कुशीनगर: ढह गये सपा के धुरंधरों के किले, सभी बड़े नेता हारे

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कुशीनगर (मोहन राव): कभी सपा का गढ़ रहा यह जनपद आज धुरंधरों के रहते हुए भी ढह गया। जिस तरह से सपा के जमीनी धुरंधर नेताओं को भाजपा के सामान्य कार्यकर्ताओं ने भारी मतों से पराजित किया उससे तो यही लगता है कि राजनीति सिर्फ हवा में नहीं बल्कि जो वादा किया उसे निभाना होगा की तर्ज पर ही हो सकती है।

जिले में इस बार की विधानसभा चुनाव में सपा सरकार के कैबिनेट मंत्री ब्रह्मा शंकर त्रिपाठी, राज्यमंत्री राधेश्याम सिंह तथा जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश राणा के पिता डॉक्टर पूर्णमासी देहाती की प्रतिष्ठा दांव पर थी। खास बात यह है की यह तीनों नेता जमीनी माने जाते रहे हैं।

राधेश्याम सिंह तो किसान नेता के रूप में चर्चित हैं। 1992 में गन्ने की राजनीति से अपनी पारी की शुरुआत करने वाले राधेश्याम सिंह राज्य सरकार में मंत्री तक का ओहदा पाए। श्री सिंह दो बार रामकोला से विधायक रहने के बाद तीसरी बार 2012 में हाटा विधानसभा से विधायक बने। अपनी दबंग छवि के कारण दोस्ती स्थाई नहीं रख पाते हैं इसलिए क्षेत्र का विकास कराने के बावजूद भी चुनाव भारी मतों से हार गए।

कृषि राज्यमंत्री किसान नेता होने की वजह से राधेश्याम सिंह से किसानों की उम्मीदे थी कि जनपद के लिए कुछ विशेष करेंगे। क्षेत्र में जिस गन्ने की राजनीति की बदौलत उनकी पहचान बनी वही गन्ना किसान समस्याओं को लेकर भटक रहा है। दूसरी सबसे बड़ी बात यह कि लोकल स्तर की राजनीति में हस्तक्षेप के कारण भी नुकसान हुआ है। जिससे वहां का दूसरा वर्ग उनके विरोध में खड़ा हो गया। इस चुनाव में वह वर्ग विरोधी वोट के रुप में बदल गया।

हाटा में राधेश्याम सिंह को भाजपा के पवन केडिया ने भरी मतों से हराया। केडिया को 103864 वोट मिले तो राधेश्याम सिंह को 50788 मतों से ही संतोष करना पड़ा।

दबंग नेता राधेश्याम सिंह का नाता विवादों से भी बहुत गहरा रहा है।कभी अधिकारी को तो कभी पत्रकार को गाली देने के लिए उनका नाम खूब उछला। चुनाव के दरमियान ही एक दैनिक अखबार के पत्रकार से भी विवाद हुआ था और उसका ऑडियो खूब वायरल हुआ था। इस घटना के बाद पत्रकारों ने भी यूनिटी बनाकर श्री सिंह के खिलाफ वोट करने की जनता से अपील करते थे। वहीँ पूर्णमासी देहाती के बेटे हरीश राणा ने भी राधेश्याम सिंह को भी खूब गाली बाकि थी। यह ऑडियो भी खूब वायरल हुआ था।

जानकारों के अनुसार हरीश राणा और राधेश्याम सिंह में ऐसी ठनी थी की दोनों ने इस बार एक दूसरे को हराने के लिए अंदरखाने खूब जुगत लगायी। कहा जा रहा है की दोनों नेताओं ने पार्टी लाइन से इतर जाकर एक दूसरे के वोट बैंक में खूब सेंध लगाने की कोशिश की और नतीजा दिखा रहा है की दोनों सफल भी हुए। यह बात दीगर है की चुनावी अखाड़े में दोनों को ही मात मिली।

वहीं सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे ब्रह्मा शंकर त्रिपाठी सिर्फ वादों में ही रह गए। जनता भी इस चीज को भांप ली और इस चुनाव में तीसरे पायदान पर उनको खड़ा कर दिया। कुशीनगर से भाजपा के सामान्य कार्यकर्ता रजनीकांत मणि त्रिपाठी ने जीत दर्ज की। श्री त्रिपाठी को 97132 वोट मिले तो दूसरे नंबर पर बसपा के राजेश प्रताप रहे। उन्हें 49029 मत मिले। ब्रह्माशंकर को 46369 मत पाकर तीसरे स्थान पर ही संतोष करना पड़ा।

सपा के एक और बुजुर्ग नेता तथा निवर्तमान विधायक डॉक्टर पूर्णमासी देहाती जो अपनी सादगी के लिए जाने जाते हैं। जनता के बीच की उपस्थिति दर्ज कराते थे लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं कराते था धीरे-धीरे आम जान लोग उन से दूर होते चले गए। देहाती को भारतीय सुहेलदेव पार्टी के रामानंद बौद्ध ने भरी मतों से हराया। हराया। बौद्ध को 102782 मत मिले तो वहीँ देहाती को 47053 वोट प्राप्त हुए।

कहना गलत नहीं होगा की जमीन से जुड़ कर राजनीति शुरू करने वाले सपा नेताओं का जमीन से काटना ही उनकी हार का प्रमुख कारण बना। रही सही कसर कुशीनगर में सपा में जबरदस्त गुटबाजी ने पूरी कर दी। पिछले कुछ महीनों से यह गुटबाजी और तेज हो गई थी। विधानसभा चुनाव में यह दोनों गुट आपस में अंदर ही अंदर बदला ले रहे थे तथा अपने अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से एक दूसरे के विधानसभा क्षेत्रों में भी विरोध करा रहे थे। यही कारण है कि जमीनी नेता होते हुए भी यह लोग भाजपा के सामान्य कार्यकर्ताओं से चुनाव हार गए।