देवरिया / कुशीनगर

कुशीनगर: बाहरी दवाई लिखने से बाज नहीं आ रहे सरकारी डॉक्टर, प्राइवेट प्रैक्टिस भी धड़ल्ले से जारी

आदित्य कुमार दीक्षित
कुशीनगर: सरकार स्वास्थ्य सम्बन्धी चाहे जितने भी अभियान चला ले, कार्यक्रम करवा ले, लेकिन इनके नीचे जो सिपहसालार बैठे हुए हैं, जब तक उनकी आदतों में सुधार नहीं आयेगा, तब तक न तो जनता को सरकार पर भरोसा होगा और न ही जनता को सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं का लाभ प्राप्त होगा। हम बात कर रहे हैं कुशीनगर जिले के जिला अस्पताल की, जहां तैनात डॉक्टरों ने जैसे अपनी आदत से बाज न आने की कसम खा ली है। उन्होंने तो जैसे यह भी ठान लिया है कि जिला अस्पताल की छवि जनता की नजर में कभी सुधरने नहीं दी जायेगी।

सरकार द्वारा सरकारी अस्पतालों पर जनता को दी जाने वाली सुविधाओं पर दलालों और कमीशनखोरों ने अपना कब्जा जमा लिया है। गरीब जनता सरकारी अस्पतालों में सस्ते और अच्छे इलाज के लिए आती है, लेकिन कुशीनगर जिले के जिला अस्पताल में तैनात डॉक्टर गरीब जनता के खून पसीने से कमाये गए पैसे को मंहगी दवाइयों में खर्च करा कर उससे मिलने वाले कमीशन से अपनी जेबें गर्म कर रहे हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल कुशीनगर में तैनात बहुत से ऐसे डॉक्टर हैं जो कि बाहर से दवाएं लिखने की अपनी आदत से बाज नहीं आ रहे लेकिन इसमें से एक वरिष्ठ चिकित्सक डॉ रमाशंकर सिंह तो जैसे बाहरी दवाईयां लिखने की कसम खा चुके हैं, चाहे मरीज कितना भी गरीब हो लेकिन कमीशनखोरी के लालच में बाहरी दवा लिखने के लिए छोटी पर्ची उनके हाथ मे ही रहती है।

बताते चलें कि कुशीनगर जिला अस्पताल में दूर दूर से यहां तक कि बिहार और नेपाल की सीमा पर रहने वाले लोग भी सस्ते और अच्छे इलाज के लिए आते हैं, लेकिन यहां आने वाले लोगों के मंसूबे पर यहां तैनात डॉक्टर जो कि अस्पताल के बाहर खुले मेडिकल स्टोरों से सांठगांठ किये हुए हैं पानी फेर देते हैं तथा उनको बाहर से खरीदने हेतु महंगी दवाओं से भरी हुई एक छोटी पर्ची थमा देते हैं। इसके बाद वह भोलेभाले मरीज जल्दी स्वस्थ होने की चाहत में जाकर बाहर से महंगी दवायें खरीदते हैं तथा उन दवाओं से निकलने वाली मोटी कमीशन इन कमीशनखोर डॉक्टरों के जेब में चली जाती है।

बात सिर्फ बाहरी दवाएं लिखने की ही नहीं है एक डॉक्टर तो यहां ऐसे हैं जो कि सरकारी अस्पताल में चिकित्सक होने के बावजूद भी सरकार के मंशा के विपरीत खुलेआम चुनौती देकर अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस को धड़ल्ले से जारी रखे हुए हैं। मिली जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल में ही तैनात डॉक्टर राजेश कुमार बीते कई सालों से इस अस्पताल में बतौर चिकित्सक तैनात हैं और वह पडरौना नगर में धड़ल्ले से अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस भी कर रहे हैं। लेकिन कोई भी रोकने टोकने वाला नहीं है।

डॉक्टर राजेश कुमार के बारे में सूत्रों के अनुसार यह भी जानकारी मिलती है कि वह सरकारी अस्पताल में आये मरीजों का इलाज वहां न करके मोटे वैसे के लालच में अपने क्लिनिक में बुलाकर इलाज करते हैं। जिला अस्पताल में इन सभी आरोपों और लापरवाही के बारे में जब हमारे संवाददाता ने मुख्य चिकित्साधीक्षक से पूछा तो उन्होंने बताया कि डॉ रमाशंकर सिंह द्वारा बाहरी दवाएं लिखने की शिकायत पहले भी मिल चुकी है, अब वो अपनी हद पार कर चुके हैं, अगर वो सोचते हैं कि वरिष्ठ होने के कारण उनके खिलाफ़ कोई कार्यवाही नहीं हो सकती तो इस भ्रम को वो अपने दिमाग से निकल दें। बहुत जल्द ही उनके खिलाफ कागजी कार्यवाही की जायेगी।

संवाददाता ने जब जिला चिकित्सालय के एक डॉक्टर द्वारा प्राइवेट प्रैक्टिस किये जाने की बात कही तो उन्होंने कहा कि इस सम्बंध में उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है और हमारे तरफ से कागजी कार्यवाही भी की जा चुकी है। अब पुलिस के ऊपर यह निर्भर करता है कि वह कब उस क्लीनिक पर छापेमारी कर उसे बन्द कराती है।

संवाददाता के अस्पताल में मौजूद दवाओं के बारे में जानकारी लेने पर उन्होंने बताया कि अस्पताल में पर्याप्त दवाएं मौजूद हैं, अगर मरीज के पर्ची पर लिखी कोई दवा नहीं मिल पा रही है, तो मरीज हमसे कार्यालय में आकर मिल सकते हैं, उसकी व्यवस्था मैं स्वयं कराऊंगा।

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