देवरिया / कुशीनगर

VIDEO देवरिया: सरकारी दावे हुए हवाई, खुले आसमान के नीचे पढ़ रहे हैं बच्चे

विकास द्विवेदी
देवरिया: प्रदेश सरकार परिषदीय विद्यालयों की दशा सुधारने का लाख दावा करें और कान्वेन्ट स्कूलों से टक्कर देने की बात करे लेकिन आज भी इन सरकारी स्कूलों की हकीकत कुछ और ही बयान करती है।

सरकारी विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई के लिये चयन की घोषणा के साथ सरकारी स्तर पर चयन प्रकिया भी हुई। इन सब सुधार के लिये शिक्षा और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिये विधालयो में भोजन, छात्र-छात्रों को स्कूल ड्रेस, कॉपी-किताब, जूते-मोज़े के साथ परिषदीय विद्यालयों की मरमत के नाम पर हर साल लाखों नही अरबो रुपये जनता के पैसे को पानी की तरह बहाये जाते हैं।

लेकिन इतना कुछ करने के बाद भी जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान कर रहे है जिसे देख आप अंदाजा नही लगा सकते। जनपद के बनकटा विकास खण्ड के ग्राम गाढ़ा में परिषदीय विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे पिछले 16 सालों से खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। जिले का सरकारी अमला आँखे मूंद सोता दिखाई दे रहा हैं।

जनपद के बनकटा विकास खंड के ग्राम गाढ़ा में एक ही परिसर में दो परिषदीय विद्यालय संचालित होती हैं गाढ़ा न०-1 और गाढ़ा न-2 इन दोनों पर एक-आम टीचर भी तैनात हैं। गाढ़ा न-1 में कुल 57 बच्चे पंजीकृत हैं। अध्यापक राजेश कुमार ने बताया कि सत्र में विद्यालय जर्जर था ही उसका छत 13 जुलाई 2017 में गिर गया। उसके बाद अपने जिले पर बैठे अधिकारियो को 12 बार लिखित सूचना दिया लेकिन आज तक कुछ नही हुआ। हम सभी बच्चों को एक पेड़ के नीचे पढ़ाते हैं।

गाढ़ा न०-2 की अध्यापिका उषा देवी जो 1999 से परिषदीय विद्यालय पर पोस्टेड हैं बताई की 2002 में विद्यालय का भवन गिर गया जिसकी सूचना उन्होंने सम्बंधित अधिकारियो से लिखित रूप से किया लेकिन कोई समाधान नही हुआ। कुछ दिनों तक बगल के परिषदीय विद्यालय गाढ़ा न०-01 में चला लेकिन उसकी जर्जर स्थिति को देखते हुये हम पिछले 16 वर्षों से पेड़ के नीचे हमारे बच्चे पड़ने को मजबूर है।

गाढ़ा न०-2 कागजो में चल रहा हैं,लेकिन मौके पर विद्यालय का उसमे पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 42 हैं।जो खुले आसमान में गर्मी,जड़ा, बारिस सभी मौसम को झेलते हुये अपने पढ़ाई को पूरा करते हैं। अब सवाल उठता हैं कि एक ही परिसर में दो विद्यालय। दोनों पर एक-एक हेड मास्टर जो प्राथमिक विद्यालय एक ही पास एक ही प्रांगण में सटे होने और 1 का 16 वर्षो से मौके पर कुछ भी नही गायब हैं। दूसरा बीते सत्र 13 जुलाई 2017 को गाढ़ा न०-1 का भवन जर्जर था ही छत भी गिर गया ।सूचना के बाद भी अधिकारियों ने आज तक कोई कार्यवाही नही की।

सरकारी टीचर गाढ़ा न०-1 के राजेश कुमार और गाढ़ा न०-2 के अध्यापिका उषा देवी बताया कि इन समस्याओं को उन लोगों ने दर्जनों बार सम्बंधित अधिकारियो को दिया है लेकिन आज तक कोई समाधान नही हुआ। लेकिन इसी बीच वर्ष 2007 में एक स्थानीय निवासी ने परिषदीय भूमि को लेकर आपत्ति उठाते हुए कोर्ट में जाकर स्टे ले चुका हैं। जिसके कारण कोई निर्माण नही हो सका है। लेकिन सवाल उठता है कि उन मासूम बच्चों को क्या दोष जो पढ़ने के लिए जाड़ा, गर्मी और बरसात झेलते हैं।

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