देवरिया / कुशीनगर

पडरौना विधानसभा : बाहरी बनाम स्थानीय मुद्दा हो सकता है हावी!

कुशीनगर (मोहन राव): जनपद की पडरौना विधानसभा 330 में वैसे तो चतुष्कोणीय लड़ाई दिख रही है। लेकिन जिस तरह से बाहरी बनाम स्थानीय का हवा बहाया जा रहा है उससे हो सकता है कि यह मुद्दा प्रभावशाली बने और बाहर से आए हुए प्रत्याशियों के लिए दिक्कत पैदा हो जाए।
यहां बताते चलें की भारतीय जनता पार्टी ने स्वामी प्रसाद मौर्य को, बसपा ने जावेद इकबाल, कांग्रेस-सपा गठबंधन ने शिव कुमारी देवी को और पीस पार्टी और उनकी एलायंस ने राजेंद्र यादव उर्फ मुन्ना को अपना टिकट दिया है। पीस पार्टी का यहां जिक्र करना इसलिए महत्वपूर्ण है कि 2012 के विधानसभा में की राजेंद्र यादव उर्फ मुन्ना काफी फाइट किए थे और सपा के वोटरो मे सेंधमारी भी किए थे।
बसपा छोड़कर भाजपा में आए स्वामी प्रसाद मौर्य भाजपा के टिकट से 2017 का के चुनाव मैदान में कूदे हैं। पूर्व में यह दो बार पडरौना विधानसभा से बसपा पार्टी से चुनाव जीत चुके हैं। पहली बार 2009 में जब मध्यावधि चुनाव हुआ तो स्वामी प्रसाद मौर्या बसपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष थे और पडरौना विधानसभा से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े और रिकॉर्ड तोड़ मत कुल 81039 पाये।
जानकार बताते हैं कि उस समय चुनाव में काफी धन बल का प्रयोग किया गया था। उस समय पूर्व मंत्री शाकिर अली, राजेश पांडेय उर्फ गुड्डू, कुंवरानी मोहिनी देवी जैसी दिग्गज प्रत्याशी पराजित हुए थे। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में स्वामी प्रसाद मौर्या बसपा की टिकट से पुनः विधायक बने लेकिन इस बार इन्हें दिक्कत का सामना करना पड़ा और मतों का अंतर कम हो गया।
2012 के चुनाव में श्री मौर्य को 42184 मत मिले जबकि कांग्रेस की राजेश कुमार जयसवाल 35022 मत पाकर दूसरे स्थान पर रहे इस बार के चुनाव में सब कुछ उलट-पुलट गया है स्वामी प्रसाद मौर्य बसपा छोड़ भाजपा में आ गए हैं। जबकि 2012 की चुनाव में बसपा प्रत्याशी के रूप में उनके बेतूल बोल आज भी लोगों के जेहन में बना हुआ है कभी देवी देवताओं पर कटाक्ष तो कभी जातिगत राजनीति। इस चुनाव में विरोधी, मौर्य की पुरानी बातों तथा बाहरी होने का प्रचार क्षेत्र में जोर शोर से कर रहे हैं तथा सारे हथकंडे अपना रहे हैं।
दूसरे प्रत्याशी जो बसपा के जावेद इकबाल हैं यह भी बाहरी हैं। 2012 का विधानसभा चुनाव श्री इकबाल कुशीनगर विधानसभा से लड़े थे और पराजित भी हुए। तीसरी प्रत्याशी कांग्रेस और सपा गठबंधन की शिवकुमारी देवी हैं जो वर्तमान में नगरपालिका अध्यक्ष भी हैं। इन्होंने भी राजनीतिक पड़ाव कई बार बदला वर्तमान में यह कांग्रेस की राजघराने के करीबी हैं और कांग्रेस के टिकट पर पडरौना विधानसभा से किस्मत आजमा रही है। शिवकुमारी देवी के समर्थक घूम-घूमकर स्थानीय होने का ढिंढोरा भी पीट रहे हैं।
जबकि चौथे प्रत्याशी राजेंद्र यादव उर्फ मुन्ना है जो वर्तमान में पीस पार्टी और उनके एलायंस के संयुक्त प्रत्याशी है। मुन्ना यादव की क्षेत्र में अच्छी पकड़ है जातिगत वोटों का आधार देखा जाए तो श्री यादव कई प्रत्याशियों की खेल बिगाड़ सकती हैं। पडरौना विधानसभा में निर्णायक मत ब्राह्मण मतदाताओं का हैं। वर्तमान में कोई भी प्रभावी पार्टी ब्राह्मण को टिकट नहीं दी है। ऐसे में उनका मत किधर जाएगा यह भविष्य के गर्त में छिपा है।
वैसे तो पडरौना के मतदाता सभी पार्टियों को अवसर दिए हैं। सोशलिस्ट से लेकर के कांग्रेस, भाजपा, बसपा, सपा सभी को यहां के मतदाताओं ने अवसर दिया है। अब देखना है कि 2017 का विधानसभा का ताज किसके सिर पर चढ़ता है । स्थानी मुद्दा , स्थानीय लोग प्रभावशाली होते हैं या बाहरी लोगो स्थानीय मुद्दा ।

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