अतरौलिया विधान सभा: त्रिकोणीय लड़ाई में बसपा मार सकती है बाजी

आजमगढ़: अतरौलिया से बसपा प्रत्याशी अखंड प्रताप सिंह ने निवर्तमान विधायक समाजवादी पार्टी के संग्राम यादव पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा है की विधायक ने अपने कार्यकाल में क्षेत्र में सिर्फ गुंडई और अराजकता ही फैलाई है और गरीब जनता का शोषण किया है।

एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा की पिछले पांच वर्षों में स्थानीय जनप्रतिनिधि ने क्षेत्र में विकास का कोई भी कार्य नहीं किया। तमाम प्रतिभाएं होने के बाद भी शिक्षा अपने निम्नतम स्तर पर है। बिजली, पानी, सड़क जैसी मुलभुत सुविधाओं का आभाव है।

उन्होंने कहा की समूचे क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत जर्जर हो चुकी है। प्रदेश की अखिलेश सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा की सपा सरकार लुटेरी है और पांच वर्षों में कोई भी विकास का काम नहीं किया। उन्होंने सपा सरकार पर तंज कसते हुए कहा की अखिलेश सरकार ने काम तो कुछ किया नहीं है उलटे जनता की गाढ़ी कमाई अपने प्रचार प्रसार पर खर्च कर रही है।

श्री सिंह ने कहा की अगर प्रदेश को लूट, भ्रष्टाचार, अराजकता से छुटकारा पाना है तो बसपा की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ लानी होगी। उन्होंने कहा की बसपा विधान सभा चुनाव के पहले पांच चरणों में जोरदार प्रदर्शन कर रही है और यह देख विरोधियों के हाथ पाँव फूल गएँ हैं।

उन्होंने कहा की अपनी हालात पतली होती देख भाजपा ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी समेत अपने आधे से ज्यादा मंत्रिमंडल को चुनाव प्रचार में झोंक दिया है। लेकिन नतीजा कुछ भी होने वाला नहीं है। उन्होंने कहा की भाजपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन को इस चुनाव में जोरदार शिकस्त मिलने वाली है और बहन मायावती के नेतृत्व में बसपा पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी।

गौरतलब है की अतरौलिया विधान सभा में अनुसूचित जातियों की संख्या लगभग 70000 है। उसके बाद यादवों की संख्या है। इस विधान सभा में यादव मतदाता 66000 के करीब है। तो वहीँ राजपूत और ब्राह्मणों की संख्या क्रमशः 66000 और 50000 है। निषाद मतदाताओं की संख्या 30000 के करीब है तो कुर्मी 26000 के करीब हैं। राजभर और मुसलमानों की संख्या क्रमश 22000 और 16000 है।

पिछले चुनाव में यहाँ सपा के संग्राम यादव विजयी हुए थे तो वहीँ 2007 के विधान सभा चुनाव में जनता ने यहाँ से बसपा के सुरेंद्र प्रसाद मिश्र को चुन कर विधान सभा भेजा था।

जातीय गणित के हिसाब से देखा जाए तो मायावती ने इस विधान सभा से एक ठाकुर उम्मीदवार पर दांव लगा कर विरोधियों के लिए मुश्किल पैदा कर दी है। अनुसूचित जाति बाहुल्य इस विधान सभा में कई बार ठाकुर और ब्राह्मण मतदाता निर्णायक साबित होते रहें हैं। मुसलमान मतदाता भी भाजपा को हरा सकने वाले किसी शशक्त उम्मीदवार पर अपना ठप्पा लगाएगा। बीते पांच वर्षों में निवर्तमान विधायक द्वारा विकास कार्य को बड़े पैमाने पर अंजाम ना देने के कारण भी हवा उनके खिलाफ हो सकती है।

अंतिम परिणाम किस के पक्ष में जाएगा ये तो 11 मार्च को पता चलेगा लेकिन स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर यह कहा जा सकता है की त्रिकोणीय लड़ाई वाले इस विधान सभा में बसपा का पलड़ा फिलहाल भारी है।