देवरिया / कुशीनगर

कुशीनगर: गुड़ के मिठास मे छिपा है किसानों का दर्द

jaggery-making-in-kushinagaकुशीनगर (मोहन राव): पूर्वांचल का चीनी का कटोरा कहे जाने वाले जिले मे किसानों की समस्याओ का समाधान नही हो रहा है। राज्य और केंद्र सरकार एक दूसरे के पाले मे गेंद फेंककर समस्याओं से पल्ला झाड़ रहें हैं। यहां गन्ने की उत्पादन अधिक तथा चीनी बनाने वाले कारखाने कम होने के वजह से किसान अपने उत्पाद को औने-पौने दाम पर क्रेशरों (गुड़ बनाने का प्लांट) को देने को मजबूर है।
jaggery-making-3जनपद के सुकरौली, बतरौली, मिश्रौली, बसहिया जैसे जगहों पर पर दर्जनों गुड़ बनाने के प्लांट लगे है। इन प्लांटो के लिए सरकार की कोई स्पष्ट नीति नही है। वर्तमान मे राज्य सरकार द्वारा गन्ने का दाम प्रति कुंतल 315 रूपए निर्धारित किया गया है। वही क्रेशर मालिक गुड़ बनाने हेतु गन्ने को 150 से लेकर 190 रूपए प्रति क्विंटल खरीदते है।
jaggery-makingअब गुड़ खाने वालों को क्या पता है कि इस मिठास के पीछे किसान का कितना दर्द छिपा है!
यहां बताते चलें कि जनपद मे गुड़ बनाने वाले क्रेशर अक्टूबर माह के अंत मे ही गन्ना पेराई शुरू कर देते है। प्रतिदिन बिकवाली के हिसाब से गन्ने का प्रति क्विंटल दाम तय किया जाता है। उनके द्वारा दिये जा रहे गन्ना मूल्य पर सरकार नियंत्रण नही होता है। किसानों द्वारा क्रेशर पर गन्ने बेचने के कई कारण
है।
jaggery-making-1गन्ना किसानों की आर्थिक स्थिति अच्छी नही होने से नकद कम ही दाम पाकर गन्ने को क्रेशरों को बेचतें हैं। दूसरा कारण यह है कि गन्ना किसान नवम्बर माह मे पेड़ी गन्ना खाली कर उस खेत मे गेंहू की बुआई करता है। सुगर मिल समय से न चलने के कारण गेंहू बोने वाला खेत खाली नही हो पाता है। तब किसान क्रेशरों की तरफ रुख करता है और अपना गन्ना औने-पौने दाम पर देकर आगे की फसल गेंहू हेतु खेत तैयार करता है।
jaggery-making-2जागरूक किसान बताते है कि गन्ने की प्रति कुंतल पैदावार पर लगभग 300 रूपये लागत आती है। उससे कम पर बेचने पर किसान को कम पर बेचने पर किसान को काफी नुकसान होता है। इस सम्बंध में किसान नेता व पूर्व विधायक मदन गोविंद राव का कहना है कि जब तक राज्य और केंद्र सरकार मिलकर सामुहिक रूप से प्रयास नही करेंगी तब तक गन्ना किसानों का भला होने वाला नही है।

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