देवरिया / कुशीनगर

विकलांग कोच में सामान्य यात्री, तो महिला कोच में पुरुष, यह है देवरिया में कृषक का हाल

विकलांग कोच में सामान्य यात्री, तो महिला कोच में पुरुष, यह है देवरिया में कृषक का हाल

देवरिया: स्थानीय सांसद कलराज मिश्रा के कैबिनेट मंत्री रहते देवरिया एक वीआईपी क्षेत्र था। आज भी इस संसदीय सीट का अपना महत्व है। लेकिन आज कल देवो की नगरी कही जाने वाली देवरिया गलत कार्यों के कारण ही चर्चा में है। यहाँ से गुजरने वाली ट्रेनों की हालत कभी देखनी हो तो आइये देवरिया सदर रेलवे स्टेशन पर। आपको यहाँ गजब ही नजारा देखने को मिलेगा।

केंद्र सरकार के कार्यकाल को 4 साल पुरे हो चुके हैं, लेकिन रेलवे की व्यवस्था में कोई बड़ा परिवर्तन नजर नहीं आया है। यहाँ से गुजरने वाली कृषक एक्सप्रेस की हालत तो यह है कि आपको इस ट्रेन के विकलांगों के लिए बने कोच में सामान्य पैसेंजर बैठे नजर आ जायेंगे। तो वहीँ महिला डिब्बे में बड़े शान से पुरुष बैठे हुए मिल जाएंगे। ज्यादा अंदर जाने की जरुरत नहीं है। यह लोग बाहर कोच के दरवाजे पर ही खड़े मिल जाएंगे। लगेज वाले कोच में तो भेंड़ बकरियों की तरह आदमी ठुसे हुए मिल जाएंगे।

इन्हे किसी का डर भी नहीं है। डर हो भी क्यों, आखिर जिम्मेदारों की जेब भर कर ही वो उन डिब्बो में बैठे हैं जहाँ उन्हें नहीं होना चाहिए। यात्रियों के सुरक्षा का तो कोई इंतजाम नही ही है। जब महिला के लिए आरक्षित डिब्बे में पुरुष बैठेंगे तो सुरक्षा तो भगवान भरोसे ही होगी। अब ऐसे में यात्री अपने घर सही सलामत पंहुच जाए तो ईश्वर की कृपा से पंहुचेगा क्योंकि जिम्मेदार तो अपनी जेबे गर्म करवाकर मौज कर रहे होंगे।

जब हमने ट्रेन में विकलांग लोगों के लिए आरक्षित डिब्बों में सफर कर रहे कुछ सामान्य यात्रियों से इस बाबत पूछा तो उनका कहना था कि हम लोगों ने 100 से 200 रूपये देकर इस कोच में जगह पायी है, इसलिए इसमें सफर कर रहे हैं।

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