देवरिया / कुशीनगर

देवरिया: समाजसेवा के नाम पर सेक्स रैकेट का पर्दाफाश; 24 महिलाएं, बच्चे कराये गए मुक्त

वेद प्रकाश दुबे/विकास द्विवेदी
देवरिया: विगत कई वर्षों से स्थगन आदेश के बाद चला रही मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान द्वारा दत्तक ग्रहण एवं बाल गृह का एक ऐसा घिनौना सच सामने आया जिसको सुनने के आप शर्मसार हो जाएंगे। सदर कोतवाली क्षेत्र में पुलिस ने रविवार की देर रात एक तथा कथित बालिका गृह से सेक्स रैकेट का खुलासा कर वहां से चौबीस महिलाएं और बच्चों को मुक्त कराया है।

पुलिस अधीक्षक रोहन पी कनय ने रविवार की देर रात यहां पत्रकारों को बताया कि सदर कोतवाली क्षेत्र स्थित मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान द्वारा संचालित बाल गृह बालिका,बाल गृह शिशु और स्वाधार गृह की मान्यता पर शासन ने रोक लगा दिया था।

उन्होंने बताया कि इसके बाद भी संस्था में बालिकाओं,शिशुओ तथा महिलाओं को अवैध रूप से रखा जाता था।रविवार की शाम बेतिया बिहार की एक बालिका बालिका गृह से भाग निकली और पुलिस को आपबीती बताई।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जांच में पता चला कि संस्था में रह रहीं 15 से18 बर्ष की लड़कियों से अवैध धंधा कराने की बात सामने आने पर पुलिस ने चौबीस महिलाएं और बच्चों को मुक्त कराया गया है। संस्था को सील कर संचालिका गिरिजा त्रिपाठी, उसके पति मोहन त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया गया है। संस्था की अधीक्षका कंचनलता फरार है।पुलिस गम्भीर दफाओं में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।

उन्होंने बताया कि इस संस्था में 42 महिलाएं और बच्चों के रहने की सूचना है।जिसमें 18 बच्चे,महिलाएं और बालिकायें लापता बताई जा रही हैं।जिनके बारे में जानकारी की जा रही हैं।यहां छोटे बच्चों से झाड़ू पोछा खाना बनवाने से लेकर कई ऐसे गलत कार्य कराए जाते थे जिससे बच्चे काफी दुखी और परेशान रहते थे।

संस्था की रहने वाली एक मासूम अंजली ने हिम्मत कर संस्था से भाग गयी। जब उसने सारी बातों का खुलासा किया तब पुलिस अधीक्षक देवरिया रोहन के पैरों तले जमीन खिसक गई। बच्ची का दर्द सुन तत्काल टीम गठित कर छापेमारी की। जिसमें अवैध तरीके से रह रहे 24 बच्चों को रेस्क्यू कर छुड़ाया गया।रेस्क्यू के बच्चे जब कैमरे के सामने आये तो काफी बुरी हालत में थे पुराने फाटे कपड़ों के साथ देख कलेजा फट सा गया।

आपको बता दे कि मासूम अंजली विगत 3 वर्षों से इस संस्था में रह रही है। बच्ची से संस्था की अध्यक्षा गिरजा त्रिपाठी के द्वारा झाड़ू पोछा, बाथरूम साफ कराना, बर्तन साफ करने, से लेकर पैर दबाने तक का कार्य कराती थी। मना करने पर बच्ची को पीटा भी जाता था जिससे बच्ची इस फिराक में थी कि उसे कब यहां से भागने का मौका मिले।

जानकारी के अनुसार अचानक 5 अगस्त की सुबह के समय झाड़ू लगाते वक्त बच्ची ने देखा कि संस्था का दरवाजा खुला हुआ है। उसकी अध्यक्ष फोन पर बातें करने में लगी थी। मौका पाते ही बच्ची वहां से भाग निकली भागकर बच्ची महिला थाने पहुंची। जहां थाना इंचार्ज को उसने अपनी आपबीती सुनाई। देर न करते हुए थाना इंचार्ज ने सूचना पुलिस अधीक्षक को दे डाली। पुलिस अधीक्षक हरकत में आए एवं बच्ची के कथना अनुसार तत्काल टीम गठित कर छापेमारी कर दी छापेमारी में 24 बच्चियों का रेस्क्यू किया गया। जिसमें 8 बच्चियां की उम्र 15 वर्ष से ऊपर थी एवं बाकी नाबालिग बच्चियां शामिल थी। जिन्हें पुलिस लाइन लाकर भोजन एवं नाश्ता कराया गया साथ ही साथ रहने की उचित व्यवस्था कराते हुए पुलिस अधीक्षक महोदय ने उन पर सुरक्षा की दृष्टि से महिला कांस्टेबलों की तैनाती भी कर दी।

अंजली से जब बात की गई तो उसने साफ शब्दों में बताया कि हमारे संस्था के नीचे रोज अलग-अलग गाड़ियां आती थी जिसमें संस्था की बड़ी दीदी लोग को बाहर ले कर चली जाती थी। शाम को गई दीदी सुबह जब लौटने पर फूट-फूट कर रोती थी। पूछे जाने पर कुछ भी बताने से पहले खूब रोतीं थी उसके बाद इंकार करती थी। साथ ही में उससे झाड़ू पोछा के अलावा पैर दबाने से लेकर बर्तन तक धुलवाया जाता था।खाने में सबसे ज्यादा चावल सब्ब्जी ही दिया जाता था। यहाँ तक कि उन सभी को पढ़ने तक की मनाही थी।

आपको बता दें कि इससे पहले संस्था को खाली कराने गए जिला प्रोबेशन अधिकारी, बाल संरक्षण अधिकारी एवं बाल कल्याण समिति के मेंबरों के साथ गलत व्यवहार किया गया था। इसकी रिपोर्ट जिला प्रोबेशन अधिकारी ने जिलाधिकारी को दी थी। जिस पर अध्यक्ष एवं उनकी बेटी पर सरकारी काम में बाधा उत्पन्न करने एवं अधिकारियों से दुर्व्यवहार करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। अभी कुछ दिन ही बीते थे कि यह घटना घटित हुई एवं उनकी संस्था पर छापेमारी कर बच्चों को सही सलामत बचा लिया गया।छापेमारी करने गए शहर के कोतवाल को भी फर्जी मुकदमे में फसाने तक की धमकी दे डाली और कहा तुम्हारे ऊपर 376 का मुकदमा करुँगी

वहीँ इस मामले में जिला प्रोबेशन अधिकारी का कहना था कि 22 जून 2017 को निदेशालय से साफ शब्दों में स्थगन आदेश के साथ बच्चों को दूसरे जगह स्थानांतरित करने का आदेश हमारे पास आया था। जिसका पालन करते हुए वो संस्था को खाली कराने गए थे। लेकिन उस वक़्त उन लोगों के साथ काफी दुर्व्यवहार किया गया जिसकी रिपोर्ट उन्होंने जिलाधिकारी को दे दी थी।

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