देवरिया / कुशीनगर

कुशीनगर: अधिकारियों और ग्राम प्रधानों की मिलीभगत से फागिंग का पैसा हो रहा डम्प

आदित्य कुमार दीक्षित
कुशीनगर: एक तरफ जहां सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहे हैं तो दुसरी तरफ उनके अधिकारी और जनप्रतिनिधि उनकी ही इस कोशिश को नाकाम करने में लगे हुए हैं। हम बात कर रहे हैं स्वास्थ्य विभाग और ग्राम प्रधानों की मिलीभगत से हो रहे इस खेल की जिसमें जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

जी हां आप सही सोच रहे हैं। हम बात कर रहे हैं स्वास्थ्य विभाग और प्रधानों के द्वारा गांवों में मच्छरों से बचाव के लिए कराये जाने वाले फागिंग की जो कि अधिकारियों और प्रधानों की मिलीभगत के कारण आज तक नहीं हो पाया है। मौसम के बदलते मिजाज के कारण बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ रहा है। भीषण गर्मी के नाते जिले में मच्छरों का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। लेकिन किसी भी गाँव में अभी तक फागिंग के नाम पर एक रुपया भी खर्च नहीं हो रहा।

तो यहाँ एक सवाल उठता है कि आखिर यह पैसा जा कहाँ रहा है? जिले के कुछ ग्राम प्रधानों से इस विषय पर बात की गयी तो उनका कहना था कि फागिंग का पैसा एएनएम के खाते में आता है जो कि हम लोगों से अटैच होता है। अब सोचने वाली बात यह है कि एक एएनएम जो कि स्वास्थ्य विभाग से सम्बंधित होती है अगर वही इस तरह की लापरवाही करती है तो फिर बीमारियां तो फैलनी ही है।

कुलमिला कर यह कह सकते हैं कि कुशीनगर जनपद में फागिंग का पैसा डम्प होता नजर आ रहा है। जैसे-जैसे बरसात नजदीक आता है मच्छरों का प्रकोप और भी बढ़ जाता है और फिर मलेरिया, डेंगू, टायफाइड जैसी बीमारियों घर कर लेती हैं। अस्पतालों में मरीजों और तीमारदारों की लाइन लग जाती है। आखिर लोगों की जिंदगियों के साथ कब तक खिलवाड़ होता रहेगा। अगर जिले में किसी बीमारी का प्रकोप होता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? इन लापरवाहों पर कार्यवाही क्यों नहीं हो रही ? ये सारे सवाल जनता के हैं जो जनता अपने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से पूछ रही है।

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