देवरिया / कुशीनगर

देवरिया लोक सभा: तीन दशक से जीत दर्ज नहीं कर पाई है कांग्रेस

वेद प्रकाश दुबे
देवरिया: उत्तर प्रदेश की बिहार सीमा से सटे देवरिया संसदीय सीट पर तीन दशक से ज्यादा समय से कांग्रेस जीत दर्ज नहीं कर सकी है। कभी देश की शीर्ष राजनीति पार्टी कही जाने वाली कांग्रेस ने यहां से राज मंगल पाण्डेय के रूप में अंतिम बार 1984 में जीत दर्ज की थी। उसके बाद हुये लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को विजय प्राप्त नहीं हो सकी है।

अबकी बार कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों को उम्मीद है कि कांग्रेस की महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की चुनाव प्रभारी प्रियंका गांधी बाड्रा कांग्रेस के लिये कोई जादुई करामात कर कांग्रेस में नयी जान फूंक सकती हैं। राजनीति के जानकर बताते हैं कि प्रियंका में उनकी दादी की छवि के साथ उनके कार्य करने के तौर तरीके भी काफी मिलते जुलते दिख जा रहे हैं।

कांग्रेस ने इस बार देवरिया से नियाज अहमद को टिकट दिया है। नियाज अहमद इससे पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में थे। बसपा ने उन्हें इस बारे टिकट नहीं दिया। बसपा द्वारा टिकट ना देने पर नियाज अहमद ने पार्टी पर पैसे लेकर टिकट बेचने का आरोप लगते हुए बसपा छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया। बता दें कि नियाज अहमद ने 2014 का लोक सभा चुनाव बसपा के टिकट पर ही लड़ा था। तब वो वर्तमान सांसद भाजपा के कलराज मिश्रा से चुनाव हार कर दूसरे नंबर पर रहे थे। नियाज कलराज मिश्रा के 496500 वोटों के मुकाबले 231114 वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहे थे।

नियाज टिकट मिलने के बाद क्षेत्र में अपनी सरगर्मी बढ़ा कर जनता के बीच कांग्रेस की नीतियों का प्रचार-प्रसार अपनी उपस्थित का एहसास करा रहे हैं। अब यह देखना होगा कि क्या नियाज देवरिया सीट पर तीन दशक से चले आ रहे कांग्रेस के सूखे को खत्म कर पाते हैं या नहीं।

एक कांग्रेसी समर्थक विनोद श्रीवास्तव का मानना है कि इस बार के लोकसभा चुनाव में प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रभारी बनने से कांग्रेस में एक नयी ऊर्जा का संचार हो रहा है। उनका मानना है कि इस बार के चुनाव में कांग्रेस नयी दमखम के साथ उभर कर देवरिया सहित प्रदेश की सीटों पर विजय प्राप्त करेगी।

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