फाइनल रिपोर्ट स्पेशल Archives - Gorakhpur Final Report

GFR DeskOctober 21, 2017
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गोरखपुर (राकेश मिश्रा): उत्तर प्रदेश सरकार पर एक बार फिर करारा हमला बोलते हुए पूर्व IAS एसपी सिंह ने सूबे की योगी आदित्यनाथ सरकार से पूछा है कि क्या अब डीपी यादव जैसे आपराधिक छवि वाले या फिर गायत्री प्रजापति जैसे भ्रष्ट/बलात्कारी को भी अधिकारियों को खड़े होकर सैल्यूट मारना पड़ेगा।

गौरतलब है कि यूपी के मुख्य सचिव राजीव कुमार ने वरिष्ठ अधिकारियों को भी जनप्रतिनिधियों से खड़े होकर मिलने और उन्हें प्राथमिकता देने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। मुख्य सचिव ने पत्र लिखकर अधिकारियों से कहा है कि वे नेताओं, मंत्रियों, विधायकों और सांसदों का सम्मान करें। उनके प्रार्थना पत्रों को प्राथमिकता से निपटाएं।

इसी निर्देश पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व आईएएस सूर्य प्रताप सिंह ने फेसबुक पोस्ट के जरिए उन्होंने पूछा है कि ”अधिकारी कुर्सी छोकर नमस्ते करें,नहीं तो दंडित होंगे…..क्या डीपी यादव जैसे अपराधी या फिर प्रजापति जैसे भ्रष्ट/बलात्कारी को भी ये सम्मान मिले ? २००७ में यह नियम बना था कि अधिकारीगण विधायकों /जंप्रतिनिधियों को खड़े होकर नमस्ते करेंगे, चाहे वह अपराधी ही क्यों न हो !!”

उन्होंने लिखा है,”पाँव लगें, VIP ‘श्रीमन’ के ……. ‘कुर्सी’ पर चिपके रहने का आशीर्वाद मिलेगा !”

”अधिकारी कुर्सी छोकर नमस्ते करें,नहीं तो दंडित होंगे…..क्या डीपी यादव जैसे अपराधी या फिर प्रजापति जैसे भ्रष्ट/बलात्कारी को भी ये सम्मान मिले ? २००७ में यह नियम बना था कि अधिकारीगण विधायकों /जंप्रतिनिधियों को खड़े होकर नमस्ते करेंगे, चाहे वह अपराधी ही क्यों न हो !!”

एसपी सिंह आगे लिखते हैं,” यह सर्वमान्य सत्य है कि ‘सम्मान माँगा नहीं जाता, बल्कि अर्जित किया जाता है (Respect is not demanded but commanded)….. असली सम्मान पद से नहीं, प्रतिभा/सदाचारण से आता है। यदि अच्छा आदर्श आचरण हो तो सम्मान दिल से आएगा ही। सम्मान एकतरफ़ा नहीं हो सकता है बल्कि पारस्परिक होता है। यह नहीं हो सकता कि अधिकारी तो विधायकों का सम्मान करें और जनप्रतिनिधि उन्हें गाली गलौज करें।”

उन्होंने लिखा है,” पिछले एक दशक में १८ बार ऐसे शासनादेश क्यों जारी करने पडे, यह सोचनीय दिलचस्प विषय है। १४ दिसम्बर, २००७ को पहला शासनादेश जारी हुआ था और अब १७ नवम्बर, २०१७ को मुख्यसचिव को १८वीं बार यह आदेश जारी करना पड़ा कि अधिकारीगण, विधायक के आने पर खड़े होकर नमस्ते करेंगे… जलपान/चाय-नाश्ता भी भेंट करेंगे आदि-२। यह आदेश इसलिए जारी करना पड़ा क्यों कि या तो अधिकारीगण विधायकों का सम्मान नहीं कर रहे या फिर कई विधायकों का आचरण ‘सम्मान योग्य’ नहीं रहा ? दोनों में से एक कारण होगा ही। आज ४३% विधायक उत्तर प्रदेश में आपराधिक पृष्ठभूमि के हैं।”

”वर्तमान सरकार ने VIP कल्चर को समाप्त करने के लिए क़दम उठाए हैं … लाल/नीली बत्ती हटवाईं हैं, लोगों ने इसका स्वागत किया है। यह सही है कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि का सम्मान होना चाहिए लेकिन जनप्रतिनिधीयों को भी अपने आचरण से सम्मान अर्जित करना चाहिए …. ज़ोर ज़बरदस्ती से सम्मान नहीं पाया जा सकता, ख़ाली अधिकारी ‘नमस्ते’ की औपचारिकता ही पूरा करेंगे।”

”मैं जब बदायूँ जनपद में DM था तो मैंने अपराधी विधायक डीपी यादव को NSA में गिरफ़्तार किया था और डीपी यादव ने विधानसभा में मेरी शिकायत की थी कि मैंने उन्हें खड़े होकर नमस्ते नहीं की। इस पर मैंने सरकार को जवाब दिया था कि एक अपराधी/हत्यारे/बलात्कारी को ‘नमन’ करना मुझे स्वीकार नहीं। ‘दुष्ट’ का सम्मान करना ‘दुष्टाता’ को बढ़ावा देता है।”

पूर्व IAS लिखते हैं,” अभी हाल में NCR क्षेत्र में सर्वोच्च न्यायालय ने दीपावली पर ‘पटाखे’ बेचने पर BAN लगाया था, लेकिन हुआ क्या … और अधिक vengeance के साथ न केवल चोरी छुपे पटाखे बिके बल्कि पूर्व वर्षों से और अधिक पटाखे छोड़े भी गए। कभी-२ ज़ोर ज़बरदस्ती का प्रभाव उलटा भी पड़ता है। मेरे विचार में उक्त शासनादेश की क़तई आवश्यकता नहीं है ….. सबका सम्मान होना ही चाहिए चाहे कोई ग़रीब आमजन हो या फिर कोई विधायक।”

”लोकतंत्र में वोट करने वाला सामान्य जन सबसे बड़ा VIP है …. दोनों अधिकारी व जनप्रतिनिधियों को ‘सामान्य-जन’ को खड़े होकर प्रणाम करना चाहिए। उक्त प्रकार का शासनादेश VIP कल्चर को बढ़ावा देता है। जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों दोनों का आचरण व प्रतिभा ऐसी हो कि उनके लिए सम्मान दिल से आए। दुर्भाग्य है कि आज लोकतंत्र में आमजन का भरपूर अपमान हो रहा है और जंप्रतिनिधियों/लोगों में VIP बनने की होड़ लगी है। यह शासनादेश न केवल ग़ैरज़रूरी है अपितु अधिकारियों पर ग़लत काम का दबाव बनाने का काम करेगा …… VIP कल्चर को बढ़ावा देगा और भ्रष्टाचार भी बढ़ेगा। क्या कहते हैं, आप ???

”दरअसल हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्रियों, विधायकों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे। उन लोगों ने शिकायत की थी कि ब्यूरोक्रेट्स की स्थीति बहुत खराब है। उनका व्यवहार नेताओं के साथ अच्छा नहीं है। उन लोगों ने ऐसे ब्यूरोक्रेट्स के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की थी।”

(फोटो: साभार पूर्व IAS सूर्य प्रताप सिंह के फेसबुक प्रोफाइल से)


GFR DeskOctober 18, 2017
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गोरखपुर (हरिकेश सिंह): शहर व घरों से गायब हो चुकी गौरेया की शहर में फिर से वापसी हुई हैं। यह पर्यावरण के लिए शुभ संकेत हैं। राजघाट थाना क्षेत्र का मोहल्ला रहमतनगर इस वक्त गौरेया की चहचहाहट से गूंज रहा हैं। गौरेया की तादाद एक दो नहीं तकरीबन एक से तीन हजार के करीब हैं। गौरेया की देखभाल पूरे मोहल्लेवासी कर रहे है। बच्चों से लेकर बड़ों तक में यह गौरेया कौतुहल का विषय बनी हुई हैं।

गोरखपुर के रहमतनगर स्थित बहादुरिया मस्जिद के ठीक सामने मोहल्ले वालों ने तीन वर्ष पूर्व पाकड़ का पौधा लगाया था। जो अब पेड़ की शक्ल अख्तियार कर चुका हैं। करीब दो माह पूर्व चंद गौरेया चिड़ियों ने इस दरख्त पर अपना बसेरा बनाया। उसके बाद तो सिलसिला चल पड़ा गौरेया के आने का। इस वक्त यह तादाद बढ़कर एक से तीन हजार के करीब पहुंच चुकी हैं।

मोहल्ले के रहने वाले तौसीफ अहमद खान, अली गजनफर शाह, अली मुजफ्फर शाह ने बताया कि मोहल्ले में सुबह शाम गौरेया की चहचहाहट से लोग बेहद खुश हैं। गौरेया के लिए मोहल्ले वाले सुबह शाम छतों पर टांगुन दाना व पानी रख दे रहे हैं।इस मोहल्ले में कई सालों बाद यह खुशी आयीं हैं। गौरेया देखें तो बचपन गुजर गया।

पहले घर के आंगन में अक्सर गौरेया फूदकती नजर आती थीं लेकिन शहरीकरण, पेड़ कटान ने इन नन्हें परिंदो का घर छीन लिया था। लेकिन अब फिर से गौरेया आयीं हैं तो इसे जाने नहीं दिया जायेगा। हर तरीके से इन परिंदों का ख्याल रखा जायेगा।मोहल्ले वालों के मुताबिक कुछ दिनों पहले यह तादाद पांच हजार के करीब पहुंच गयी थीं, लेकिन रात के वक्त छोटे बाज ने काफी गौैरेया को मार दिया था। जिस वजह से गौरेया पेड़ छोड़कर चली गयी थीं।

पिछले हफ्ते से फिर गौरेया वापस आ गयीं हैं। मोहल्ले वालों ने छोटे बाज से गौरेया को बचाने के लिए एअरगन रखनी भी शुरु कर दी है। कुल मिलाकर पूरा मोहल्ला गौरेया की चहचहाहट में डूबा हुआ है।


GFR DeskOctober 18, 2017
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गोरखपुर (प्रकाशिनी मणि त्रिपाठी): आज छोटी दिवाली है। दीपावली के एक दिन पहले हम सभी छोटी दिवाली मनाते हैं। लेकिन कभी सोचा है हम क्यों मनाते हैं छोटी दीपावली का पर्व? कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी, यम चतुर्दशी और रूप चतुर्दशी या रूप चौदस कहते हैं। यह पर्व नरक चौदस और नरक पूजा के नाम से भी प्रसिद्ध है। आमतौर पर लोग इस पर्व को छोटी दीवाली भी कहते हैं।

नरक चतुर्दशी को छोटी दीवाली भी कहा जाता है। दरअसल, यह पर्व दीवाली से एक दिन पहले मनाया जाता है और इस दिन भी घर में दीपक जलाने का व‍िधान है।

आज के दिन मृत्यु‎ के देवता यम की पूजा किये जाने का विधान है। एक मान्यता‎ के अनुसार इसी दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था इसलिए‎ इसे नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सूर्य‎ के उगने से पहले नहा लेना चाहिए‎ उसके बाद भगवान सूर्य‎ को जल देने का विधान‎ है। इस दिन भगवन यमराज एवं कृष्ण की पूजा करनी चाहिए।

नरक चतुर्दशी के द‍िन सूर्योदय से पूर्व त‍िल का तेल लगाकर स्‍नान करने से यमराज प्रसन्‍न होते हैं और व्‍यक्ति को नरक जाने से मुक्ति म‍िलती है. सारे पाप भी नष्‍ट हो जाते हैं। माना जाता है कि महाबली हनुमान का जन्म इसी दिन हुआ था इसीलिए बजरंगबली की भी विशेष पूजा की जाती है।

यम दीपदान का पूजन

मुहूर्त शाम 6 से शाम 7 बजे तक रहेगा। यम दीपदान के लिए चार बत्ती वाला मिट्टी का दीपक घर के मुख्य द्वार पर रखना चाहिए।

नरक चतुर्दशी के दिन पूजा करने की व‍िध‍ि

– नरक से बचने के लिए इस दिन सूर्योदय से पहले शरीर में तेल की मालिश करके स्‍नान किया जाता है।
– स्‍नान के दौरान अपामार्ग की टहनियों को सात बार सिर पर घुमाना चाहिए।
– टहनी को सिर पर रखकर सिर पर थोड़ी सी साफ मिट्टी रखें लें।
– अब सिर पर पानी डालकर स्‍नान करें।
– इसके बाद पानी में तिल डालकर यमराज को तर्पण दिया जाता है।
– तर्पण के बाद मंदिर, घर के अंदरूनी हिस्‍सों और बगीचे में दीप जलाने चाहिए।

 


GFR DeskOctober 17, 2017
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गोरखपुर (हरिकेश सिंह): भोजपुरी गीतों के माध्यम से देश के साथ विदेशो में भी अपनी जादू का जलवा बिखेरने वाले राकेश श्रीवास्तव आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। राकेश आज A ग्रेड के आर्टिस्ट तो हैं ही ये कई अवार्ड भी अब तक अपने नाम कर चुके हैं।

मूलतः बिहार के सिवान जिले के गम्हरिया गांव के निवासी राकेश का बचपन तो गांव में गुजारा ,लेकिन उसके बाद वे गोरखपुर आ गए और यही डीएवी डिग्री कालेज से स्नातक किये। चूंकि इसके पूर्व भी घर में भोजपुरी गीतों का माहौल था ,उनकी माता जी मैनावती देवी भोजपुरी गीतों के लिए काफी मशहूर थी ।उनका प्रोग्राम आकाशवाणी और दूरदर्शन पर प्रसारित होता था।

इसका लाभ राकेश को मिला और सबसे पहले 1982 में बिहार में अपने गांव के दुर्गा पूजा में अपनी पहली सार्वजानिक प्रस्तुति की और काफी वाहवाही मिली। जिससे उत्साहित होकर उन्होंने जो भोजपुरी गीतों का सफर शुरू किया,तो वो आज तक निरंतर चल रहा है।

अपनी माँ को आदर्श मानने वाले राकेश यूपी के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से गुरु गोरक्षनाथ महाराज पर कई गीत प्रस्तुत किये और कई सीडी कैसेट भी जारी किये। जिसमे गोरख वाणी काफी लोक प्रिय रहा ,इसका गीत आज भी गोरखनाथ मंदिर में गूँजता है ।योगी के सहयोग से ही इन्होंने गुरु गोरक्ष नाथ पर अलख निरंजन फिल्म भी बनाया, जो काफी प्रसिद्ध हुआ।

राकेश श्रीवास्तव की उपलब्धियां

बात करें तो पूर्वांचल महोत्सव 1992 में बेस्ट सिंगर अवार्ड,1994 में बेस्ट म्युजिक डाइरेक्टर अवार्ड,1996 में नॅशनल यूथ फेस्टिवल अबार्ड, 2002 में प्रतिभा सम्मान,2005 में भोजपुरी नवरत्न और भोजपुरी बिभूति सम्मान, 2008 में भोजपुरी गौरव सम्मान,2004 और 2005 में बैंकाक के विष्णु मंदिर पर प्रस्तुति ,जून 2011 में सिंगापुर में प्रस्तुति,2014-15 में थाईलैंड और 2017 में भोजपुरी बिंग मस्कट ओमान में अपनी गीतों की प्रस्तुति कर चुके है।

इसके अलावा राकेश आकाशवाणी, दूरदर्शन, सूचना जन संपर्क विभाग द्वारा प्रशासनिक कार्यक्रमो में अपनी गीतों का लोहा मनवा चुके है। आज राकेश श्रीवास्तव भोजपरी गीतों के लिए अलग पहचान बन गए है ।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सानिध्य में रह कर राकेश लगातार अपने गीतों की सफर को आगे बढ़ा रहे है । इस समय राकेश श्रीवास्तव पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपर में कार्यालय अधीक्षक पद पर कार्यरत है।


GFR DeskOctober 17, 2017
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गोरखपुर (राकेश मिश्रा/नितीश कुमार): अपना शहर गोरखपुर बदल रहा है और इस बदलाव की बागडोर किसी और ने नहीं बल्कि इस शहर के युवाओं ने ही थाम रखी है। ये युवा ऐसे-ऐसे संकल्पना लेकर सामने आ रहे हैं जिसकी कल्पना कुछ दिनों पहले तक इस शहर में करना असम्भव सा था। ऐसी ही एक कल्पना को साकार किया है इस शहर के अरुण गुप्ता ने। कल्पना भी कोई छोटी नहीं बल्कि इन्होने खोल डाला पूर्वी उत्तर प्रदेश का पहला co-working space–StartUp Cafe।
शहर के विजय चौक पर 1000 स्क्वायर फ़ीट में बना यह StartUp Cafe उन लोगों के लिए एक मुंहमांगी मुराद है जो अपना काम तो शुरू करना चाहते हैं लेकिन अधिक पूंजी के अभाव में कोई जगह नहीं ले पाते हैं। StartUp Cafe एक ही छत के नीचे नए प्रोफेशनल्स और स्टार्ट उप के लिए वो सब कुछ मुहैया कराता है जो उन्हें ज्यादा कीमत देने पर भी नहीं मिलता।
इसमें कोई दो राय नहीं है कि गोरखपुर जैसे शहर के लिए यह योजना बिलकुल नयी है। अभी तक co cafe का चलन बड़े महानगरों तक ही सिमित है। गोरखपुर में इस अकल्पनीय काम को करने वाले 30 वर्षीय अरुण गुप्ता का मानना है कि इस शहर में कई लोग ऐसी हैं जो पूंजी की कमी के कारण अपना जगह नहीं ले पाते हैं। दिन प्रतिदिन दुकानों की बढ़ती कीमत के कारण ऐसे लोग जो कम पूंजी से अपना काम शुरू करना चाहते हैं उन्हें शहर में जगह का कोई विकल्प नहीं मिल पाता है। अरुण ने कहा कि StartUp Cafe गोरखपुर में इसी कमी को पूरा कर लोगों को कम पैसे में काम करने के लिए जगह प्रदान करने के साथ-साथ अच्छी सुविधाएं भी प्रदान करेगा।
आइए बताते है कि आखिर ये StartUp Cafe है क्या-
–ये एक ऐसी जगह है जो उन लोगो के लिए बनाई गई है जो कुछ काम तो करना चाहते है पर अपना आफिस न होने की वजह से कर नही पाते।
–खास कर डिज़ाइनर, फ्रीलांसर, जो लोग अपना खुद का स्टार्टअप शुरू करना चाहते है और बड़े या छोटे बिसनेस के लिए यह जगह मुंहमांगी मुराद साबित होगी।
— यह एक अच्छा और साफ सुथरा अच्छे क्वालिटी का आफिस एनवायरनमेंट उपलब्ध कराता है।
Gorakhpur Final Report से बात करते हुए STARTUP CAFE  के फाउंडर और डायरेक्टर अरुण गुप्ता ने बताया कि यह cafe खोलने का आईडिया उन्हें दिल्ली में जॉब करते वक़्त आया। उन्होंने बताया कि दिल्ली में लोगों के पास काम तो है पर उनके पास काम को करने को जगह नहीं। ऐसे में वहाँ ऐसे कुछ जगहों पर लोगो को अपने काम करने के लिए आफिस एरिया कुछ पैसों पर उपलब्ध कराए जाते है। अरुण ने बताया कि गोरखपुर मेंजहाँ बहुत से लोग अपना काम तो शुरू करना चाहते है परंतु अपना आफिस न होने की वजह से वो अपना काम स्टार्ट नही कर पाते हैं।
आप को बता दें कि STARTUP CAFE की सीटिंग कैपेसिटी लगभग 50 लोगों की है। यहाँ पर आपको अपना ऑफिस मात्र 4999 रुपये महीना देने पर मिल सकता है। यहाँ पर आपको बिजली, हाई स्पीड इंटरनेट, प्रिंटर, वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग फैसिलिटी के साथ मीटिंग रूम, पूर्णतया ऐरकण्डीशनएड ऑफिस, कफ और चाय मशीन के साथ कैफेटेरिया तो मिलता ही है। साथ में कुछ अधिक पैसा देने पर आपको अन्य सुविधाएं जैसे कंपनी रजिस्ट्रेशन, GST रजिस्ट्रेशन जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं।
यही नहीं अगर आपको एक दिन के लिए कॉन्फ्रेंस रूम चाहिए तो वो भी उपलब्ध है। इसका किराया मात्र 499 रुपये है। एक दिन के लिए आफिस चाहिए तो वो भी उपलब्ध है मात्र 299 रुपये में । स्टार्टअप कैफ़े पूरी तरीके से एयरकंडिशन है। यहाँ WI FI भी आपको फ्री मिलता है और सबसे अच्छी बात है कि गोरखपुर शहर के प्राइम लोकेशन पर आपको ये फैसिलिटी मिल जा रही है वो भी कम दामो पर।
                     (STARTUP CAFE  के फाउंडर और डायरेक्टर अरुण गुप्ता)
एक अनुमान के अनुसार अगले पांच वर्षों में समूचे देश में co कैफ़े के कांसेप्ट पर तक़रीबन 400 मिलियन डॉलर का निवेश होना है। लेकिन गोरखपुर जैसे टियर II शहरों में जहाँ अभी भी लोग परंपरागत रूप को ज्यादा तरजीह देते हैं वहां ऐसे co कैफ़े कैसे सफल होंगे यह पूछने पर एनीमेशन के फील्ड में पोस्ट ग्रेजुएट अरुण ने बताया कि चुकीं वो खुद डिजिटल मार्केटिंग बैकग्राउंड से हैं इसलिए उन्होंने शुरआती दौर में इसका प्रचार प्रसार करने के लिए सोशल मीडिया से बेहतर कोई और साधन उपयुक्त नहीं लगा। उन्होंने बताया की व्हाट्स एप्प ग्रुप के साथ फेसबुक के माध्यम से उन्होंने STARTUP CAFE को गोरखपुर में प्रसिद्द बनाया। उन्होंने यह भी बताया कि आनेवाले दिनों में स्टार्ट उप कंपनियों के लिए कांफ्रेंस और सेमिनार आदि आयोजित कर इस अनूठे प्रयोग को और प्रसिद्द बनाने का प्रयास करेंगे।
गौरतलब है कि अरुण ने अपनी 12वी तक की शिक्षा गोरखपुर से ग्रहण की है। उसके बाद अरुण ने आगे की पढाई एनीमेशन के क्षेत्र में की। एनीमेशन के फील्ड में पोस्ट ग्रेजुएट अरुण ने बहुत पहले 2010 में ही अपनी खुद की एनीमेशन कंपनी– AniClick Animation का भी गठन कर डाला। एक महीने पुराने इस STARTUP CAFE के वर्तमान में 7 क्लाइंट हैं। अरुण ने बताया कि आनेवाले वक़्त में वो इस STARTUP CAFE की सीटिंग क्षमता को बढ़ाने पर भी विचार कर रहे हैं। अरुण ने यह कैफ़े पूरी तरह से अपने निजी पैसे को निवेश कर खोला है। वैसे अरुण बिज़नेस के क्षेत्र में नए नहीं हैं। इससे पहले यह अमॉज़न, फ्लिपकार्ट और स्नैपडील जैसी इ कॉमर्स साइट के वेंडर भी रह चुके हैं।
अरुण के इस अनूठे प्रयोग को देश विदेश की कई मीडिया कंपनियों ने हाथोहाथ लिया। यही नहीं STARTUP CAFE उस समय और प्रसिद्द हो गया जब केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु ने एक न्यूज़ वेबसाइट में छपी STARTUP CAFE की खबर को ट्वीट किया। केंद्र सरकार की बहुप्रसिद्ध मेक इन इंडिया योजना ने भी STARTUP CAFE को काफी तवज्जो दी है।

GFR DeskOctober 17, 2017
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नई दिल्‍ली: फेम इंडिया-एशिया पोस्‍ट ने एक सर्वे के माध्यम से 2017 के 25 श्रेष्‍ठ लोक सभा के सांसदों का चयन किया है। सर्वे में संतकबीर नगर के भाजपा सांसद शरद त्रिपाठी सहित उत्तर प्रदेश के चार सांसदों ने अपनी जगह बनाई है।

शरद त्रिपाठी के अलावा बांदा के सांसद भैरो प्रसाद मिश्रा, हमीरपुर के सांसद पुष्पेन्द्र सिंह चंदेल और भदोही के सांसद वीरेंदर सिंह मस्त ने सर्वे में श्रेष्‍ठ सांसदों में अपनी जगह बनायीं है। संत कबीर नगर के सांसद शरद त्रिपाठी ने सर्वे की उम्मीद केटेगरी में पहला स्थान पाया है।

गौरतलब है कि सर्वे में श्रेष्‍ठ सांसदों के चयन को सर्वे में कई पारामीटर थे। फेम इंडिया और एशिया पोस्ट ने श्रेष्ठ सांसदों का चयन करने के लिए 25 केटेगरी बनाई थी, जिससे पता चल सके कि उनमें जनता के द्वारा दिए गए दायित्व के प्रति कितनी निष्ठा है। इसके बाद एशिया पोस्ट के एनालिस्ट ने 8 प्रमुख बिन्दुओं पर कार्य किया, जिनमें सदन में उपस्थिति और बहस में भागीदारी, जनता के हित में प्रश्न उठाने, लोकतंत्र की मजबूती के लिए निजी विधेयक लाने, क्षेत्र की जनता के लिए सुलभता व मददगार, लोकप्रियता और छवि को प्रमुख माना गया। इस सर्वे में भारत सरकार के किसी भी मंत्री को शामिल नहीं किया गया था।

ये हैं श्रेष्ठ 25 सांसद

प्रभावशाली सांसद- गुजरात के भाजपा सांसद डॉ. किरीट भाई सोलंकी
बेजोड़ सांसद- बिहार के मधेपुरा के सांसद राजेश रंजन उर्फ़ पप्पू यादव (बिहार से पप्पू यादव अकेले सांसद हैं जो किसी भी केटेगरी में टॉप हुए हैं)
सक्रिय सांसद- झारखंड के गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे
नारी शक्ति- महाराष्ट्र की एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले
सरोकार केटेगरी- दिल्ली के भाजपा सांसद उदित राज
लगन केटेगरी-उत्तर प्रदेश से बांदा के भाजपा सांसद भैरो प्रसाद मिश्रा
इरादे केटेगरी- मध्य प्रदेश के राजगढ़ से भाजपा सांसद रोडमल नागर
हौसला केटेगरी- हरियाणा के युवा सांसद दीपेन्द्र सिंह हुड्डा
चर्चित सांसदों- हिमाचल प्रदेश के भाजपा सांसद अनुराग सिंह ठाकुर
विरासत केटेगरी- दुष्यंत चौटाला
मजबूत सांसद- केरल के सांसद एनके प्रेमचंद्रन
लोकप्रिय केटेगरी- राजस्थान के कोटा के सांसद ओम बिड़ला
कर्मयोद्धा केटेगरी- राजस्थान के सांसद चंद्रप्रकाश जोशी
जागरूक केटेगरी- उत्तर प्रदेश के सांसद पुष्पेन्द्र सिंह चंदेल
जज्बा केटेगरी- शिवसेना के सांसद अरविन्द सावंत
प्रयत्नशील केटेगरी- ओड़िसा के सांसद रविन्द्र कुमार जेना
युवा सांसदों की केटेगरी में टॉप पर महाराष्ट्र की सांसद पूनम महाजन रही
शख्सियत केटेगरी- उत्तर प्रदेश के वीरेंदर सिंह मस्त
उत्तराधिकार केटेगरी- नार्थ-ईस्ट के सांसद गौरव गोगोई
उम्मीद केटेगरी-उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर के सांसद शरद त्रिपाठी
असरदार सांसद-भाजपा के सांसद सुधीर गुप्ता
शानदार सांसद- ओड़िसा के कलिकेश सिंह देव
जननायक केटेगरी- तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगात राय
संघर्षशील केटेगरी- शिरोमणि अकाली दल के प्रेम सिंह चंदूमाजरा
कर्मठ सांसद- हरियाणा के रमेश चंद्र कौशिक


GFR DeskOctober 16, 2017
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गोरखपुर (हरिकेश सिंह): शहर का एक होनहार और उभरता गायक “सारेगामापा रंग पुरवइया” के टॉप 9 में शामिल हो गया है। बीते सात अक्टूबर को गंगा चैनल पर आने वाले भोजपुरिया दर्शकों में लोकप्रिय इस कार्यक्रम में वह सुर संग्राम के विजेता रहे मोहन राठोर के साथ अपने सुरों का जादू बिखेरेंगे। इस दौर में पहुंचने वाले वह सबसे कम उम्र के प्रतिभागी भी हैं।

महानगर के गोरखनाथ क्षेत्र के रसूलपुर निवासी श्रीकृष्णा पांडे के 16 वर्षीय पुत्र अभिषेक पांडे “बिट्टू” 2 सितंबर से छोटे पर्दे पर प्रसारित हो रहे भोजपुरी गीतों के रंगारंग कार्यक्रम सारेगामापा रंग पुरवइया के फाइनल रूप से चयनित 18 प्रतिभागियों में शामिल हुए थे।

एम जी इंटर कॉलेज में बारहवीं के छात्र बिट्टू ने घर में संगीत का माहौल देखा तो इसी में कैरियर बनाने की ठान ली ।छोटी सी उम्र में इन्होंने इस की शिक्षा लेनी शुरू कर दी। गोरखनाथ क्षेत्र के लक्ष्मीपुर स्थित हनुमत संगीत आश्रम सेवा में पिछले 3 साल से अपने गुरु धर्मेंद्र श्रीवास्तव से क्लासिकल और धर्मेंद्र अर्पण से मंच पर गायन की ट्रेनिंग ले रहे हैं ।

बिट्टू के बाबा श्रीराम पांडे व इनके पिता भी गाने के शौकीन हैं। छोटा सा बिजनेस करने वाले इनके पिता भोजपुरी भजन एवं लोकगीत भी लिखते हैं । पूरे देश से चुने गए 18 प्रतिभागियों में गोरखपुर से अकेले वह थे। अभिषेक ने बताया कि जल्द ही टॉप 8 की तैयारी के लिए जुटेंगे। गायन और संगीत के क्षेत्र में गोरखपुर का नाम पूरे देश में हो, इसके लिए वह इस रियलिटी शो के लिए खूब रियाज कर रहे हैं।

बिग गंगा पर हर शनिवार रविवार को वश होने वाला रियलिटी शो सारेगामापा रंग पुरवइया के हर एपिसोड में बिट्टू ने जजों का दिल जीता। अपने अलग अंदाज में प्रस्तुति की वजह से बिट्टू ने जजों पर अपना अलग प्रभाव छोड़ा ।भोजपुरी में बिट्टू पूर्वांचल में अपना नाम रोशन तो किया ही, लेकिन आज उसे लोग राष्ट्रीय स्तर पर भी जानने लगे हैं।

इसके पूर्व पूर्वांचल आइडियल ,गोरखपुर महोत्सव ,डीडी वन पर माटी के बोल जैसे अनेकों प्रतियोगिताओं को जीतकर वह अपने प्रतिभा का लोहा मनवा चुका है। सारेगामापा रंग पुरवइया में जज के रूप में राजेश पांडे एवं मालिनी अवस्थी ने बिट्टू को शुभकामनाएं देते हुए आशीर्वाद दिया।


GFR DeskOctober 16, 2017
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गोरखपुर (प्रकाशिनी मणि त्रिपाठी): पूरा देश मंगलवार को धनतेरस मनाने की तयारी में है। धनतेरस के अवसर पर हम सभी लोग जम कर खरीदारी करते हैं। हम सब इस त्यौहार को मनाते तो बड़ी धुमधाम से हैं, लेकिन इस त्योहार को मनाने के पीछे की वजह को बहुत कम ही लोग जानते हैं।

आइए जानते हैं कि क्यों मनाते हैं हम धनतेरस! दीपवाली के दो दिन पहले धनतेरस मनाया जाता है। इस दिन लोग नए बर्तन और चाँदी का सामान भी खरीदते हैं। महानगर के एक विद्वान पंडित मिथलेश मिश्रा का कहना है कि दीपावाली से दो दिन पूर्व कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को आयुर्वेद के भगवान धन्वन्तरि प्रकट हुये थे। उनके हाथ मे शंख और कलश था, इसलिए लोग इस दिन चांदी का बर्तन खरीदते हैं।

श्री मिश्रा बताते हैं कि भगवान धनवंतरि आयुर्वेद के देवता थे इसीलिए लोग इस दिन अपने घर को साफ सुथरा करते है क्यों कि यह कहा जाता है कि स्वस्थ तन, निरोगी काया मानव जीवन का सबसे ￶बड़ा सुख है।

कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को धनतेरस मनाया जाता है। माना जाता है इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान ,अमृत का कलश लेकर धन्वन्तरी प्रकट हुए थे. धन्वन्तरी देवताओं के वैद्य हैं। यही वजह है कि धनतेरस के दिन अपनी सेहत की रक्षा और आरोग्य के लिए धन्वन्तरी देव की उपासना की जाती है।

इस दिन को कुबेर का दिन भी माना जाता है और धन सम्पन्नता के लिए कुबेर की पूजा की जाती है. इस दिन लोग मूल्यवान धातुओं का और नए बर्तनों व आभूषणों की खरीदारी करते हैं। उन्हीं बर्तनों तथा मूर्तियों आदि से दीपावली की मुख्य पूजा की जाती है।

उन्होंने आगे बताया कि धनतेरस के दिन दीया जलाने के पीछे भी एक कथा है। बहुत पहले एक राजा की एक संतान हुई। जिसे देखकर पंडितो ने बताया कि बालक शादी के कुछ दिन बाद ही मर जायेगा, और ऐसा ही हुआ। राजकुमार की पत्नी शोक मे थी, तब राजा ने यमराज से कोइ ऐसा उपाय बताने को कहा जिससे मानव अकाल मौत से बच सके। तब यमराज ने बताया कि जो इस दिन दक्षिण दिशा में दीप जलायेगा वो अकाल ￶मृत्यु से बच जायेगा, इसीलिये लोग इस दिन दीया जलाते हैं।

पूजन और खरीदारी का शुभ समय

सुबह 09:10 से लेकर 10:36 तक खरीदारी करने का सबसे उपयोगी समय होगा। उसके बाद शाम 04:21 से शाम 07:14 तक भी खरीदारी किया जा सकता है।
–इसी समय में पूजा उपासना भी करें
–सायं 03.00 से 04.20 के बीच पूजन और खरीदारी न करें
–धनतेरस के दिन छोटी ही सही चांदी की वस्तु जरूर खरीदें


GFR DeskOctober 15, 2017
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गोरखपुर (संदीप त्रिपाठी): ‘100 मीलों का सफर पहला कदम जोरदार ढंग से उठाने पर ही पूरा होता है।’ इस बात को अपने शहर गोरखपुर के ही एक शख्स ने चरितार्थ कर के दिखा भी दिया है। देश के दो बड़े शहर बनारस और हरिद्वार में गंगा तट पर होने वाली आरती के तर्ज पर गोरखपुर में राप्ती के किनारे आरती की शुरुआत करने के साथ-साथ उसको घर-घर में चर्चित बनाने वाला कोई और नहीं बल्कि भाजपा के समर्पित नेता सोमेश्वर पांडेय हैं।

आज से लगभग 2 वर्ष पूर्व 10 नवंबर 2015 को छोटी दीवाली के अवसर पर राप्ती के तट पर आरती का कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी। जो बीते 2 सालों से हर माह पूर्णिमा के दिन संपन्न होती है। अब अगर सब कुछ योजनाबद्ध रहा तो राप्ती तट पर भक्तजन रोज आरती कर सकेंगे। इस आरती कार्यक्रम की शुरुआत में तत्कालीन गोरखपुर सांसद और वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संत कबीर नगर के सांसद शरद त्रिपाठी ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।

युवा भाजपा नेता सोमेश्वर पांडे से जब इस संवाददाता ने बात की तो उन्होंने बताया कि एक बार वो हरिद्वार के दौरे पर गए थे। वहां गंगा तट पर प्रतिदिन आरती होती है। यही देख उनके मन में यह जिज्ञासा जागृत हुई कि क्यों ना गांव की गंगा में ऐसा आयोजन किया जाए ताकि वहां भी व्यवस्था परिवर्तन हो और लोग हरिद्वार और वाराणसी की तरह आरती का आनंद लें।

उन्होंने बताया कि 150 लोगों की टीम गठित है जो हर महीने की आरती में उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करते हैं। इस में लगने वाला खर्च यह लोग खुद ही वहन करते हैं। उनका कहना है कि अभी तक आरती के सयोंजन के लिए इन्होने बाहरी योगदान नही लिया है। हालांकि पेशकश बहुत लोगों ने की है। श्री पाण्डेय ने बताया कि इस कार्यक्रम के अध्यक्ष व्यापार मंडल के अध्यक्ष सीताराम जायसवाल हैं और उनके प्रमुख योगदान के कारण ही यह संभव हो पाया है।

भाजपा नेता ने बताया कि समूची टीम इस बात का प्रयास कर रही है कि इस बार की छोटी दिवाली से प्रतिदिन शायं काल की आरती का शुभारंभ हो जाए। उन्होंने बताया कि राप्ती संस्कृत संरक्षण न्यास नामक संस्था का गठन किया गया है जिसके प्रयास से तट पर स्नान घाट की भी व्यवस्था होगी जिससे आने जाने वाले लोगों के लिए सुदृढ़ व्यवस्था की शुरुआत की जाएगी।

श्री पांडेय ने बताया कि सरकार से भी स्नान घाट बनाने की स्वीकृति मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि आगे हमारा प्रयास रहेगा कि राप्ती तट पर गरीबों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था हमारे संस्था के द्वारा संपन्न कराया जाए क्योंकि जो गरीब अंतिम संस्कार की व्यवस्था ना होने के कारण इधर उधर लोगों से सहयोग लेते हैं वह ना लेना पड़े।

ऐसा नहीं है कि सोमेश्वर पांडेय का योगदान केवल राप्ती तट और वहां होने वाली आरती तक ही सिमित है। गोरखपुर ग्रामीण विधान सभा क्षेत्र में रहकर पार्टी को मजबूत करने वाले श्री पांडेय ने भाजपा को इस क्षेत्र में खड़ा करने के लिए भरपूर योगदान दिया है। बीते 22 वर्षों से वह पार्टी के एक समर्पित कार्यकर्त्ता रहे हैं।

श्री पांडेय 1992 में सर्वप्रथम राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नजदीक आये और वहां से प्राथमिक शिक्षा वर्ग का प्रशिक्षण लिया। उसके बाद संघ के द्वतीय वर्ष और तृतीय वर्ष का प्रशिक्षण प्राप्त किया। बाद में भाजपा महानगर के रुस्तमपुर वार्ड के मंत्री बने, उपाध्यक्ष, भाजपा जिला के मंडल खोराबार में मंत्री, उपाध्यक्ष कौड़ीराम विधान सभा जैसे पद सँभालने के बाद चुनाव में उपेंद्र दत्त शुक्ल का विधान सभा मीडिया प्रभारी बने। भाजपा महानगर में आजाद नगर मंडल के महामंत्री,अध्यक्ष फिर संयोजक अंत्योदय प्रकोष्ठ बने।

बताते चलें कि श्री पांडेय के परिवार वालो का हमेशा ही प्रयास रहा कि राजनीति से इनको निकाला जाए। इसके लिए परिवार वालों ने मोटर पार्ट की दुकान खोलवाई लेकिन राजनीतिक रुचि के कारण दुकान भाई को देनी पड़ी। परिवार वालों ने एक प्रयास फिर कम्यूटर सेंटर, और कोचिंग सेंटर खोलवा कर किया। लेकिन राजनीति की कुदृष्ट ने आंदोलन और जेल जाने की वजह से दोनों प्रतिष्ठान बंद हो गये।

कुछ लोगों की साजिश के तहत 2014 के चुनाव में कोई जिम्मेदारी नही दी गयी तो श्री पाण्डेय ने भाजपा के उपेक्षित कार्यकर्ताओं को घर से निकाल कर नरेंद्र मोदी सेना के माध्यम से 32 जिले में पार्टी का काम किया। जिसकी आलोचना भी हुई। लेकिन आलोचना को पार्टी के बड़े नेताओं ने यह कह कर नजरअंदाज कर दिया कि वो सब निजी खर्चे से मोदी को प्रधानमंत्री बना रहे है इसलिए ऐसे कार्य की प्रशंसा होनी चाहिए।


GFR DeskOctober 15, 2017
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गोरखपुर: जो कभी दूसरों पर पूरी तरह से आश्रित था,आज अपने हिम्मत व जज्बे के कारण वह दिव्यांगों और बहानेबाजी करने वालो के किये नजीर बन चुका है। बात कर रहे हैं जनता दर्शन में नौकरी पाए उस दिव्यांग युवक की जो बिना हाथों के एक माह की सेवा के बाद आज डीएम के हाथों मानदेय पाया है।

महानगर के कूड़ाघाट (गिरधरगंज)निवासी व पेशे से टेलर(दर्जी)अनवर आलम के कुनबे में पत्नी, तीन पुत्रियों और दो पुत्रों में छोटा मोहम्मद आतिफ (22वर्ष) दोनो हाथों से दिव्यांग है। जिसके दोनो हाथ 4 दिसम्बर वर्ष 2003 को 9 वर्ष की आयु में बालपन के चलते विद्युत दुर्घटना में बुरी तरह जल गए थे और बाद में लखनऊ में ऑपरेशन कर कलाइयों के ऊपर से काट दिए गए।जिससे वह पूरी तरह से दूसरों पर आश्रित हो गया।

किन्तु मन ही मन उसने ठान लिया कि अब वह अपना सारा काम खुद करेगा और दूसरों के लिए खुद को नजीर के रूप में साबित होगा। कहा गया है जहां चाह,वहाँ राह और धीरे धीरे उसकी राहें खुद ब खुद आसान होती गयीं। इस बीच उसने मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कालेज से टैली में कम्प्यूटर कोर्स भी किया और अपनी शिक्षा भी अनवरत जारी रखी।साथ ही साथ वह सारे काम जो आम इंसान करता है को करने लगा।

इसके बाद वह नौकरी की तलाश में बराबर जनता दर्शन कार्यक्रम में डीएम को अपनी दरख्वास्त देने लगा।जिसकी काबिलियत जांचने परखने के बाद डीएम ने उसे बेसिक शिक्षा विभाग के मिड डे मील प्रोग्राम में बतौर डाटा एंट्री ऑपरेटर मानदेय पर पिछले 4 सितम्बर को नियुक्त किया था। आज उसकी सेवा के एक माह पूरे होने पर जिलाधिकारी राजीव रौतेला ने खुद उसे बुलाकर उत्साहवर्धन करते हुए उसका मानदेय सौंपा है।

बीएसए कार्यालय के मिड डे मील सेक्शन में कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटर मोहम्मद आतिफ दोनों हाथ से विकलांग है और इसके बावजूद भी कम्प्यूटर अच्छे से चला सकता है।इसके साथ ही वह मेडिकल कालेज रोड स्थित झुंगिया बाजार के वीर अब्दुल हमीद डिग्री कालेज के बीए द्वितीय वर्ष का छात्र भी है। जहां वह शिक्षा ग्रहण के दौरान अपने दोनो हाथों से पेन, मोबाइल, कम्प्यूटर तक चलाता है।

आतिफ का कहना है कि शुरुआती दौर में तो वह पूरी तरह से बेबस हो चुका था,किन्तु उसने मन ही मन ठान लिया कि अब मैं खुद दुसरो के किये नजीर बनकर दिखाऊंगा।पहली सेलरी मिलने पर कहता है कि इसे वह अपने माँ बाप को समर्पित करेगा और उन सभी को मिठाई खिलायेगा,जो उसकी सफलता के साथी है।बाकी इस कार्य से मिलने वाले रुपयों से वह अपनी उच्च शिक्षा में खर्च करेगा।

इस सम्बंध में उसके स्थानीय प्रभारी दीपक पटेल डिस्ट्रिक्ट इंचार्ज,मिड डे मील (बी एस ए ऑफिस , गोरखपुर) से बात की गई तो उनका कहना था कि इस युवक के जज्बे की जितनी भी सराहना की जाय,कम है।डीएम साहब ने एक माह पूर्व इसके काबिलियत को परखने की जिम्मेदारी मुझे सौंपी थी,पहले तो मैंने सोचा कि यह युवक डाटा एंट्री जैसा कार्य नही कर पायेगा, किन्तु मैं आश्चर्य चकित रह गया जब इसके हाथ कम्प्यूटर के की बोर्ड पर एक कुशल ऑपरेटर की तरह चलने लगे।हमारी कोशिश रहेगी कि जब कभी विभाग में जगह बने तो इसका समायोजन हो।