फाइनल रिपोर्ट स्पेशल Archives - Page 18 of 28 - Gorakhpur Final Report

GFR DeskAugust 25, 2016
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Kushinagar-policeकुशीनगर: भगवान कृष्ण का जन्म बंदी गृह में होने के कारण जहां पूरे प्रदेश के थानों में कृष्ण जन्माष्टमी बड़े धूम धाम से मनाई जाती है वहीँ कुशीनगर जनपद के थानों के लिये जन्माष्टमी का दिन मनहूस है।

21 साल पूर्व इसी अष्टमी की काली रात को कुबेरस्थान थाने के पचरूखिया घाट पर जंगल पार्टी के डकैतों से मुठभेड़ में दो इंस्पेक्टर सहित पांच पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। तभी से जन्माष्टमी को कुशीनगर की पुलिस मनहूस मानती है और किसी थाने और पुलिस लाईन में जन्माष्टमी नहीं मनाई जाती है।

एक साथ सात पुलिस जवानों के शहीद होने का दर्द आज भी जनपद पुलिस के चेहरे पर चस्पा है…।

देवरिया जनपद से अलग होकर कुशीनगर जनपद के अस्तित्व में आने के बाद सरकारी महकमों में जश्न का माहौल था। 1994 में पुलिस महकमा पहली जन्माष्टमी पडरौना कोतवाली में बड़े धूमधाम से मनाने में लगा था। जहां पुलिस के बड़े अधिकारियों के साथ ही सभी थानों के थानेदार और पुलिस कर्मी मौजूद थे।

Kushinagar-police-1किंतु नियति को कुछ और ही मंजूर था। एक ही घटना ने पूरे जश्न पर पानी तो फेरा ही साथ ही कुशीनगर पुलिस के लिये जन्माष्टी के त्यौहार को हमेशा के लिये खत्म कर दिया।

दरअसल पुलिस को कुबेरस्थान थाने के पचरूखिया घाट के पास उस समय के आतंक पर्याय बन चुके जंगल पार्टी के आधा दर्जन डकैतों के ठहरने और किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए योजना बनाने की सूचना मिली।

इस सूचना पर आलाधिकारियों के निर्देश पर कुबेरस्थान थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेन्द्र यादव और उस समय के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट तरयासुजान थाने के एसओ अनिल पाण्डेय आठ पुलिस के जवानों के साथ पचरूखिया घाट के लिये रवाना हो गये। उस समय नदी को पार करने के लिये कोई पुल नहीं था नाव ही एक मात्र साधन था।

Kushinagar-police-2पुलिस ने एक प्राईवेट नाव की सहायता से बांसी नदी को पार कर डकैतों के छिपने की जगह पर पहुंची तो शायद किसी अंदर के व्यक्ति के खबर देने के कारण डकैत वहां से फरार हो कर नदी के किनारे छिप गये। सघन तलाशी के बाद पुलिस टीम फिर से नाव के सहारे नदी पार कर ही रही थी। नाव जैसे ही नदी की बीच धारा में पहुंची तभी डकैतों ने पुलिस पर अंधाधुध फायर झोंक दिया।

पुलिस ने जवाबी फायरिंग किया लेकिन इस बीच नाविक को गोली लगने से नाव बेकाबू हो गयी और नदीं में पलट गयी। नाव पर सवार सभी 11 लोग नदी में डूबने लगे। डूब रहे लोगों में से तीन पुलिसकर्मी तो तैर कर बाहर आ गये लेकिन दो इंस्पेक्टर, सहित पांच पुलिसकर्मी और नाविक शहीद हो गये।

Kushinagar-police-3इस घटना के बाद कुशीनगर पुलिस के लिये जन्माष्टमी अभिशप्त हो गया। इस दर्दनाक घटना की कसक आज भी पुलिसकर्मियों के जेहन में है जिसके कारण किसी थाने और पुलिस लाईन में जन्माष्टमी नही मनाई जाती है।

वरिष्ठ पत्रकार मिथिलेश्वर पाण्डेय भी उस घटना को याद करके सिहर जाते हैं। उनका कहना है कि चूंकि जिला सृजन होने के बाद पहली जन्माष्टमी थी इस लिये पडरौना कोतवाली में बहुत भव्य आयोजन था और जिले सभी प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद थे लेकिन एकाएक पांच पुलिसकर्मियों की मुठभेड़ में मौत की सूचना से हम सभी का हृदय द्रवित हो गया था। तब से लेकर आज तक जन्माष्टमी की वो खौफनाक घटना अपने आप याद आ जाती है।

पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार भट्ट का कहना है कि जन्माष्टमी की वो काली रात आज भी पुलिसकर्मियों के जेहन में है इसलिये यहां जन्माष्टमी नहीं मनाई जाती है। हमारे पांच साथियों की मौत हमें आज भी विचलित करती है।

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GFR DeskAugust 25, 2016
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Ward-no-15-1गोरखपुर: महानगर के वार्ड नंबर 15 शताब्दी पुरम के पश्चिमी छोर की हालात काफी दयनीय है। वहां के लोगों का कहना है की वार्ड में ना तो स्ट्रीट लाइट की सुविधा है नाही जल निकासी की। उनका कहना है वार्ड में पक्के सड़कों का आभाव विकास के तमाम दावों को खोखला साबित करता है और इस काऱण आये दिन लोग दुर्घटना का शिकार हो रहे है।

Ward-no-15-2वार्ड के निवासियों का कहना था की बरसात के मौसम की वजह से वार्ड में जल जमाव की भारी समस्या से दो चार होना पड़ रहा है। घरों का पानी नाले ना होने की वजह से घरों के सामने ही जमा हो रहा है।

Ward-no-15-3वार्ड के निवासी सुजीत कुमार, अभिजीत श्रीवास्तव, दीपक पासवान, जीतेन्द्र कुमार, डॉ डी सिंह और प्रदीप त्रिपाठी ने फाइनल रिपोर्ट से बातचीत में बताया की एक तरफ जनप्रतिनिधि जहाँ विकास की बात कर रहे है वही दूसरी तरफ यह वार्ड उनके विकास के डैम भरने के सारे दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है।

Ward-no-15-4उनका कहना था वार्ड के पार्षद से लेकर महानगर की मेयर, शहर के विधायक और यहाँ तक की सांसद सभी भाजपा के हैं फिर भी विकास के नाम पर यहाँ कुछ भी देखने को नहीं मिल रहा है।

Ward-no-15-5इन लोगों का कहना है की नगर विधायक के कहने के बावजूद भी नगर अयुक्त ने अभी तक कोई ठोस कदम नही उठाया है। इनका कहना है जब इन लोगों ने इस सम्बन्ध में मेयर से मुलाकात की तो उन्होंने बजट ना होने की असमर्थता जताई।

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स्थानीय लोगों का कहना है की अगर ऐसे ही हालात रहे तो आने वाले चुनाव में जन प्रतिनिधियों को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। नगर निगम और महापौर के प्रति रोष प्रकट करते हुए लोगों ने कहा की उनकी समस्या सुनने वाला कोई नहीं है। उन्होंने कहा की ना ही नगर विधायक और न ही मेयर ने इनकी परेशानियों की तरफ अभी तक कोई ध्यान दिया है। इन लोगों का कहना था की अगर यही हालात रहे तो आने वाले चुनावों का यह लोग बहिष्कार करेंगे।

Ward-no-15-7इस सम्बन्ध में हमारे संवाददाता ने नगर आयुक्त बीएन सिंह से बात करनी चाही तो तो उन्होंने फ़ोन का कोई जबाब नहीं दिया। संभवतः आयुक्त महोदय जन्माष्टमी की छुट्टी मना रहें होंगे। उनका कहना था की जगह जगह जलजमाव के नाते इस वार्ड में रहने वाले निवासियों खास कर बच्चों को बीमारी होने का खतरा बना हुआ है।

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GFR DeskAugust 25, 2016
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Traina-nd-CRS-inspectionगोरखपुर: गोरखपुर और उसके आस पास के लोग जो रोज महानगर से बस्ती , गोंडा, और लखनऊ तक की सफर करते हैं उनके लिए एक खुशखबरी है। जल्द ही छपरा से लखनऊ तक के इलेक्ट्रिक रूट को क्लेअरेंस मिल सकती है। एक बार इलेक्ट्रिक रूट को हरी झंडी मिलने के बाद रोज सफर करने वाले लोगों का यात्रा में लगने वाला समय लगभग आधा हो जायेगा।

गौरतलब है की बस्ती-गोरखपुर इलेक्ट्रिक रूट पर मंगलवार को कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी स्पेशल (सीआरएस) ट्रेन 110 किलोमीटर प्रति घण्टे की रफ्तार से दौड़ी। सीआरएस द्वारा हरी झण्डी देते ही रूट पर इलेक्ट्रिक ट्रेन चलने लगेंगी। सूत्रों के मुताबिक रेल मंत्री सुरेश प्रभु इलेक्ट्रिक ट्रेन को हरी झंडी दिखाने सितम्बर के पहले हफ्ते में गोरखपुर आ सकते हैं।

बस्ती से गोरखपुर के बीच 64 किलोमीटर इलेक्ट्रिक रूट का निरीक्षण मंगलवार को सीआरएस पीके बाजपेई ने किया। सीआरएस के साथ डीआरएम लखनऊ आलोक कुमार, सीएसओ एनईआर एनके अम्बिकेश समेत विभिन्न विभागों के रेल अधिकारी मौजूद थे। बस्ती में बैठक और स्टेशन का मुआयना करने के बाद शाम करीब सवा चार बजे ट्रेन 110 की रफ्तार में गोरखपुर के लिए रवाना हो गई।

डोमिनगढ़ स्टेशन से निरीक्षण की शुरूआत कर सीआरएस ने बस्ती तक रेलवे ट्रैक को बारीकी से देखा। करीब 20 से 25 किलोमीटर की रफ्तार से चली स्पेशल ट्रेन को सीआरएस ने रास्ते में पड़ने वाले कई ओवरब्रिज, रेलवे क्रॉसिंग और मोड़ पर रुकवा दिया।

130 एक्सपर्ट कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ आए सीआरएस ने जगतबेला, सहजनवां, मगहर, मुंडेरवा और खलीलाबाद सहित बीच में पड़ने वाले अन्य छोटे स्टेशनों के प्वाइंट और सेक्शनों की बारीकी से जांच की।

बस्ती तक ट्रायल के बाद उन्होंने वापस गोरखपुर तक ट्रेन को 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाकर तकनीकी पहलुओं का निरीक्षण किया। बस्ती से गोंडा तक वह पहले ही निरीक्षण कर चुके थे। इस रूट पर इलेक्ट्रिक ट्रेन चलाकर सफल ट्रायल भी हो चुका है।

इसके पूर्व बस्ती से गोण्डा के बीच 87 किलोमीटर लम्बे रूट का सीआरएस इंस्पेक्शन हो चुका है। उस रूट पर इलेक्ट्रिक ट्रेन भी दौड़ चुकी है।

मंगलवार को बस्ती-गोरखपुर रूट के निरीक्षण के बाद हरी झण्डी मिलते ही लखनऊ से छपरा के बीच 463 किलोमीटर लम्बे रूट पर इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलने लगेंगी। फिलहाल लखनऊ से बाराबंकी होते हुए गोण्डा तक इलेक्ट्रिक ट्रेन चल रही है।

जानकारी के अनुसार सितंबर के पहले सप्ताह में रेल मंत्री सुरेश प्रभु गोरखपुर से इलेक्ट्रिक ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के साथ ही रेलवे स्टेशन के सेकेंड इंट्री गेट का उद्घाटन और इलेक्ट्रिक लोको शेड का शिलान्यास कर सकते हैं।

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GFR DeskAugust 24, 2016
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mygov.inगोरखपुर: पुरे देश के साथ साथ पूर्वांचल के लोगों को केंद्र की मोदी सरकार के साथ काम करने का मौका मिल सकता है। सरकार अपने पोर्टल www.mygov.in के जरिए आपके लिए सुनहरा मौका लेकर आई है। कोई भी व्यक्ति जो भारत का नागरिक हैं इन जॉब्स के लिए एप्लाई कर सकता है।

www.mygov.in के जरिये लोगों को बतौर एडिटोरियल राइटर, सोशल मीडिया एक्सपर्ट, रिसर्चर, सॉफ्टवेयर डेवेलपर, डाटा साइंटिस्ट, ग्राफिक डिजाइनर, डिजिटल कॉन्टेंट स्क्रिप्ट राइटर, एडवरटाइजिंग प्रफेशनल, सीनियर मैनेजमेंट, एकेडमिक एक्सपर्ट और ऐप डेवेलपर जैसे पदों पर काम करने का मौका मिल सकता है।

चुने गए लोगों को मंत्रालयों, सरकारी विभागों, संस्थानों, संगठनों के साथ मिलकर काम करना होगा।

कोई भी व्यक्ति सम्बंधित पोर्टल पर जा कर अपना रेज्यूमे अपलोड कर सकता है। हा सरकार ने यह साफ कर दिया है कि रेज्यूमे मंगा लेने का मतलब यह न समझ लिया जाए कि नौकरी मिलेगी ही।

सभी रेज्यूमे जांच परख के बाद शॉर्ट लिस्ट किए जाएंगे जिनके आधार पर बाद में इंटरव्यू लिया जाएगा। सैलरी पर किसी भी प्रकार का फैसला सीधे बातचीत के बाद ही लिया जाएगा।

www.mygov.in पर विजिट कर के आप नौकरी पूरा ब्यौरा देख सकतें हैं साथ ही अगर अभी तक आप ने अपना प्रोफाइल www.mygov.in पर नहीं बनाया है तो इस लिंक पर आप क्लिक कर उस कार्य को भी पूरा कर सकतें हैं। याद रखें की रिज्यूमे अपलोड करने से पहले आप को अपना प्रोफाइल जरूर बनाना होगा।

क्लिक करें www.mygov.in

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GFR DeskAugust 23, 2016
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Kushal-Tiwari-with-Satish-Cगोरखपुर: बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने पूर्वांचल के कदावर नेता पंडित हरिशंकर तिवारी के पुत्र कुशल तिवारी को पार्टी के भाई चारा कमेटी के गोरखपुर-बस्ती मंडल का कोऑर्डिनेटर घोषित किया है।

गौरतलब है की हरिशंकर तिवारी के एक और बेटे विनय शंकर तिवारी को बीएसपी ने चिल्लूपार से 2017 में होने वाले विधान सभा चुनाव के लिए प्रत्याशी घोषित किया है और अब कुशल तिवारी को जोनल कोऑर्डिनेटर घोषित करने के फैसले से पूर्वांचल में काफी हद तक ब्राह्मण मतों को अपने पाले में लाने का
एक बड़ा दावँ खेल है।

तिवारी परिवार के ही एक और सदस्य हरिशंकर तिवारी के भांजे पूर्व परिषद् सभापति गणेश शंकर पांडेय को पार्टी पनियरा विधान सभा छेत्र से बहुत पहले ही अपना उम्मीदवार घोषित कर चुकी है।

बात साफ़ है की बसपा का नया कदम पूर्वांचल में ब्राह्मण मतदाताओं को अपने पाले में करने में कोशिस है और ये कितनी कामयाब होगी ये तो वक़्त बताएगा।इस कदम से एक बात तो निश्चित हो गयी है की पार्टी में तिवारी परिवार का कद दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।

पार्टी ने विनय शंकर तिवारी को टिकट निवर्तमान विधायक राजेश त्रिपाठी का टिकट काट कर दिया है। राजेश पिछले दो बार से चिल्लूपार के विधायक हैं। राजेश ने 2007 में हरिशंकर तिवारी को हरा कर एक बड़ा उलटफेर करते हुए चिल्लूपार से चुनाव जीत था। राजेश त्रिपाठी ने टिकट न मिलने की आशंका में बसपा छोड़ दिया था और बाद में उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर लिया।

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GFR DeskAugust 21, 2016
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police-line-quarterगोरखपुर: जिनके कंधो पर सबकी सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है। जो केवल अपनी वर्दी की परवाह कर दिन, रात अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों से दूर कहीं अपने जीवन को जोखिम भरे कामों में व्यस्त रहते है। ऐसे में अगर उनका परिवार ही जोखिमो से दिन-रात दो चार हो रहा हो, तो ये कहाँ सम्भव है कि वो अपनी जिम्मेदारी को ईमानदारी से निभा पाएंगे।

जी हां, बात कर रहे है उन सख्शियत की, जिनके पास हर रोज कोई न कोई हजारो की संख्या में न्याय की फरियाद करने जाते दीखते है। हां वही, जिन्हें हम ‘सत्यमेव जयते ‘ का स्लोगन याद किये पुलिस कहते है।

police-line-quarter-1बात करें, अब इन पुलिसकर्मियों के जीवन की अहम जिम्मेदारी परिवार की। तो विभाग द्वारा इनके रहने के लिए स्थानीय पुलिस लाइन्स में सरकारी आवास मुहैया करवाया गया है। कहने को तो ये सरकारी आवास वह जगह है जहां हर पुलिसकर्मी अपने आश्रित बीबी, बच्चों को सुरक्षित छोड़कर अपनी ड्यूटी पर जाता है।

किंतु इन सरकारी आवासों की स्थिति ऐसी है कि अब हर पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी पर जाने से पहले सौ बार सोंचता है कि क्या वापसी पर दुबारा इन सबसे मुलाकात हो पायेगी। बात करें पुलिस लाइन्स के इन सरकारी आवासों की, तो इन आवासों की हालत जर्जर है। पुलिस लाइन्स में स्थित कालोनी की सड़कें बदतर है।

police-line-quarter-2आवासों के पीछे उगे घास अब अब साफ़-सफाई के अभाव में झाड़ों में तब्दील हो गयी है। नालियाँ गंदगी से भरी है, जो मच्छर जनित बीमारियों को जाने अनजाने दावत देती हैं।आवासों की खिड़की,दरवाजे सब रामभरोसे ही है। मकानों के भीतर की फर्श टूट चुकी है, छतों की कहीं पपड़ी छूटी हुई है तो कहीँ छतें ही लटक रही है और दीवारें भी पुरानी होने व रख रखाव के आभाव में अपनी दास्ताँ खुद सुनाती है।

police-line-quarter-5ऐसे में इन आवासों में रहने वाले कुछ लोगों ने नाम न लिखने की शर्त पर बताया कि अगर आवास को रहने लायक देखना है तो एक साल में अपनी जेब से कम से कम 25 हज़ार तो खर्चने ही पड़ते है। इसके पीछे दलील भी सही है कि इन लगभग सात सैकड़े की संख्या के आवासों के रख रखाव के लिए सरकार से जो बजट सालाना आवंटित होता है वो ऊंट के मुंह में जीरा जैसा है।

police-line-quarter-3ऐसे में एक साथ कई आवास की मरम्मत संभव भी नही है। इसी तरह से पुलिस लाइन्स के एम टी ऑफिस का भी हाल है। जहाँ एक टॉयलेट को 70 लोग यूज करते है और इसी के बगल में बना सेप्टिक टैंक की छत भी जगह जगह दरक गयी है। जिससे निकलती सड़ांध उधर से गुजरते वक्त नाक पर रुमाल रखने को मजबूर कर देती है।

अब किस तरह से उम्मीद किया जाये कि कानून के इन पहरुओं को घर,परिवार की चिंता छोड़ समाज हित में जीवन व्यतीत करना चाहिए।आख़िरकार वे भी इंसान है और इसी समाज का हिस्सा है।उनके पीछे भी एक परिवार है,जिनके बेहतर भविष्य के उत्तरदायी यही पुलिसकर्मी है।

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GFR DeskAugust 20, 2016
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Vinay-Shankar-Tiwari-and-CPगोरखपुर: यूँ तो हर पार्टी में भाई-भतीजावाद, परिवारवाद का आरोप-प्रत्यारोप चलता रहता है और हो भी क्यों ना जब परिवार का मुखिया सियासत में नाम और दाम कमा लिया हो तो उसे संचित रखने की जिम्मेदारी अगली पीढ़ी को ही जाती है। राजनीति की जंग में विरासत की खोज भी चलती रहती है। जिसमे चुनाव एक अहम विषय होता है जिसके माध्यम से विरासत का वारिस तलाश किया जाता है।

लेकिन देखा जाए तो गोरखपुर-बस्ती मण्डल में पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान दिग्गज नेताओं के साहबजादे इस विरासत के इम्तेहान में औंधे मुंह गिरकर असफल हो गए थे। कुछ ऐसे ही साहबजादों के बारे में हम बता रहे है चुनावी इतिहास के झरोखे से।

अगर कोई भी पार्टी उनको हिम्मत बटोर कर इस बार भी टिकट देती है तो इस चुनाव में भी उनका इम्तेहान होना लाजिमी है। इन दिग्गजों में पहले दो नाम पंडित हरिशंकर तिवारी और मार्कण्डेय चंद का आता है।

हरिशंकर तिवारी के पुत्र विनय शंकर त्रिपाठी इस बार चिल्लूपार से बसपा के प्रत्यशी हैं तो वही पुत्र सीपी चंद का है,जो सफलता की इबारत लिखकर अब एमएलसी बन चुके है।

अब उनकी ही राह पर अन्य दिग्गज नेता पुत्र भी टिकट की कतार में है। बता दें कि वर्ष 2012 के पिछले विधान सभा चुनाव में कद्दावर नेता अमर मणि त्रिपाठी ने अपने पुत्र अमन मणि त्रिपाठी को महराजगंज के नौतनवां विधानसभा से सपा प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतारा। लेकिन अमन मणि त्रिपाठी की स्थिति चुनाव में सेकेण्ड रनर की रही।

इसके बाद अगर बात करें लोकतांत्रिक कांग्रेस के अध्यक्ष हरिशंकर तिवारी की तो उनके पुत्र विनय शंकर तिवारी सिद्धार्थनगर के बांसी विधानसभा से बसपा प्रत्याशी के रूप में मुकद्दर आजमाने उतरे लेकिन वहां भी निराशा हाथ लगी। उन्हें इस चुनाव में तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। अब वर्ष 2017 के आगामी चुनाव में उन्हें चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से बसपा से टिकट मिल चुका है। जबकि पिछले चुनाव में हरिशंकर तिवारी इस क्षेत्र से चुनाव हार गए थे।

इसी क्रम में महराजगंज के पूर्व कांग्रेसी सांसद व जमीन से जुड़े नेता हर्षवर्धन ने गोरखपुर के कैम्पियरगंज से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में अपने पुत्र राज्यवर्धन को चुनाव लड़ाया लेकिन वह भी नाकाम रहे। उन्हें करारी हार का चेहरा देखते हुए पांचवे स्थान से संतोष करना पड़ा।

अब बात करे सत्ताधारी दल सपा के पूर्व राज्यमंत्री दिग्गज केसी पांडेय की तो उन्होंने अपने पुत्र अनूप पांडेय को चौरीचैरा विधानसभा से सपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ाया। जो बसपा के जेपी निषाद से हारकर दूसरे स्थान पर पहुंच गए। पूर्व मंत्री मारकंडे चंद ने अपने पुत्र सीपी चंद को चिल्लूपार से सपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ाया लेकिन सीपी चंद चुनाव हार गए। सीपी चंद इस वक्त एमएलसी है।

कांग्रेस के जितेंद्र सिंह ने अपने पुत्र जय सिंह को महराजगंज के सिसवां से चुनाव में हाथ का साथ लेकर उतारा लेकिन उन्हे जनता का साथ नहीं मिला। वर्तमान भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने बस्ती सदर विधानसभा से अपने पुत्र अभिषेक पाल को कांग्रेस के टिकट से चुनाव मैदान में उतारा लेकिन वह भी जीत से दूर औंधे मुंह ही गिरे और दूसरे स्थान से ही संतोष करना पड़ा।

लेकिन एक बात यह कि सभी साहबजादे हारे तो किन्तु चुनाव दमदारी से लड़े। जिसमे विनय शंकर, राज्यवर्धन व जय सिंह को छोड़कर सभी दूसरे स्थान पर रहे।

अब चूँकि वर्ष 2017 का चुनाव सिर पर है और एक बार पुनः भविष्य की राह तलाश रहे इन दिग्गज नेताओं के नाकाम साहबजादे आगामी विधानसभा चुनाव में क्या गुल खिलाते है देखना दिलचस्प रहेगा।

एक नजर पिछले चुनाव में साहबजादों की रिपोर्ट कार्ड

पार्टी          उम्मीदवार              विधानसभा क्षेत्र             मिलें वोट        पोजिशन
सपा        अमन मणि त्रिपाठी          नौतनवां                 68747        दूसरा स्थान
बसपा      विनय शंकर त्रिपाठी          बांसी                    36412        तीसरा स्थान
कांग्रेस      राज्यवर्धन               कैंपियरगंज                  2389         पांचवा स्थान
सपा        अनूप पांडे                 चौरीचौरा                  29086          दूसरा स्थान
सपा        सीपी चंद                 चिल्लूपार                  42763          दूसरा स्थान
कांग्रेस   अभिषेक पाल              बस्ती सदर                34008           दूसरा स्थान

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GFR DeskAugust 20, 2016
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Restaurantगोरखपुर: जी हां, चौक गये न आप ! ये कोई कहानी नही बल्कि असलियत है। महानगर का एक युवा उद्यमी, जिसने दिल्ली और मुम्बई की रेस में गोरखपुर को भी ला खड़ा किया है वह भी पेट पूजा के मामले में। हम बात कर रहें हैं मिलेनियम स्टार अमिताभ बच्चन को समर्पित इस रेस्त्रां की। जिसका नाम ही अमिताभ बच्चन की मशहूर फिल्म शहंशाह के नाम पर है। इस रेस्टोरेंट के मालिक है युवा रक्ष ढींगरा।

Restaurant-1रक्ष के मुताबिक वह और उनके पिता राजीव ढींगरा मिलेनियम स्टार अमिताभ बच्चन के फैन है। होटल मैनेजमेंट से पास आउट रक्ष इससे पहले होटल ताज और हयात रीजेंसी जैसी जगहों पर सेवाएं दे चुके है। किंतु महानगर में अपना होटल रॉयल रेजीडेंसी होने पर इसे सम्हालने के दौरान उन्हें कुछ खास करने की सूझी तो सोचा कि क्यों न अपने आइडल के नाम पर कुछ विशेष किया जाये।

Restaurant-2सोचा गया कि आज के दौर में दो ही चीजें लोगो को अट्रैक्ट करती है , या तो प्लेयर या फिर मूवीज सेलिब्रिटीज को। इसके पहले भी मुम्बई में सलमान खान के नाम भाईजान और दिल्ली में अभिनेता धर्मेंद्र के नाम से धरम गरम नाम के रेस्टोरेंट हैं।

Restaurant-3फिर क्या, अपने कुछ दोस्तों संग बना डाली थीम। शुरू हुआ अमिताभ बच्चन की विशेष चीजो का गहन पर्यवेक्षण। इसी दौरान उन्होंने नेट की मदद से एक पाकिस्तानी आर्टिस्ट से होटल का लोगो शहंशाह बनवा डाला। हालांकि ये रेस्त्रां उन्होंने अपने पापा को बाकायदा 9 जून 2016 को पारम्परिक ढंग से शुरू कर गिफ्ट किया है।

Restaurant-4इसके लिए पहले से चल रहे उनके होटल रॉयल रेजीडेंसी के पुराने रेस्टोरेंट को नया लुक देते हुए इंट्री शोले फिल्म के जेल के दरवाजे से शुरू की गयी। अंदर घुसने पर सीलिंग पर मूवी की रील पर अमिताभ बच्चन की फिल्में घूमते हुए नजर आती है। बीच में दीवार को दीवार फिल्म स्टाइल में ब्रिक वर्क करके बनाया गया है।

Restaurant-5रेस्तरां में घुसते ही टेबल्स पर अमित जी की मूवीज के नाम की प्लेटें रखी हुई है। मसलन पहली टेबल दोस्ताना द कंफिडेंशियल है। टेबलों पर परोसे जाने वाले डिशेज भी अमित जी के नाम पर है। जैसे डिजर्ट स्पेशल डिश का नाम जादूगर है।

Restaurant-6इसके अलावा उनकी कुछ फेमस डिशेज में हरी मिर्च का पनीर टिक्का, सब्जगिलावत का कवाब, चाइनीज डिशेज में होटशॉट पोटैटो,कैनलोनी रोल, सुर्ख पनीर कोरमा और दाल रेजीडेंसी आदि है।

Restaurant-7रक्ष बताते है कि अमित जी के जीवन से जुड़े हर इवेंट डे पर हम कुछ खास करने की कोशिश करते है। आगामी 11 अक्टूबर को अमित जी के बर्थडे पर भी उनसे जुड़ी किसी विशेष चीज पर शो किया जायेगा।

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GFR DeskAugust 18, 2016
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Image-for-represntation-4गोरखपुर: यूपी की राजनीति में मुसलमानों के मतों की अहम भूमिका है। प्रदेश के विधानसभा चुनावों में ज्यादातर सीटों पर सपा, बसपा, कांग्रेस अन्य वोटरों के साथ मुस्लिम वोटों पर ही निर्भर रहते है। जबकि भाजपा की कोशिश रहती है कि मुस्लिम वोट बंटे।

पूर्वांचल के गोरखपुर-बस्ती मंडल के सात जिलों की 41 सीटों में से 13 सीटों पर मुस्लिम वोटरों का खास दबदबा हैं। इसमें से सभी दलों की निगाहें मुस्लिम बाहुल्य इलाकों शोहरतगढ़, बांसी, इटवा, डुमरियागंज, मेंहदावल, खलीलाबाद, पनियरा, गोरखपुर ग्रामीण, पिपराइच, फाजिलनगर, कुशीनगर, पथरदेवा, रामपुर कारखाना पर लगी हुई है।

बड़ी बात ये कि इस क्षेत्र की इन 41 सीटों में कभी 3 तो कभी 4 मुस्लिम उम्मीदवार ही विधानसभा पहुंचने में कामयाब रहे हैं। जो मुस्लिम वोटरों की संख्या देखते हुए बेहद कम हैं।

वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में डुमिरयागंज से बसपा के तौफीक अहमद, मेहंदावल से सपा के अबुल कलाम व सलेमपुर से सपा के चैधरी फसीहा बशीर चुनाव जीतने में कामयाब हुए थे। वहीं 2012 के विधानसभा चुनाव में 4 मुस्लिम विधायक चुनाव जीतने में कामयाब हुए थे।

सिद्धार्थनगर जनपद के डुमरियागंज से पीस पार्टी के मलिक कमाल युसुफ ने जीत हासिल की थी। फिलहाल वह पार्टी छोड़ चुके है। वहीं खलीलाबाद से पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा अयूब, देवरिया के पथरदेवा से सपा के शकिर अली व रामपुर कारखाना से सपा की गजाला लारी ने जीत हासिल किया था।

पिछले 2012 के चुनाव में दोनों मंडलों की सात सीटें ऐसी भी थी ,जहां मुस्लिम उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे थे। अब इन्ही आंकड़ो को देखते हुए अन्य दलों के साथ पीस पार्टी, एआईएमआईएम की इन्हीं सीटों पर पैनी निगाह हैं। यहीं से दोनों पार्टियाँ सीट निकलने की उम्मीद में जुटी है।

हालांकि पीस पार्टी ने गोरखपुर ग्रामीण से दो छोटे दलों से गठबंधन कर डा संजय निषाद को प्रत्याशी बनाया है। वहीं एआईएमआईएम ने मिर्जा दिलशाद बेग को मैदान में उतारा हैं। यहां पर मुस्लिम मतों में बंटवारा तय है। पिछले बार इस सीट पर मुस्लिम उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहा था।

कुछ इसी तरह की स्थिति अन्य मुस्लिम बाहुल्य विधानसभा क्षेत्रों में बनती नजर आ रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में पीस पार्टी ने दोनों मंडलों में दो सीट ही नहीं निकाली बल्कि सपा व बसपा के वोटों को भी गड़बड़ा दिया था ।इससे कुछ सीटों पर सपा जीती हुई बाजी भी हार गयी।

2017 का विधानसभा चुनाव पिछले बार की तुलना में अलग होगा। चुनाव के लिए सभी पार्टियां लग चुकी है। जोड़ तोड़ की राजनीति चल रही हैं। सबसे ज्यादा चिंता समाजवादी पार्टी को है। पिछले चुनाव में सपा बहुमत से आयी थी तो उसकी एक वजह मुस्लिम वोटर थे। पार्टी के ज्यादातर मुस्लिम उम्मीदवार विधानसभा में पहुंचने में कामयाब हुए थे।

गोरखपुर-बस्ती मंडल की सीटों पर सपा के मुस्लिम वोटों में सेंध लगाने का माद्दा अगर किसी पार्टी में है तो वह बसपा, कांग्रेस, पीस पार्टी के साथ सांसद असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम में है। सपा किसी कीमत पर मुस्लिम मतों का बिखराव नहीं होने देना चाहती।

सूत्रों से खबर है कि बाहुबली मुख्तार अंसारी का दल भी सपा की साइकिल पर सवार होने वाला है। दोनों मंडलों की 41 सीटों पर पीस पार्टी व एआईएमआईएम को छोड़कर अन्य किसी मुस्लिम पार्टी का प्रभाव ना के बराबर हैं। मुस्लिम मतों का बिखराव रोकने के लिए बना इत्तेहाद फ्रंट बनने से पहले ही बिखरा हुआ हैं। कुछ दिनों पहले पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मो. अयूब ने तो इत्तेहाद फ्रंट के वजूद से ही इंकार कर दिया।

पार्टी अध्यक्ष ने एआईएमआईएम का समर्थन करते हुए ऐसे और दलों की जरूरत बतायी। उन्होंने बिहार के तर्ज पर साम्प्रदायिक ताकतों से लड़ने की बात भी कही थी। वहीं बात करें मुख्तार अंसारी के कौमी एकता दल की तो यहां पर उनका प्रभाव ना के बराबर है। वहीं दूसरी तरह सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम का दोनों मंडलों पर प्रभाव बढ़ रहा है खासकर मुस्लिम तबके में।

पार्टी को प्रदेश में मान्यता भी मिल चुकी है। हाल ही में ओवैसी के पूर्वांचल दौरे को मुस्लिमों का अच्छा खासा समर्थन भी मिला है। गोरखुपर, महराजगंज, इटवा, सिद्धार्थनगर में पार्टी के सम्मेलन भी आयोजित हो चुके है। जिसमें अच्छी खासी भीड़ देखी गयी है।

मुस्लिमों में ओवैसी बंधुओं की छवि किसी हीरो से कम नहीं है। ऐसे में पार्टी जिस दल से भी गठबंधन करेगी उसका फायदा उस दल को मिलेगा। फिलहाल बसपा, कांग्रेस ने तो गठबंधन से इंकार कर दिया है। लेकिन जैसे-जैसे चुनाव करीब आयेगा। विचारों में परिवर्तन स्वभाविक है।

वहीं बात करें सपा की तो गोरखपुर की नौ विधान सभा सीटों पर सपा ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं खड़ा किया है। हालांकि गोरखपुर ग्रामीण का इलाका मुस्लिम बाहुल्य है जहां पर मुस्लिम वोटो के बदौलत जीत हासिल की जा सकती है। वहीं पिपराइच में बसपा ने आफताब पर भरोसा जताया हैं। जबकि सपा के वरिष्ठ नेता जफर अमीन डक्कू को महराजगंज की पनियरा विधानसभा से टिकट मिल सकता हैं।

पार्टी                    वर्ष 2007                 वर्ष 2012         फायदा        नुकसान
सपा                      15                          18                 3             0
बसपा                    15                            8                 0             7
भाजपा                    7                            7                  0             0
कांग्रेस                    3                            5                   2            0
पीस पार्टी                 0                            2                   2            0
एनसीपी                   0                           1                    1            0

पिछले विधानसभा चुनाव में गोरखपुर-बस्ती मंडल की सीटो पर जीतने वाले उम्मीदवार
1. डुमरियागंज मलिक कमाल युसुफ पीस पार्टी (फिलहाल पार्टी में नहीं)
2. खलीलाबाद डा. अयूब पीस पार्टी
3. पथरदेवा शकिर अली सपा
4. रामपुर कारखाना चैधरी गजाला लारी सपा

पिछले विधानसभाचुनाव में गोरखपुर-बस्ती मंडल की सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों की स्थिति
1. गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा जफर अमीन डक्कू सपा दूसरा स्थान
2. पिपराइच दिलदार हुसैन बसपा चैथा स्थान
3. शोहरतगढ़ मुमताज अहमद बसपा दूसरा स्थान
4. बांसी मोहम्मद सरवर पीस पार्टी चैथा स्थान
5. इटवा मोहम्मद मुकीम कांग्रेस तीसरा स्थान
6. डुमरियागंज सैयदा खातून बसपा दूसरा स्थान
7. मेंहदावल मो. तैयब बसपा तीसरा स्थान
8. खलीलाबाद मशहूर आलम चैधरी बसपा तीसरा स्थान वहीं सपा के अबुल कलाम चैथे स्थान पर रहे
9. पनियरा तलत अजीज कांग्रेस चैथा स्थान
10. फाजिलनगर कमालुद्दीन बसपा दूसरा स्थान
11. कुशीनगर जावेद इकबाल बसपा दूसरा स्थान
12. पथरदेवा नियाज खान निर्दल तीसरा स्थान।

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GFR DeskAugust 15, 2016
Smarak-of-Bandhu-singh.jpg

1min90

Smarak-of-Bandhu-singhगोरखपुर: पूर्वांचल के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में एक मां तरकुलहा मंदिर को कौन नहीं जानता है। किंतु इस पीठ की स्थापना के पीछे क्या राज है, संभवत: बहुत कम लोग ही जानते होंगे। यूँ तो इस शक्तिपीठ पर वर्ष भर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है किंतु चैत्र नवरात्रि में 1 माह तक इस पीठ पर लगने वाला मेला इसके आध्यात्म की अलग कहानी बयां करता है।

बात करते हैं इस शक्ति पीठ की स्थापना के रहस्य की। जिस समय देश में अंग्रेजी हुकूमत का तांडव मचा हुआ था और चारों ओर लोग त्राहिमाम करते थे। उसी समय गोरखपुर क्षेत्र के चौरीचौरा स्थित डुमरी रियासत के 34 गांव के जमींदार शिवप्रसाद सिंह के घर 1 मई, 1833 को बंधु सिंह का जन्म हुआ। अपने परिवार में छः भाइयों में सबसे बड़े बंधू सिंह के अतिरिक्त उनके अन्य भाई करिया सिंह, तेजई सिंह, दया सिंह, फतेहसिंह ,धम्मन सिंह थे।

बचपन से ही बंधु सिंह मां शक्ति के अनन्य उपासक थे, और बचपन में ही कुशीनगर स्थित मदनपुर देवी स्थान के अपने रिश्तेदारी में गए तो वहां मदनपुर स्थित माता के मंदिर से एक छोटा शक्ति पिंड उठाकर उन्होंने अपने रियासत के सरवर ( जो कि तरकुल के पेड़ों से आच्छादित था )के पास स्थापित कर दिया और उसकी नित्य ही पूजा पाठ करने लगे।

धीरे धीरे जब वह किशोरावस्था की तरफ अग्रसर हुए तो अपने रियासत के राजगुरु से शस्त्र व शास्त्र विद्या लेकर तत्कालीन अंग्रेजी दास्तान के पेड़ों में जकड़ी भारत मां को आजाद कराने का एक बार जो प्रण लिया तो उसी जगह पर आजीवन चल पड़े। शस्त्र विद्या में निपुण बंधु सिंह के प्रहार उसे अंग्रेजी सेना बौखला की गई थी क्योंकि उनका मानना था कि गुरिल्ला युद्ध की तर्ज पर ही इन से जीता जा सकता है और अपनी युद्ध प्रणाली में उन्होंने यही किया।

किवदंती है कि उस समय मां को बलि देने की प्रथा थी और बंधु सिंह भी अंग्रेजी सैनिकों को मारकर उनका सर शक्तिपीठ के समीप स्थित कुएं में मां को भेंट चढ़ाते थे। अपने गुरिल्ला युद्ध से अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाले बंधु सिंह को पकड़ने के अंग्रेजों ने कई चालें चली किंतु कामयाब न हो सके आखिरकार उन्होंने रियासत से जुड़े एक व्यक्ति को अपना मुखबीर बना लिया।

जिसने धोखे से 1858 में बंधू सिंह को अंग्रेजो के हाथ गिरफ्तार करवा दिया इसके बाद भी अंग्रेजों का जब मन नहीं भरा तो उन्होंने बंधू सिंह को सरेआम फांसी पर लटकाने की सजा सुना दी और 12 अगस्त 1858 को अली नगर स्थित एक बरगद के पेड़ पर सरेआम लटकाने का मंसूबा बनाया।

किंतु अपने भक्त कि यह प्रताणना मां कैसे सहन करती। नतीजा अंग्रेजों द्वारा उन्हें छह बार फांसी के फंदे से लटकाया गया और 6 बार ही फ़ंदा अपने आप टूट जाता था। आखिरकार इस देवी के भक्त ने मां से विनती किया कि मां अब मेरा समय आ गया है, अब मुझे हंसते-हंसते मातृभूमि के लिए प्राण न्योछावर करने दो और इसके साथ ही उन्होंने हंसते हुए फांसी के फंदे को चूमा और अपने गले में डाल लिया।

कहा जाता है कि ज्योही शहीद बंधू सिंह का गर्दन फंदे से झूला, ठीक उसी वक्त माँ के मंदिर स्थित तरकुल के पेड़ का ऊपरी हिस्सा टूट कर गिर गया और उसमें से रक्तधारा बह निकली। तब से ही इस देवी पीठ की महत्ता तरकुलहा देवी के नाम से हो गयी।

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