Best uttar pradesh News in Hindi - top news in uttar pradesh, Live Hindi News in uttar pradesh, Hindi News in uttar pradesh, up news hindi

GFR DeskOctober 22, 2017
CM-Yogi-Adityanath-3.jpg

1min350

लखनऊ: प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने कहा है कि उत्तर प्रदेश के सांसदों व विधायकों के प्रति सामान्य शिष्टाचार एवं प्रोटोकॉल संबंधी कुछ खबरें, जो कई समाचार चैनलों पर दिखाए गए वे सब तथ्यों से परे हैं।

सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि इस संबंध में कतिपय न्यूज चैनलों द्वारा तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर ऐसे समाचार प्रसारित किए गए, जिससे ऐसा प्रतीत हुआ कि नवीन शासनादेश के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा वीआईपी संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सरकार के प्रवक्ता ने कहा है कि सांसदों तथा विधानमंडल के सदस्यों के प्रति सामान्य शिष्टाचार एवं प्रोटोकॉल का समुचित रूप से पालन सुनिश्चित कराने के संबंध में पूर्व निर्गत शासनादेशों का संदर्भ देते हुए मुख्य सचिव ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं।

प्रवक्ता के अनुसार, मुख्य सचिव द्वारा पूर्व निर्गत शासनादेशों की ओर अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट करते हुए यह कहा गया कि प्रश्तगत विषय में निरंतर दिशा-निर्देश जारी होने के बावजूद शासन के संज्ञान में संसद सदस्यों एवं राज्य विधानमंडल के सदस्यों के प्रति सामान्य शिष्टाचार/अनुमन्य प्रोटोकॉल एवं सौजन्य-प्रदर्शन का पालन समुचित रूप से न करने की शिकायतें प्राप्त होती रही हैं।

प्रवक्ता ने कहा कि सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं। वे अपने-अपने क्षेत्र की जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं। लोगों की समस्याओं एवं जरूरतों के संबंध में इन जनप्रतिनिधियों को अधिकारियों से संपर्क करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि जनता से जुड़े कार्य सुगमता से संपन्न हो सकें, इसको देखते हुए मुख्य सचिव द्वारा पहले से जारी शासनादेशों का हवाला देते हुए अधिकारियों से जनप्रतिनिधियों का सम्मान कर इनकी बातों को प्राथमिकता पर सुनने की अपेक्षा की गई है।


GFR DeskOctober 21, 2017
Shivpal-Yadav.jpg

1min6750

शिवपाल यादव ने अंतत: स्वीकार किया कि वह समाजवादी पार्टी (सपा) केवल विधयक हैं। इस हकीकत को समझने में उन्होंने बहुत देर लगाई। आज वह सपा और सैफई परिवार दोनों में बेगाने हो गए हैं।

पार्टी की कार्यकारिणी घोषित होने के साथ ही उनके लिए भविष्य की संभावना भी समाप्त हो गई है। इसमें रामगोपाल यादव का कद बढ़ा है। इसी के साथ शिवपाल को संदेश भी दे दिया गया।

अब वह ऐसे विधायक मात्र रह गए हैं, जिनके साथ अधिकृत रूप से कोई नहीं है। अब केवल व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर उनके साथ कुछ लोग हैं। लेकिन सपा में इन लोगों के लिए भी सम्मानजनक स्थान नही बचा है।

मुलायम सिंह यादव खुद रामगोपाल से मिलने गए। कुछ समय पहले इन दोनों की तल्खी खुल कर सामने आ गई थी।

मुलायम ने रामगोपाल के प्रति कठोरता दिखाने में कसर नहीं छोड़ी थी। दूसरी तरफ रामगोपाल भी हिसाब बराबर करने में जुटे थे। सपा को तकनीकी रूप में अखिलेश की बनाने और फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से उन्हें बेदखल करने की रणनीति उन्होने बनाई थी। इस जंग में चाहे अनचाहे मुलाययम बहुत पीछे छूट गए थे। फिर वह समय भी आया जब वह खुद सपा के लिए बेगाने होने लगे।

जब दोनों तरफ के सेनाएं मोर्चाबंदी पर थीं, तब मुलायम के साथ केवल अमर सिंह और शिवपाल ही दिख रहे थे। अमर सिंह ने जल्दी ही किनारा कर लिया। यह ऐलान कर दिया कि अब वह मुलायमवादी नहीं रहे। शिवपाल इसके बाद भी उम्मीद बनाए रहे। उन्हें लग रहा था कि मुलाययम उनका साथ देंगे। कुछ नहीं तो सेकुलर मोर्चा बना लेंगे। कुछ दिन पहले यह योजना भी बन चुकी थी।

यह तय हुआ कि मुलायम पत्रकार वार्ता में नई पार्टी का ऐलान करेंगे। लेकिन मुलायम ने वह दूसरा पेज पढ़ने से ही इनकार कर दिया, जिसमें अलग राह बनाने की बात थी। जाहिर है, शिवपाल अंतिम समय तक गलतफहमी में रहे। जबकि मुलायम के मन में कोई दुविधा नहीं थी। वह मान चुके थे कि सपा अब अखिलेश यादव की हो चुकी है। राजनीति में उनके लिए अब कोई खास भूमिका नहीं बची है।

कई लोग मानते हैं कि सपा में जिस प्रकार नेतृत्व का हस्तांतरण हुआ, वह मुलायम की ही योजना थी। परिवारिक कलह, दबाब से बचने को उन्होंने यह रणनीति बनाई थी। जिन परिजनों का उन पर दबाब था, उनके लिए जबाब मिल गया था। मुलायम अब यह कह सकते थे कि जब पूरी पार्टी अखिलेश ले गए तो वह क्या कर सकते हैं।

वस्तुत: यहां दो तथ्यों पर विचार करना चाहिए। इन दोनों को शिवपाल ने समझने का प्रयास नहीं किया। एक परिवार आधारित दलों में उत्तराधिकार का तरीका। इसमें मुखिया का मोह शामिल रहता है। दूसरा मुखिया की उम्र। मोह और उम्र के आधार पर मुलायम के रुख को समझने में कोई कठिनाई नहीं थी।

ऐसा नहीं था कि मुलायम को उत्तराधिकार का फैसला कुछ समय पहले करना था। वस्तुत: यह तभी तय हो चुका था जब अखिलेश को पहली बार कन्नौज से लोकसभा चुनाव लड़ाने का निर्णय हुआ था। मुलायम चाहे जितना कहें कि सपा को मजबूत बनाने में शिवपाल ने बहुत मेहनत की लेकिन उत्तराधिकार बड़े बेटे के लिए ही था।

परिवार आधरित पार्टियों के उत्तराधिकार का अंदाज भी राजतंत्रीय होता है। संजय गांधी के बाद इंदिरा गांधी ने राजीव गांधी को उत्तराधिकार सौपने का निर्णय किया था। इस कार्य को निर्विघ्न बनाने के लिए मेनका गांधी को दरकिनार किया गया। इंदिरा गांधी को उनकी राजनीतिक महत्वकांक्षा पसंद नहीं थी। शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे के अपने भतीजे राज ठाकरे पर बहुत विश्वास था। उन्हें वह अपने साथ रखते थे लेकिन जब उत्तराधिकार तय करने का समय आया तब राज ठाकरे को दरकिनार कर दिया गया। उद्धव ठाकरे की ताजपोशी की गई।

2012 के विधानसभा चुनाव में सपा को बहुमत मिला था। इस अवसर पर भी मुलायम सिंह यादव ने उत्तराधिकार को मजबूती के साथ स्थापित किया था। बताया जाता है कि शिवपाल और आजम खान इसके लिए सहजता से तैयार नहीं थे, लेकिन मुलायम अपने फैसले पर पुनर्विचार हेतु भी तैयार नहीं हुए। अंतत: आजम और शिवपाल ने कैबिनेट मंत्री बन जाने में ही भलाई समझी थी।

कुछ समय बाद मुलायम ने अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष भी बना दिया था। इसके बाद संशय की कोई गुंजाइश ही नहीं बची थी। शिवपाल न जाने किन ख्यालो में थे। दूसरी बात उम्र की भी होती है। कभी नई पार्टी बनाने और उसे प्रदेश की सत्ता में पहुचने का कार्य मुलायम ने किया था । इसके लिए उन्होंने बहुत मेहनत की थी। लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर पुन: उनसे इसकी उम्मीद करना बेमानी था। वह भी उस पुत्र को चुनौती देने के लिए जिसे उन्होंने अपने सामने उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया।

जाहिर है, शिवपाल गफलत में थे। अब सच्चाई उनके सामने है। उनके सामने विकल्प बहुत सीमित है। सपा में उन्हें साफ संदेश मिल चुका है। सेकुलर मोर्चे के विचार में भी कोई दम नहीं बची है। अन्य छोटे दलों की भी प्रदेश में फिलहाल कोई संभावना नहीं है। ऐसे में शिवपाल के अगले कदम का इंतजार करना होगा। सपा में अपनी वर्तमान स्थिति को ज्यादा समय तक मंजूर करना नामुमकिन भले न हो, कठिन अवश्य है। (आईएएनएस/आईपीएन)

(ये लेखक के निजी विचार हैं)


GFR DeskOctober 21, 2017
RSS-leader-killed-in-Ghazipur.jpg

1min3130

गाजीपुर: जिले में आरएसएस कार्यकर्ता और स्थानीय पत्रकार राजेश मिश्रा की उनकी दुकान में घुसकर शनिवार सुबह बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना में उनका भाई गंभीर रूप से घायल हो गया। वारदात की सूचना मिलने पर पुलिस ने इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।

जानकारी के अनुसार करंडा थाना क्षेत्र के ब्राह्मणपुरा चट्टी पर राजेश मिश्रा (35 वर्ष) और उनके भाई अमितेश मिश्रा (30 वर्ष) को मोटर साइकिल पर सवार तीन बदमाशों ने उन्हीं के दुकान में गोली मारी।

गंभीर रूप से घायल राजेश मिश्रा की जिला चिकित्सालय लाते समय रास्ते में मौत हो गई, जबकि उनके भाई अमितेश की हालत गंभीर होने पर उपचार के लिए वाराणसी भेजा दिया गया।

राजेश मिश्रा की मौत की खबर से उपस्थित ग्रामीण गुस्से से उबल पड़े और आक्रोशित होकर कोतवाली से लेकर मिश्रबाजार के बीच दुकान बंद करने लगे। दुकानदारों के विरोध करने पर ग्रामीणों और दुकानदारों में मारपीट भी हुई। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को शांत कराया। पुलिस घटना के कारणों का पता लगा रही है। पुलिस ने कहा है कि अपराधियों को शीघ्र गिरफ्तार किया जाएगा।

चार दिन पहले पंजाब के लुधियाना में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता को गोली मार दी गई थी। इस घटना को बाइक सवार बदमाशों ने अंजाम दिया था। पंजाब के रवींद्र गोसाईं जिनकी उम्र 60 वर्ष थी वह शाखा से अपने घर जा रहे थे तब उन पर फायरिंग हुई थी। इस मामले की जांच एनआईए कर रही है।


GFR DeskOctober 21, 2017
IMAGE-FOR-REPRESENTATION.jpg

1min7700

गोरखपुर: प्रदेश में बेरोजगार युवक और युवतियों के लिए अच्छी खबर है। जल्द ही प्राइमरी स्कूलों में 68,500 टीचरों की बड़ी भर्ती शुरु की जाएगी। बेसिक शिक्षा विभाग ने इस आशय का प्रस्ताव सरकार के पास भेज दिया है।

प्रदेश के दो दर्जन से ज्यादा जिलों में यह भर्तियां की जाएँगी। जानकारी के अनुसार भर्ती की प्रक्रिया अगले महीने के अंत तक या फिर दिसंबर में की जाएगी। भर्ती लिखित परीक्षा के आधार पर होगी। टीईटी पास होने वाले सभी अभ्यर्थी इस परीक्षा में भाग ले सकेंगे। लिखित परीक्षा 150 नंबर की होगी। परीक्षा में हिंदी, इंग्लिश, मैथ, साइंस, निबंध, तार्किक योग्यता जैसे विषयों से प्रश्न पूछे जायेंगे।

आपको बता दें कि गोरखपुर में 900 रिक्तियां हैं तो वहीँ पडोसी जिले देवरिया में 1200 शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। महराजगंज में 900, संत कबीर नगर में 1000, सिद्धार्थनगर में 800, बस्ती में 1100, लखनऊ में 1000, कुशीनगर में 1950, गोंडा में 1450 रिक्तियां होंगी। प्रदेश में सबसे ज्यादा सीतापुर में 2000 वेकन्सी होगी तो वहीँ हापुड़ में सबसे काम 200 रिक्तियां होंगी। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कुल 980 भर्ती होगी।

 


GFR DeskOctober 20, 2017
CM-Yogi-Adityanath-2.jpg

1min930

आगरा: पर्यटन जगत के दिग्गजों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ताजमहल का दौरा करने के फैसले का स्वागत किया है। योगी के दौरे को 17वीं शताब्दी में संगमरमर से बने दुनिया के आठ अजूबों में शुमार ताज के बारे में राजनेताओं के विवादित बयानों से हुए नुकसान की भरपाई के रूप में देखा जा रहा है।

पर्यटन जगत के अग्रणियों ने कहा कि 26 अक्टूबर को योगी का दौरा ताजनगरी के लोगों में भड़के गुस्से को शांत करने में मदद करेगा।

भाजपा विधायक संगीत सोम ने पिछले सप्ताह एक बयान में ताजमहल को भारतीय संस्कृति पर ‘धब्बा’ बताकर विवाद खड़ा कर दिया था, वहीं कुछ अन्य दक्षिणपंथी राजनेताओं ने यूनेस्को के इस विश्व धरोहर स्थल, जिसका दीदार करने लाखों लोग पहुंचते हैं, को भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक लोकाचार का प्रतिनिधित्व न करने वाला बताया था।

गाइडों, ट्रैवल एजेंसियों व होटलों का प्रतिनिधित्व करने वाले निकायों ने आगरा को निशाना बनाकर निरंतर ‘डाउनग्रेडिंग’ और ‘प्रेरित अपमान’ किए जाने के खिलाफ आंदोलन की धमकी दी है।

मुगल इतिहासकार प्रो. आर. नाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को कई पत्र लिखकर कहा है कि राजनेता इतिहास को न बिगाड़ें और ‘अफवाहों’ को आधार बनाकर निर्णय न दें।

आगरा पर्यटन कल्याण प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रह्लाद अग्रवाल ने कहा, “देश के मुख्य पर्यटन स्थल आगरा की सही हिस्सेदारी और मान्यता को अस्वीकार किए जाने से देश का पर्यटन क्षेत्र बुरी तरह से प्रभावित हुआ है।”

पर्यटन जगत के कुछ दिग्गजों ने शुक्रवार सुबह आईएएनएस को बताया कि उन्हें आशा है कि मुख्यमंत्री के दौरे से इस विवाद पर विराम लग जाएगा।

गाइड्स एसोसिएशन के सचिव राजीव सक्सेना ने कहा कि मुख्यमंत्री का दौरा बिल्कुल सही समय पर होने जा रहा है।

जीएसटी की वजह से आर्थिक मंदी का पहले से ही दबाव झेल रहे हस्तशिल्प उद्योग के नेताओं ने राजनेताओं से अपील की है, “वे इस तरह की बेतुकी बयानबाजी न करें, जिनके पास इतिहास का कोई आधार नहीं है।”

पर्यटन विकास फाउंडेशन के अध्यक्ष संदीप अरोड़ा ने बताया कि लाखों लोग पर्यटन से अपनी आजीविका चला रहे हैं और नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि ताजमहल सकल वार्षिक कमाई में नंबर एक रहा है।

ताजमहल की उत्पत्ति को लेकर सवाल नियमित अंतराल पर उठते रहे हैं। वहीं पी.एन. ओक का सिद्धांत कहता है कि यह स्मारक पहले शिव मंदिर था। इस बारे में वरिष्ठ गाइड वेद गौतम ने आईएएनएस को बताया, “हिंदू संगठन यह सवाल तब उठाने लगे, जब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इस स्मारक के जानबूझकर संप्रदायीकरण किए जाने की प्रक्रिया के तहत लोगों को प्रार्थना और धार्मिक गतिविधियां आयोजित करने से रोकने में विफल रहा।”

इस बीच, अधिकारियों ने ताजमहल के आसपास के इलाके को संवारने की योजना बनाई है, जहां मुख्यमंत्री के दौरे की संभावना है। खेरिया हवाईअड्डे से ताजमहल तक 10 किलोमीटर की पट्टी में बैरिकेड लगाए गए हैं, साथ ही सड़क मरम्मत का कार्य भी शुरू हो गया है।

जिलाधिकारी गौरव दयाल ने कहा कि आदित्यनाथ यहां कम आय वर्ग के लोगों के लिए पर्यटन योजना के तहत कुछ परियोजनाओं की समीक्षा करेंगे और आगरा व मथुरा में कुछ बुनियादी परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे।

योगी ने इससे पहले 7 मई को आगरा का दौरा किया था। उन्होंने दोपहर में गंदे और विवादास्पद ताज कॉरिडोर में घूमते हुए यमुना के कायाकल्प की योजना पर चर्चा की थी। हालांकि पांच महीनों में इस मुद्दे पर ज्यादा कुछ नहीं किया गया।


GFR DeskOctober 18, 2017
CM-Yogi-in-Ayodhya.jpg

1min5110

गोरखपुर/अयोध्या: चौदह वर्षो के बनवास के बाद सत्ता में आई भाजपा आज अयोध्या नगरी में दीपोत्सव मना रही है। जहाँ बुधवार को भगवान राम की भव्य शोभायात्रा निकाली गयी। जो पूरे नगर के भ्रमण के बाद राम कथा पार्क पहुंची।जहाँ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रभु राम, माता सीता और उनके भाई लक्ष्मण का स्वागत किया।

इस दौरान प्रभु राम पुष्पक विमान बने हेलिकॉप्टर से राम कथा पार्क पहुंचे थे।जहाँ मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें माला पहनाकर उनका स्वागत किया।इसके बाद प्रभु राम, माता सीता और लक्ष्मण के साथ राम कथा पार्क के मंच पर पहुंचे ।जहाँ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रभु राम समते माता सीता और लक्ष्मण की आरती उतारी।उनके साथ राज्यपाल राम नाईक, उप-मुख्यमंत्री डॉ० दिनेश शर्मा ने भी प्रभु राम की आरती उतारी।

बता दें कि कलयुग में प्रदेश में 14 साल का वनवास काटने के बाद भाजपा सत्ता में आई है।ऐसे में इस बार भगवान श्रीराम की अयोध्या नगरी स्थित सरयू तट पर करीब 14 हजार लीटर तिल के तेल से 1.71 लाख दीप जलाए जा रहे हैं।वही सत्ता में आने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ अयोध्या में दिवाली का पर्व मनाने पहुंचे हैं। इसको लेकर यहां के निवासियों में काफी उत्साह है ।वहीं इस अद्भुत दीपोत्सव को सूबे की योगी सरकार गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने वाली है।

अयोध्या में सरयू नदी के किनारों पर 1.71 लाख दीपों को सजाया गया है।वहीँ राम की पौड़ी पर दीप जलाने की जिम्मेदारी डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध यूनिवर्सिटी को दी गई है।आज शाम 6 से 6:30 बजे के बीच इस दीपोत्सव कार्यक्रम शुरुवात हो जाएगी।

आज अयोध्या में दीपावली मनाने पहुंचे सीएम योगी आदित्यनाथ के प्रदेश का पूरा अमला मौके पर जमा है। जहां इस पर्व को अदभुत ढंग से मनाने के लिए आज साकेत महा विद्यालय से राम कथा पार्क के लिए शोभा यात्रा के दौरान मनोरम झांकियां निकली ।हजारों की संख्या में भीड़ पीछे-पीछे उद्घोष करती चल रही थी। प्रभु श्रीराम के स्वागत के लिए खुबसूरत रंगोली बनाई गई है।शोभायात्रा के रास्तों को फूलों से सजाया गया है और यहाँ सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया है।

अयोध्या के लोगों में इस दीपोत्सव को लेकर गजब का उत्साह दिखाई दे रहा है।उनको यकीन नहीं हो रहा है कि अयोध्या में इस प्रकार का आयोजन हो रहा है।अयोध्या वासियों के मुताबिक त्रेतायुग के बाद शायद पहली बार इतनी भव्य दिवाली देख रही अयोध्या में हर्षोल्लास का माहौल बना हुआ है।


GFR DeskOctober 18, 2017
Diwali-in-Ayodhya.jpg

1min1090

गोरखपुर: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की नगरी अयोध्या में आज सीएम योगी आदित्यनाथ के सानिध्य में भव्य ऐतिहासिक दिवाली मनाई जाएगी। साथ ही भगवान राम के लंका विजय पश्चात अयोध्या लौटने के उपलक्ष्य में आरती परम्परा को पुनर्जीवित किया जाएगा।इसके लिए अयोध्या नगरी को संजाने सवारने के लिए सीएम द्वारा प्रदेश सरकार की ओर से 134 करोड़ रुपये की योजना भी घोषित की जाएगी।जो भगवान राम,राजा दशरथ और उनके जलसमाधि वाले घाट के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण पर व्यय किये जायेंगे।

प्रदेश के प्रमुख सचिव पर्यटन अवनीश कुमार अवस्थी के अनुसार नव्य अयोध्या को धार्मिक पर्यटन में विश्व मानचित्र पर लाने की योजना है। अयोध्या में पयर्टन को बढ़ावा देने के लिए त्रेतायुग की थीम पर ‘नव्य अयोध्या’ प्रोजेक्ट तैयार कर केंद्र से 195.89 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। डीपीआर को स्वीकृत करते हुए पर्यटन मंत्रालय ने 133.70 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत अयोध्या में भगवान राम की 100 मीटर से ज्यादा ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या वासियों एवं तीर्थ यात्रियों के लिए भी छोटी दीपावली के इस कार्यक्रम में कई बड़ी योजनाओं को एलान करेंगे। दिगम्बर अखाड़ा परिसर में बहुउद्देश्यीय प्रेक्षागृह का निर्माण, राम की पैड़ी, पर्यटकों के ठहरने के स्थल, सुरक्षा की दृष्टि से प्रमुख जगहों को सीसीटीवी से लैस करना, पुलिस बूथों की बढ़ोत्तरी, जगहों के दर्शन के लिए इको फ्रेंडली ट्रांसपोर्ट की सुविधा दी जाएगी। यही नहीं नागरिक सुविधायें जैसे शौचालय, जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाएगी।

आज मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ सरयू तट पर भगवान राम की आगवानी करेंगे। हरी की पैड़ी को 1.71 लाख दीपक से रोशन किया जाएगा। इन दीप को जला कर गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में अयोध्या दर्ज हो जाएगा। इसके लिए शासन ने संबंधित अधिकारियों से संपंर्क कर लिया है। दीपोत्सव कार्यक्रम में राज्यपाल राम नाईक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पर्यटन मंत्री डॉ रीता बहुगुणा जोशी, केन्द्रीय पर्यटन राज्यमंत्री एल्फांस कंननथानम, केन्द्रीय संस्कृति राज्यमंत्री डॉ. महेश शर्मा समेत प्रदेश के सभी सांसद-मंत्री एवं विधायक आमंत्रित हैं।

इस दौरान अयोध्या की हेरिटेज वाक, भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन को समेटे भव्य शोभा यात्रा आयोजित होगी। यात्रा के रामकथा पार्क आगमन पर पूजन-वन्दन, श्रीराम के प्रतीकात्मक राज्यभिषेक का आयोजन किया जाएगा। यहां श्रीलंका, इंडोनेशिया और भारत की ओर से गोरखपुर एवं सलेमपुर के कलाकारों का संयुक्त दल क्रमश: 60-60 मिनट की रामलीला की प्रस्तुति देगा। सरयू तट पर लेजर-शो का भी आयोजित होगा।

अयोध्या को सजाने सवारने को प्रस्तावित हैं यह काम:-

सरयू नदी पर राम की पैड़ी को करीब 12.5 करोड़ खर्च कर नए सिरे से बनाया जाएगा। यहां लाइटें लगाई जाएगी ताकि यह पूरा क्षेत्र जगमग रहे। इसी तरह भगवान राम के निवास स्थान कनक भवन और राजा दशरथ के निवास स्थान दशरथ महल का भी जीर्णोद्धार करीब 11.5 करोड़ रुपये की रकम खर्च की जाएगी। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के जीवन में लक्ष्मण की भूमिका भी कमतर नहीं है। इसलिए सरयू नदी के तट पर बने लक्ष्मण घाट का भी सौंदर्यीकरण करते हुए उसे नए सिरे से निर्मित किया जाएगा। इस कार्य पर तकरीबन 11 करोड़ रुपये की रकम खर्च की जाएगी।


GFR DeskOctober 4, 2017
Samajwadi-Party.jpg

1min140

लखनऊ: समाजवादी पार्टी का दसवां राष्ट्रीय सम्मेलन आगरा में पांच अक्टूबर को होगा। जिसमें 25 राज्यों के लगभग 15 हजार प्रतिनिधि भाग लेंगे। ये प्रतिनिधि राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करेंगे, जिनका कार्यकाल नए संविधान के तहत अब पांच साल का होगा।

25 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुलायम सिंह ने कहा था कि अखिलेश ने मुझे धोखा दिया है. अखिलेश ने 3 महीने के लिए अध्यक्ष बनाने की बात कही थी। हम अखिलेश के राजनीतिक फैसलों के खिलाफ हैं. जो बाप का नहीं हो सकता, वो किसी का नहीं हो सकता. अब देखना होगा अखिलेश हीअध्यक्ष बनते हैं या फिर मुलायम सिंह को अध्यक्ष बनाया जाता है।

पिछले कई दिनों से समाजवादी कुनबे में दरार की खबरें आ रही है। पहले खबर थी कि समाजवादी पार्टी में वर्चस्व की लड़ाई का नया दौर शुरू होने वाला है। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव, लोकदल के साथ मिलकर नई पार्टी का ऐलान कर सकते हैं। लेकिन मुलायम सिंह ने इन खबरों से इनकार करते हुए साफ कर दिया था कि वो नई पार्टी नहीं बना रहे हैं।

अब सबकी नजरें 5 अक्टूबर को होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन पर हैं. सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव सुबह नौ बजे सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे. सम्मेलन में आर्थिक-राजनीतिक प्रस्ताव पेश होगा, जिस पर प्रतिनिधि अपने विचार रखेंगे।

उन्होंने बताया कि पार्टी का यह सम्मेलन भावी राजनीतिक दशा-दिशा को भी प्रभावित करेगा, क्योंकि इसमें वर्तमान राजनीतिक स्थितियों और देश के की समस्याओं पर विचार किया जाएगा. एक तरह से इस सम्मेलन में देश को जोड़ने और तोड़नेवालों के बीच निर्णायक संघर्ष की भी आधारशिला रखी जाएगी। बीजेपी देश को तोड़ने वाली पार्टी है, जबकि अखिलेश यादव देश को जोड़ने वाली ताकतों का नेतृत्व कर रहे हैं।

सम्मेलन में लोकसभा चुनाव 2019 की तैयारियों और रणनीति पर भी विचार होगा। चार अक्टूबर को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी, जिसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करेंगे।

(इनपुट IANS से)


GFR DeskSeptember 30, 2017
Image-for-representation-1-2.jpg

1min140

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बीते वर्षों में बंद हो चुके सिनेमाघरों को चालू करने के लिए योगी सरकार नयी प्रोत्साहन योजना के तहत मल्टीप्लेक्स सिनेमाहाल खुलवायेगी।उक्त आशय की घोषणा प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने मनोरंजन विभाग की कर समीक्षा के दौरान की।

उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने मनोरंजन कर विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि बंद पड़े सिनेमाघरों को चलवाने के लिए टैक्स प्रक्रिया में सरलीकरण पर विचार किया जा रहा है। जिसके तहत बीमार यूनिटों में तीन साल तक 100 प्रतिशत ,उसके बाद दो साल तक 75 प्रतिशत छूट देने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है। मौर्य ने बातया कि प्रदेश के 58 जिलों में एक भी मल्टी प्लेक्स सिनेमा घर नहीं हैं। ऐसे जिलों में उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जायेगा।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में फिल्म सिटी बनाने की पहल हेतु सम्बन्धित विभागों के साथ बैठक की जायेगी।साथ ही उत्तर प्रदेश के फिल्म कलाकारों को प्रोत्साहित किया जायेगा ।ताकि प्रदेश में कलाकारों के लिए एक माहौल बनाया जा सकें। मौर्य ने सिनेमाघरों के अलावा अन्य क्षेत्रों से प्राप्त होने वाले करों का आकलन करने के निर्देश स बन्धित अधिकारियों को दिये।

उत्तर प्रदेश में बीते दो दशकों में 600 से ज्यादा सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर बंद हो गए हैं। बीती सरकारों ने बंद पड़े सिनेमाघरों को फिर से चालू करने के लिए कई प्रोत्साहन योजनाएं शुरु कीं पर अब उसका लाभ लेते हुए 29 सिनेमाघर ही दोबार खुल पाए हैं। प्रदेश सरकार की निगाह इन 58 जिलों पर है जहां अब तक एक भी मल्टीप्लेक्स नही खुले हैं। उत्तर प्रदेश में अब बन्द सिनेमाघरों को मल्टीप्लेक्स स्कीम के तहत चालू किया जायेगा।

इस दिशा में सिनेमा मालिको के लिए प्रोत्साहन योजना चलायी जायेगी। नयी प्रोत्साहन योजना के तहत योगी सरकार का बंद पड़े सिंगल स्क्रीन सिनेमा घरों को मल्टीप्लेक्स में बदलने पर मनोरंजन कर में भारी छूट देने का प्रस्ताव है। मनोरंजन कर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के बंद पड़े छविगृहों को पुनः सक्रिय करने तथा अन्य सक्रिय छविगृहों के सुदृढ़ी करण एवं सिनेमा हालों में फिल्मों को देखने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए वर्तमान छविगृहों में उपलब्ध सुविधाओं तथा तकनीक का आधुनिकी करण एवं उच्चीकरण करने पर विशेष बल दिया है।

इससे पहले प्रदेश सरकार ने बंद पड़े सिनेमा घरों को कम क्षमता के हाल में परिवर्तित करने की दशा में खाली पड़ी जमीन के व्यावसायिक उपयोग की अनुमति भी देने का फैसला किया था। उत्तर प्रदेश में मल्टीप्लेक्सों का चलन बढ़ने और उन्हें दी जा रही करों में छूट के चलते बीते एक दशक में सैकड़ों एकल स्क्रीन सिनेमा घर बंद हो चुके हैं।अकेले राजधानी में अब तक एक दर्जन सिनेमा हाल बंद हुए हैं जबकि बीते सात सालों में छह नए मल्टीप्लेक्स खुल चुके हैं।


GFR DeskSeptember 27, 2017
Image-for-representation-28.jpg

1min180

लखनऊ: प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्री डा दिनेश शर्मा ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को यूपी बोर्ड की वर्ष 2018 की परीक्षा को नकल विहीन सम्पन्न कराने के सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने सीसीटीवी से युक्त विद्यालयों को ही परीक्षा केन्द्र बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष परीक्षा केन्द्रों का निर्धारण पारदर्शी तरीके से आनलाइन किया जाएगा ताकि केन्द्र के निर्धारण में पक्षपात एवं मनमानी का कोई आरोप न लग सके।

उन्होंने निर्देश दिए कि जिला विद्यालय निरीक्षक व्यक्तिगत रूप से स्वयं विद्यालयों का निरीक्षण कर सत्यापन रिपोर्ट दे कि विद्यालय परीक्षा केन्द्र बनाये जाने के सभी मानक पूरे करते हैं। इस बार स्वकेन्द्र परीक्षा की व्यवस्था नहीं होगी।

उप मुख्यमंत्री यहाँ योजना भवन में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला विद्यालय निरीक्षकों से विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श कर रहे थे। उन्होंने निर्देश दिए कि विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर बस चालक एवं चतुर्थ श्रेणी कार्मिक पुलिस वेरीफिकेशन के बाद ही रखे जायं। उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश दिए कि वे विद्यालयों की प्रधानाचार्यों एवं प्रबन्धकों की एक बैठक आगामी 28 सितम्बर को जिले पर आयोजित कर यह सुनिश्चित करायें कि किसी भी विद्यालय में बिना पुलिस सत्यापन के कोई भी बस चालक एवं चतुर्थ श्रेणी कार्मिक न रखे जाये।

उप मुख्यमंत्री ने राजकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों की समस्याओं पदोन्नति, विनियमितीकरण पेंशन भुगतान एवं अवशेष देयों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर करें। इसमें शिथिलता बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों एवं अन्य कार्मिकों के सेवा नैवृत्तिक देयकों के निस्तारण में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतें।

उन्होंने निर्देश दिए कि आनलाइन परीक्षा केन्द्रों के निर्धारण हेतु आधारभूत सूचनाओं को वेबसाइट पर अनिवार्य रूप से शीघ्रता से अपलोड करें!विद्यालयों के मान्यता दिए जाने के सम्बन्ध में उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन विद्यालयों ने मान्यता के लिएआनलाइन आवेदन किए हैं, उनका परीक्षण कर यह सुनिश्चित करा लें कि मान्यता संबंधी सभी औपचारिकताएं पूर्ण कर ली गयी हैं।

जिन विद्यालयों के आवेदन में कोई कमी रह गयी हो, तो वेबसाइट पर अपलोड कर दें, ताकि वे आगामी 31 अक्टूबर तक कमियों को दूर कर लें। उन्होंने कहा कि इस बार मान्यता देने में किसी तरह की मनमानी नहीं होने पायेगी। उन्होंने कहा कि विद्यालयों ने जिस क्रम में आनलाइन आवेदन मानक के अनुरूप पूर्ण किए हैं, उसी क्रम में उन्हें मान्यता भी दी जाएगी।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी 2018-19 के सत्र से सभी विद्यालयों में हिन्दी, अंग्रेजी और संस्कृत विषय को छोड़कर अन्य सभी विषयों के पाठ्यक्रम एनसीईआरटी के लागू होंगे। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती हेतु शिक्षा सेवा आयोग के गठन की कार्रवाई अंतिम चरण में है।

अपर मुख्य सचिव संजय अग्रवाल ने कहा कि इस बार परीक्षा केन्द्र निर्धारण में सख्ती की जाएगी तथा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उन्हीं विद्यालयों को परीक्षा केन्द्र बनाया जाय, जिनका रिकार्ड साफ-सुथरा हो। उन्होंने कहा कि इस वर्ष पिछले साल की तुलना में इण्टरमीडिएट में कम परीक्षा केन्द्र बनाये जाएंगे। उन्होंने बताया कि बोर्ड परीक्षाओं के वर्ष 2015, 2016 एवं 2017 के शिक्षकों के भुगतान हेतु धनराशि जारी कर दिए गये हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि जिला विद्यालय निरीक्षक शिक्षकों के बोर्ड परीक्षाओं के अवशेष मानदेय का भुगतान तत्काल सुनिश्चित करायें।