देवरिया / कुशीनगर

कलराज के बाद देवरिया के एक और भाजपा नेता ने उठायी SC-ST एक्ट के खिलाफ आवाज

राकेश मिश्रा
देवरिया: पूर्व केंद्रीय मंत्री और स्थानीय सांसद कलराज मिश्रा के बाद देवरिया के एक और भाजपा नेता ने केंद्र सरकार के एससी-एसटी संशोधन विधेयक 2018 के खिलाफ आवाज उठायी है।

Gorakhpur Final Report से बात करते हुए सदर विधानसभा के भाजपा नेता विजय प्रताप मणि त्रिपाठी ‘डब्लू मणि’ ने कहा है कि SC-ST Act के सम्बन्ध में केंद्र सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा है कि SC-ST एक्ट को लेकर सवर्ण और पिछड़े समुदाय की जो भी चिंताए हैं उन्हें केंद्र सरकार को जल्द से जल्द दूर करना चाहिए।

श्री त्रिपाठी ने कहा कि इस एक्ट में जो भी खामियां हैं उन्हें सुधार करना चाहिए जिससे की इसका कोई दुरुपयोग न करने पाए। भाजपा नेता ने कहा कि आज सवर्णों द्वारा आहूत किये गए देशव्यापी आंदोलन को देखते हुए केंद्र सरकार इस पर गंभीरता से विचार करे ताकि ऐसे आंदोलन का सरकार को सामना ना करना पड़े।

बता दें कि इससे पहले स्थानीय सांसद कलराज मिश्रा ने भी अपने ही सरकार द्वारा लाये गए एक्ट के खिलाफ अपनी आवाज उठायी थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज ने कहा था कि ज़मीन पर एससी-एसटी एक्ट का दुरूपयोग हो रहा है। लोगों के अंदर असमानता का भाव पैदा हो रहा है। अधिकारी भी डर रहे हैं कि अगर मुकदमा दर्ज़ नहीं हुआ तो कार्यवाही हो जाएगी। फ़र्ज़ी मुकदमों में लोगों को गिरफ़्तार किया जा रहा है। सभी दल के लोगों ने इसे दबाव देकर बनवाया गया है, सभी दल ज़मीन से फ़ीडबैक लेकर इसमें बदलाव कराएं।

ये पूरा विवाद उस एससी-एसटी ऐक्ट को लेकर है, जिसमें नरेंद्र मोदी सरकार ने संशोधन करते हुए सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट दिया था। एससी-एसटी संशोधन विधेयक 2018 के जरिए मूल कानून में धारा 18A को जोड़ते हुए पुराने कानून को बहाल कर दिया जाएगा। इस तरीके से सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गए सभी प्रावधान रद्द हो जाएंगे।

अब सरकार द्वारा किए गए संशोधन के बाद इस मामले में केस दर्ज होते ही गिरफ्तारी का प्रावधान है। इसके अलावा आरोपी को अग्रिम जमानत भी नहीं मिलेगी, बल्कि हाई कोर्ट से ही नियमित जमानत मिल सकेगी। अब जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल संबंधी शिकायत पर तुरंत मामला दर्ज होगा और मामले की जांच इंस्पेक्टर रैंक के पुलिस अधिकारी करेंगे। एससी-एसटी मामलों की सुनवाई सिर्फ स्पेशल कोर्ट में होगी। इसके साथ ही सरकारी कर्मचारी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर करने से पहले जांच एजेंसी को अथॉरिटी से इजाजत भी नहीं लेनी होगी।

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