देवरिया / कुशीनगर

देवरिया लोक सभा: आसान नहीं होगा भाजपा के लिये 2019 का चुनाव

वेद प्रकाश दुबे/राकेश मिश्रा
देवरिया: 2014 लोक सभा चुनाव में पूर्वांचल सहित पुरे सूबे में जीत का परचम लहरा चुकी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए 2019 के आम चुनाव आसान नहीं होने वाले हैं। लगातर तीन उपचुनाव के हार से बैकफुट पर गयी पार्टी के लिए 2019 में देवरिया में डगर बहुत कठिन साबित होने वाली है। वर्तमान में यहाँ से पूर्व केंद्रीय मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्रा सांसद हैं।

अब अगर कयासों और अपुष्ट सूचनाओं पर विश्वास किया जाये तो पार्टी यहाँ से अगले आम चुनाव में वर्तमान सांसद कलराज मिश्र को नहीं उतारने वाली है। उनका टिकट कटने की पूरी संभावनाएं हैं। पार्टी उनके बढ़ते उम्र को ध्यान में रख किसी और को यहाँ से 2019 में उतार सकती है। हालांकि अभी यह कयास ही है और अभी पुष्टि नहीं हो सकी है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि कलराज मिश्र अपने केन्द्र सरकार में कैबिनेट मंत्रित्व के कार्यकाल में देवरिया का जैसा विकास कर सकते थे वैसा हुआ नहीं। लोगों का मानना है कि लगभग 4 वर्षों तक तो इस क्षेत्र में कोई बड़ा विकास का कार्य नहीं हुआ। हां बीते कुछ महीनों में कुछ सड़क परियोजनाओं का शिलान्यास जरूर हुआ। कलराज मिश्रा के प्रयासों से ही देवरिया में पासपोर्ट केंद्र भी खुला। जिला अस्पताल में एक सीटी स्कैन सेंटर भी खुला। इसके अतिरिक्त कलराज मिश्रा ने जिले में केंद्रीय विद्यालय की नीव भी रखी।

वैसे इन मुद्दों पर लोगों का कहना है कि कलराज मिश्रा जैसे कद्द्वार नेता के सांसद रहते यह सब कार्य बहुत मायने नहीं रखते। लोगों का मानना है कि उन्हें बहुत उम्मीद थी कि इस क्षेत्र में मंत्री रहते मध्यम और लघु उद्योग के क्षेत्र में भी देवरिया में कुछ होना चाहिए था। इसके अतिरिक्त देवरिया के इंफ्रास्ट्रक्चर में भी कोई बहुत बड़ा परिवर्तन नहीं आया है। शहर की हालत कमोबेश वैसी ही है जैसी पहले थी।

मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ के कर्म क्षेत्र गोरखपुर और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद का क्षेत्र फूलपुर उप चुनाव में पार्टी की हार ने भाजपा की घटती जनाधार को उजागर कर दिया है। उपचुनावों से यह संदेश तो साफ हो गया है कि भाजपा के खिलाफ यदि पार्टियां मिल कर लड़ें, तो उसे हराया जा सकता है और आगामी लोकसभा चुनाव के लिये समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने एक साथ मिलकर 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा को टक्कर देने के लिये कमर कस लिये हैं।

राज्य में हुये उप चुनाव के नतीजों से साफ हो गया है कि विकास और रोजगार अभी तक अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंचा है, जिसका दम भाजपा भरती रहती है। इस कारण उसे लोकसभा चुनाव में देवरिया सहित राज्य में उसे कड़ी मेहनत करनी होगी। यह बात साफ है कि भाजपा को केन्द्र में सत्ता तभी मिलेगी, जब उसे उत्तर प्रदेश में बड़ी जीत मिले। इसके लिये भाजपा के थिंक टैंक ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है और 2019 में 2014 के करिश्में को दोहराने के लिये राज्य में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी इधर राज्य में ताबड़तोड़ दौरे किये हैं और आगे भी करने की उम्मीद जताई जा रही है।

वरिष्ठ पत्रकार सुधाकर पाण्डेय का मानना है कि प्रदेश में हुये लोकसभा उप चुनाव में भाजपा की हार से यह सिद्ध होता है कि पार्टी का जनाधार कम हो रहा है।जिस तरह से उप चुनाव में भाजपा को हराने के लिये सारी पार्टियां एक साथ मिलकर जिताऊ उम्मीदवार की मदद कर चुनाव लड़ी। इससे साफ है कि सपा बसपा गठबंधन से यहां भाजपा की लड़ाई आसान नहीं होगी।

वहीँ वरिष्ठ अधिवक्ता हरिश धर द्विवेदी का कहना है कि भाजपा ने सत्ता में आने के बाद दावा किया था कि आम लोगों के दिन बदल जायेंगे।भष्ट्राचार पर लगाम लगेगा।यह कुछ तो अभी तक देखने को नहीं मिला।अलबत्ता भाजपा की केन्द्र सरकार ने खरीफ फसलों के दाम बढ़ाने का फैसला कर किसानों को लुभाने का प्रयास किया है।

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