भालोटिया मार्केट: जानें, क्यों और कैसे खुद ‘बीमार’ है करोड़ों लोगों को सेहतमंद करने वाली पूर्वांचल की सबसे बड़ी दवा मंडी

गोरखपुर (राजीव आर तिवारी): जरा सोचिए, जिसके कंधे पर करोड़ों लोगों को सेहतमंद करने की जिम्मेदारी हो और वह खुद बीमार हो जाए तो परिणाम क्या होगा? स्वाभाविक है परिणाम सिहरन पैदा करने वाला है। गोरखपुर की हृदयस्थली कहे जाने वाले गोलघर के टाऊन हॉल के निकट स्थित दवाओं की थोक मंडी भालोटिया मार्केट किसी परिचय का मोहताज नहीं है। वजह स्पष्ट है, भालोटिया मार्केट से होने वाली दवाओं की आपूर्ति से ही पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बिहार के बीमार लोगों की धड़कने चलती हैं।

भालोटिया मार्केट की उपयोगिता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं हफ्ते में एक दिन रविवार को साप्ताहिक बंदी होने की वजह से चारों तरफ अफरातफरी मच जाती है। इस बहुचर्चित मार्केट में दवा का कारोबार करीब चालीस वर्षों से हो रहा है। मौजूदा दौर में यहां प्रतिदिन करोड़ों रूपए की खरीद-बिक्री होती है। सुबह दुकानें खुलने से पहले ही दूरदराज से यहां हजारों की संख्या में खुदरा दवा विक्रेता पहुंच जाते हैं। इस प्रकार यदि भालोटिया मार्केट को पूर्वांचल की लाइफ लाइन कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

(भालोटिया मार्केट के अंदर का मुख्य मार्ग, जहां हर वक्त गंदे पानी का रिसाव होते रहता है)

पर अफसोस कि यह मार्केट खुद तमाम तरह की बीमारियों से जकड़ा हुआ कराह रहा है, किन्तु कोई सुनने वाला नहीं। हां, अब उम्मीद जगी है, क्योंकि गोरखपुर के लोकप्रिय जननेता आदित्यनाथ योगी सूबे के मुखिया बने हैं। कारोबारियों को लग रहा है कि निश्चित ही मुख्यमंत्री की नजर भालोटिया मार्केट पर जाएगी और यहां की समस्याएं दूर होंगी।

बताते हैं कि भालोटिया मार्केट का निर्माण करीब चालीस वर्ष पूर्व हुआ था। उस वक्त केवल 4-5 दुकानें हुआ करती थीं। उसके बाद धीरे-धीरे कृष्णा काम्प्लेक्स, मलाव भवन, जीएम कॉम्लेक्स, शिवम काम्प्लेक्स, गंगा दवा बाजार, गौतम मार्केट, पशुपति दवा बाजार आदि का निर्माण हुआ। इस मार्केट में दवा का थोक कारोबार करने वाली करीब पांच सौ दुकानें होंगी। इन दुकानों के संचालकों के अलावा नौकरी करने वालों की संख्या लगभग तीन हजार है। यानी तीन हजार परिवारों की रोजी-रोटी का काम इस मार्केट की दुकानों से चलता है।

(जलनिकासी की व्यवस्था न होने से मल-मूत्र वाले गंदे पानी से बजबजाती गोरखपुर स्थित भालोटिया मार्केट की एक गली)

इनके अलावा यह मार्केट ठेले और रिक्शे वालों की आजीविका का भी बड़ा साधन है। साथ ही कुछ लोगों का परिवार यहां रद्दी गत्ता और कागज बीनने से चलता है। अब यदि बात समस्या और सुविधाओं की करें तो यह किसी आश्चर्य से कम नहीं है। सरकार को भारी राजस्व देते हुए करोड़ों लोगों को जीवनदान देने वाले भालोटिया मार्केट के मुख्य द्वार पर बजबजाता हुआ गंदा जलजमाव जबर्दस्त दुर्गंध बिखेरता है।

यानी मार्केट में आने वालों का स्वागत दुर्गंध और गंदगी से होता है। जब अंदर बाजार में प्रवेश करते हैं तो पूरी तरह से उखड़ी पड़ी सड़कें चाल-ढाल बिगाड़ देती हैं। चाहें आप बाईक से जाएं या पैदल, नशेड़ियों की तरह लड़खड़ाना तो पड़ेगा ही। अंदर मार्केट की दशा यह है कि यदि नाक पर बगैर रुमाल रखे आपने प्रवेश कर लिया तो समझिए आपकी दुर्दशा तो होनी ही है।

इस पूरे मार्केट में पुरुषों के लिए केवल दो यूरिनल हैं, जो हर घंटे भर जाता है और मार्केट में विचरण करते रहता है। यूं कहें कि ओवर फ्लो होकर चारों तरफ फैलता रहता है। दिलचस्प यह है कि इस बड़ी दवा मंडी विक्रेताओं का अपना संगठन भी है, पर उनकी बात कोई सुनता ही नहीं। बताते हैं मार्केट की समस्याओं के बाबत समय-समय पर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करने का प्रयास किया जाता है, पर परिणाम वही ढाक के तीन पात।

समस्याओं के निदान के लिए बीते 7 अप्रैल को भी दवा विक्रेता समिति के पदाधिकारियों ने नगर निगम में ज्ञापन दिये। उस ज्ञापन पर कार्रवाई करते हुए 9 अप्रैल को नगर निगम के 80 कर्मचारियों ने 2 जेसीबी और 4 ट्राली के साथ आए और थोड़ा-बहुत सफाई का काम किए। उसके बाद फिर वही दशा। चूंकि मार्केट की साफ-सफाई निरंतर प्रक्रिया है, जो रोज-रोज होनाचाहिए। पर, यहां रोज-रोज सफ़ाई नहीं होती, मिनट दर मिनट गंदगी जरूर फैलती है।

मेरा दर्द ना जाने कोय…

भालोटिया मार्केट में दवा के कुछ थोक कारोबारियों से बात हुई तो उन्होंने अपने-अपने अंदाज में अपना दर्द बयां किया।

(पीडी फार्मा के संचालक दिलीप जैन)

पीडी फार्मा के संचालक दिलीप जैन कहते हैं कि मार्केट में बहुत सारे कम्पलेक्स बन गए हैं, पर स्ट्रीट लाइट और पेयजल की व्यवस्था नदारद है।

(केएन मेडिकल एजेंसी के संचालक फिरोज शेरेन खान)

केन मेडिकल एजेंसी के संचालक फिरोज सेरेन खान का कहना है कि मार्केट की समस्या धीरे-धीरे पिछले बीस वर्षों से बढ़ती रही। अब वह गंभीर रूप धारण कर चुकी है।

(शिव ड्रग एजेंसी के संचालक सुजीत गुप्ता)

शिव ड्रग एजेंसी के सुजीत गुप्ता का मानना है कि यहां के व्यापारी जिस तरह सरकार को भारी मात्रा राजस्व देते हैं, उसके अनुरूप उनके पास कोई सुविधा नहीं है और न ही व्यापारियों की सुविधाएं देने के लिए कोई प्रयास कर रहा है। यूं कहें कि सुविधाएं नदारद हैं।

  (अमर मेडिकल एजेंसी के संचालक योगेन्द्र नाथ दूबे)

दवा विक्रेता समिति के अध्यक्ष योगेन्द्र नाथ दूबे का मानना है कि यहां व्यवसाय तेजी से बढ़ा है। सौ फीसदी बिलिंग पर काम होता है। मार्केट में एक पार्किग की सख्त जरूरत है। मार्केट में सुविधाओं की बेहतरी के लिए आवाजें बुलंद की जा रही हैं, पर शासन-प्रशासन के कानों पर जूं नहीं रेंग रहा है।

   (निशी फार्मा के संचालक नरसिंह पांडेय (कोषाध्यक्ष, दवा विक्रेता समिति)

दवा विक्रेता समिति के कोषाध्यक्ष और निशी फार्मा के संचालक नरसिंह पाण्डेय कहते हैं यहां गंदगी का जो अंबार लगा है, उसके बीच जीने को हमलोग अभिशप्त हो गए हैं। यहां कारोबार को देखते हुए तुरंत कोई राष्ट्रीयकृत बैंक और एटीएम की व्यवस्था होनी चाहिए, जो नहीं है।

 (तृप्ति फार्मा के संचालक बीनू अग्रवाल)

तृप्ति फार्मा के बीनू अग्रवाल कहते हैं कि मार्केट में रोज करोड़ों का कारोबार होता है, पर सुविधाएं बिल्कुल नहीं है। ऊपर से इंस्पेक्टर राज और दुखी किए हुए है।

(एआर फार्मास्यूटिकल केसंचालक मनीष अग्रवाल (कार्यकारिणी सदस्य, दवा विक्रेता समिति)

एआर फार्मास्यूटिकल के संचालक व समिति के कार्यकारिणी सदस्य मनीष अग्रवाल का मानना है कि टैक्स की व्यवस्था कुछ ज्यादा ही परेशान कर रही है। कभी-कभार तो परिवार का जीवन यापन में भी दिक्कत होने लगती है।

(शिवम इंटरप्राइजेज के संचालक सुरेन्द्र गुप्ता)

शिवम इंटरप्राइजेज के सुरेन्द्र गुप्ता भी पार्किंग न होने और गंदगी के अंबार से आजिज आ चुके हैं। ओरिएंट फार्मा के ओमप्रकाश का कहना है कि बिजली की समस्या भी बहुत गंभीर है।

(ओरिएंट फार्मा के संचालक ओमप्रकाश)

उनका कहना है की एक-एक पोल से दो-तीन सौ कनेक्शन है, जिससे अक्सर काम में बाधा पड़ता है। दिक्कत यह है कि बिजली का केबिल बदलें कि कारोबार करें, यह समझ में नहीं आता।

  (मानस मेडिकल एजेंसी के संचालक अमित सिंह)

मानस मेडिकल के अमित सिंह कहते हैं थोक दवा व्यापारी सरकार को रेवेन्यू का ब़ड़ा हिस्सा यहां से देते हैं, पर यहां सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। कम से कम एक पुलिस पिकेट तो होना ही चाहिए। अमित कहते हैं कि नाले चोक रहते हैं। मार्केट के मुख्य मार्ग पर रोज सीवर का गंदा पानी जमा रहता है। हाईजेनिक मामले में भी स्थिति बहुत खराब है। लघुशंका करने की समुचित व्यवस्था नहीं है। शर्म के मारे लोगों को परेशान रहना पड़ता है।

(गौरव मेडिकल एजेंसी के संचालक संजीव कुमार बंका)

गौरव मेडिकल एजेंसी के संजीव कुमार बंका कहते हैं कि सबसे समस्या तो उस वक्त पैदा हो जाती है जब कोई महिला ग्राहक आती है और उसे प्रसाधन केन्द्र जाना होता है।

(सभी चित्र सूरज सिंह)

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