दमे में लड़की के घरवालों के दो सदस्य विकास उर्फ राजन और मारकण्डेय मिश्र का जमानत हाई कोर्ट से हो गया है जबकि एक और सदस्य अमित कुमार मिश्र अभी फरार है।

गिरफ्तार व्यक्तियों के घरवालों का कहना है की इसी मुकदमें के कारण मारकण्डेय मिश्र लगातार अशोक मिश्र तथा कुबरे नाथ मिश्र पर समझौते के लिये दबाव बना रहे थे। अब सच्चाई क्या है यह पूरी तरह से पुलिस को सामने लाना चाहिए जिस से अगर इस केस में बेगुनाहों को सजा मिल रही है तो कम से कम उससे बचा जा सके।