देवरिया / कुशीनगर

देवरिया के सोहनाग में परशुराम मंदिर का अलग है महत्व

Parashuram-Temple-in-Deoriaदेवरिया: उत्तर भारत के प्रमुख पौराणिक स्थलों में से एक देवों की नगरी कही जानेवली देवरिया के सलेमपुर क्षेत्र स्थित परशुराम धाम सोहनाग की अलग महत्व है। यहां परशुराम ने कुछ दिनों तक रहकर तप किया था।
जानकारों के अनुसार परशुराम त्रेता युग (रामायण काल) के मुनी थे। उन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार भी कहा जाता है। भगवान परशुराम धनुष यज्ञ सम्पन्न होने के बाद जनकपुर से लौटते समय यहां पर विश्राम किये और कुछ दिनों तक यहीं पर तप किये। आज भी इस स्थान पर अक्षय तृतीया के दिन पूजन के बाद भब्य मेले का आयोजन होता है।
सवा माह तक लगने वाले इस मेले में उत्तर प्रदेश, बिहार सहित पड़ोसी राष्ट्र नेपाल के दुकानदार आकर अपनी दुकाने सजाते हैं।
जानकारों के अनुसार यह स्थान पहले घना जंगल था। जनकपुर में शंकर धनुष टूटने की जानकारी मिलने पर भगवान परशुराम आकाश मार्ग से जनकपुर पहंचे थे तथा वापस लौटते समय यहा विश्राम के दौरान इस स्थान की रमणियकता को देखकर तप किया था। इस मंदिर का निर्माण राजा सोहन ने कराया था।जिनके नाम पर इस स्थान नाम सोहनाग पड़ा है।
सोहनाग के परशुराम मंदिर के पूरब दस एकड़ का पवित्र सरोवर है। जिसकी महत्ता धार्मिकता के साथ वैज्ञानिक भी है। कहा जाता है कि कयी सौ बर्ष पूर्व नेपाल के राजा सोहन तीर्थाटन के लिये निकले थे और सरोवर देखकर रात्रि में विश्राम के लिये रूक गये थे। इस सरोवर के पानी का उपयोग करने से उनका कुष्ठ रोग समाप्त हो गया। तब से मान्यता है कि जो भी ब्यक्ति इस सरोवर के पानी से स्नान करता है उसका कुष्ठ रोग ठीक हो जाता है।
आज यहां भगवान की भव्य प्रतिमा विराजमान है तथा भक्त यहां आकर पूजा आराधना करते है।
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