चिकित्सकों ने मंत्री के आने पर मृत बच्चे के शव को कम्बल से ढक जिन्दा दिखाने की कोशिश की

गोरखपुर: धरती का भगवान कहे जाने वाले चिकित्सक और वह भी गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की संवेदनाए दम तोड़ चुकी हैं। बीते पांच दिनों में 65 से ऊपर हुई मौतों के बाद भी चिकित्सकों की संवेदनाएं नहीं जगी हैं। पूरे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में जहां अफरा-तफरी का माहौल है और तमाम सत्ता और विपक्ष के नेतागण आ रहे हैं। वही असलियत छुपाने के लिए मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक बच्चों के शव को कंबल से ढक कर उन्हें जिंदा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ ऐसा ही मामला आज सिद्धार्थनगर से आए रामसकल के 1 वर्षीय बच्चे के साथ हुआ

राम सकल के अनुसार बीते 8 तारीख की सुबह वह अपने बच्चे को तेज बुखार की हालत में लेकर आया था और तब से ही मेडिकल कॉलेज में बच्चे का इलाज चल रहा था। उसने कहा 10 तारीख की रात जब गैस खत्म हो गई तो पूरे इंसेफ्लाइटिस वार्ड में लोग घबरा गए बाद में चिकित्सकों ने बताया कि ऑक्सीजन आ रही है। इसके बाद उसके बच्चे का इलाज होता रहा और स्थिति बिगड़ती रही।

आज सुबह उसके बच्चे को जब झटके आने लगे तो वह चिकित्सकों के आगे गिड़गिड़ाता रहा । बावजूद इसके ,उसे बच्चा ठीक करने का आश्वासन मिलता रहा और दोपहर होते-होते उसका बच्चा इस दुनिया से रुखसत कर गया। जिसे देख राम सकल और उसके परिवार के लोग रोने लगे और अपने बच्चे की लाश लेकर जाने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र मांगने लगे लेकिन चिकित्सकों ने बच्चे को बेड पर कंबल से ढककर रखा था।

रामसकल के अनुसार चिकित्सकों ने कहा अभी मंत्री का दौरा है और मीडिया कर्मी हैं। इसलिए इसी तरह दिखाते रहो कि तुम्हारा बच्चा जिंदा है ,यहां तक कि मंत्री के निरीक्षण के दौरान भी उसके बच्चे को कंबल में ढके रखा गया। बाद में शाम तकरीबन 5:30 बजे उसे डेथ सर्टिफिकेट हम आते हुए बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

संवेदनहीनता की हद तो तब हो गई जब चिकित्सकों ने उसे कोई एंबुलेंस ना उपलब्ध कराते हुए बच्चे को कंधे पर लेकर ऑटो से या बस से सिद्धार्थनगर जाने की सलाह दी।