बाथरूम बनवाते समय न करें यह भूल, अन्यथा छिन जाएगा जिंदगी का चैन और सुकून

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सामान्यत: भवन के उत्तर पश्चिमी हिस्से में शौचालय का निर्माण किया जाना चाहिए। स्थानाभाव में मध्य पश्चिम दिशा में भी शौचालय का निर्माण किया जा सकता है।

– शौचालय रहित स्नानगृह बनाने के लिए उत्तर दिशा के पश्चिमी कोने से मध्य उत्तर तक का स्थान भी उपयुक्त है। पूर्व दिशा के दक्षिणपूर्व व उत्तरपूर्व के दोनों कोनों को छोड़ते हुए शेष भाग में स्नानगृह का निर्माण करवाएं।

– स्नानगृह की आंतरिक सज्जा में बाथ फिटिंग पूर्वी या उत्तरी दीवार पर रखी जानी चाहिए। शौचालय में टॉयलेट सीट पश्चिमी या दक्षिणी दीवार पर रखी जानी चाहिए।

– विद्युत उपकरणों को जल से यथासंभव दूरी और सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करके ही स्नानगृह के यथासंभव आग्नेय या वायव्य कोण में रखा जाना चाहिए।

– यदि स्नानगृह के साथ ही ड्रेसिंग रूम भी बनावाया जाए तो स्नानगृह के पूर्व या उत्तर में रखा जाना चाहिए। ड्रेसिंग रूम में मिरर या आइना पूर्वी या उत्तरी दीवार पर लगाए जाने चाहिए।

– शुद्धवायु व प्रकाश की निर्बाध आपूर्ति की व्यवस्था स्नानगृह में सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है ताकि रोगकारी जीवाणुओं की वृद्धि न्यूनतम हो। सूर्य की रश्मियों का यदि सीधा प्रवेश स्नानगृह में संभव हो तो बहुत बेहतर होता है

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