देवरिया / कुशीनगर

कुशीनगर लोकसभा सीट: प्रमुख दलों के प्रत्याशियों की घोषणा होने से गरमाया राजनीति गलियारा

मोहन राव
कुशीनगर: कुशीनगर लोकसभा सीट उत्तर प्रदेश के पूर्वी उत्तरी छोर पर बिहार सीमा से सटे है । महात्मा बुद्ध की परिनिर्वाण स्थली के वजह से इसे विश्व के पटल पर पहचाना जाता है। गांव ,गरीब, गंडक और गन्ना यहां की प्रमुख समस्या है। गन्ना की राजनीति यहां की परिणामों में बदलाव ला देती है। इस बार के लोकसभा चुनाव में तीनों प्रमुख दलों के प्रत्याशी घोषित हो गए हैं। मुकाबला त्रिकोणीय बनने के आसार हैं।

राजनीतिक पृष्ठभूमि मे देखा जाय तो कुशीनगर संसदीय सीट 2008 में नये परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया। इसके पहले यह संसदीय क्षेत्र पडरौना के नाम से जाना जाता था। लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव में कुशीनगर को संसदीय सीट का दर्जा मिल गया और इस वर्ष के चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी आरपीएन सिंह चुनाव जीते दूसरे नंबर पर बसपा प्रत्याशी स्वामी प्रसाद मौर्य, तीसरे नंबर पर भाजपा के विजय दुबे तथा चौथे नंबर पर सपा के ब्रह्मा शंकर त्रिपाठी रहे। कुशीनगर लोकसभा की पांच विधानसभा सीट रामकोला, हाटा, खड्डा, पडरौना तथा कुशीनगर आती है । वर्तमान में पांचो विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है।

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी राजेश पांडे उर्फ गुड्डू ने कांग्रेस प्रत्याशी आरपीएन सिंह को लगभग पचासी हजार मतों से पराजित किया था । वर्तमान राजनीतिक परिवेश में सभी परिस्थितियां बदल गई है कांग्रेस को छोड़कर सभी दलों में टिकट मांगने वालों की भीड़ लगी रही। पार्टियों ने टिकट का बंटवारा कर इस असमंजस को समाप्त कर दिया है । लेकिन जो टिकट की अगली लाइन में खड़े थे उनको टिकट नहीं मिला क्या गुल खिलाएंगे यह राज बना हुआ है।

भाजपा ने यहाँ से विजय दुबे को टिकट दिया है। जानकारों की माने तो भाजपा में भी टिकट की लंबी कतार थी । लेकिन योगी की कृपा से विजय दुबे को टिकट मिलना माना जा रहा है। विजय दुबे 2009 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन वह तीसरे स्थान तक ही पहुंच पाए थे। बाद में कांग्रेस में शामिल होकर 2012 के विधानसभा चुनाव में खड्डा से विधायक बने। वर्ष 2017 में विधानसभा चुनाव से पहले ही भी भाजपा में लौट गए । लेकिन पार्टी ने उन्हें कहीं से टिकट नहीं दिया भाजपा ने अपनी सीटिंग सांसद राजेश पांडे का टिकट काटकर ही विजय दुबे पर दांव लगाया है।

काग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह पर दांव लगाया है। 2009 का लोकसभा चुनाव जीतने के बाद आरपीएन केंद्र सरकार की कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों में राज्य मंत्री के पद पर रहे। लोकसभा कुशीनगर के चुनाव में राज दरबार हमेशा केंद्र में ही रहता है।

सपा -बसपा गठबंधन के तहत इस बार के चुनाव में यह सीट सपा की कोटे में गई है कुछ दिनों पूर्व सोशल मीडिया पर बालेश्वर यादव की टिकट मिलने की खूब चर्चा और बधाई का ताता लगा रहा लेकिन जल्द ही पार्टी ने टिकट सपा के वरिष्ठ नेता नथुनी कुशवाहा को दे दिया। नथुनी कुशवाहा सपा के प्रदेश सचिव भी हैं और खड्डा से विधानसभा से 2012 में चुनाव लड़े और मामूली मतों के अंतर से चुनाव हारे। गठबंधन के प्रत्याशी नथुनी कुशवाहा सपा के पुराने वफादार सिपाही हैं।

इस बार के चुनाव में स्थानीय मुद्दे गौड़ होते नजर आ रहे हैं। जोड़-तोड़ की राजनीति शुरू हो गई है। टिकटों के कतार में खड़े नेताओं के आंतरिक विद्रोह उन दलों के लिए घातक भी हो सकते हैं। फिर भी यहां मुकाबला त्रिकोणीय होने के ही आसार लग रहे हैं।

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