देवरिया / कुशीनगर

जल्द हो सकता है तुर्कपट्टी स्थित सूर्य मंदिर का विकास

Social-leader-meets-Mahesh-कुशीनगर: महात्मा बुध के परिनिर्वाण स्थल के लोगों के लिए एक खुशखबरी है। जिले के सामाजिक कार्यकर्ता हरिन्द्र किशोर तिवारी ने कभी प्रसिद्द रहे और अब लगभग भुला दिए गए तुर्कपट्टी स्थित सूर्य मंदिर को देश के टूरिज्म मैप पर एक बार फिर लाने का बीड़ा उठाया है। इस सम्बन्ध में श्री तिवारी ने केंद्रीय पर्यटन मंत्री महेश शर्मा से नई दिल्ली में बीते 24 अगस्त को मुलाकात कर एक ज्ञापन भी सौंपा।
फाइनल रिपोर्ट को प्राप्त ज्ञापन की एक कॉपी के अनुसार श्री तिवारी ने केंद्रीय मंत्री से इस मंदिर के कायाकल्प करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा की पर्यटन के लिहाज़ से महत्वपूर्ण तुर्कपट्टी का सूर्य मंदिर आज पूरी तरह से प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है।
प्राथमिक शिक्षक संघ, कुशीनगर के पूर्व जिलाध्यक्ष  श्री तिवारी ने बताया की गुप्तकालीन नीलमणि पत्थर वाली यह भगवन सूर्य की मूर्ति उत्तर भारत में इकलौती है। उनका कहना था की इसका विस्तार, विकास और सुरक्षा अति महत्वपूर्ण है।
गौरतलब है की तुर्कपट्टी महात्मा बुध के परिनिर्वाण स्थल कुशीनगर से 17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। एक प्रचलित मान्यता के अनुसार तुर्कपट्टी महुंवा गांव के रहने वाले एक किसान को रात में स्वप्न में दिखा की जिस जगह वो सोया हुआ है उसके नीचे भगवान् सूर्य की मूर्ति है। किसान ने यह बात गांव के अन्य लोगो को बताई।
उसी दौरान 31 जुलाई, 1981 को सूर्यग्रहण लगा था। उसी दिन गांव वालों ने किसान के बताये गए स्थान पर खुदाई शुरू की। खुदाई में यहाँ दो प्रतिमाएं मिली। उनमे से एक बलुए पत्थर की मूर्ति थी और दूसरी नीलमणि पत्थर की। पुरातत्वविदों ने इसे गुप्तकाल का बताया था।
जिले के ग्राम पिपरा तिवारी निवासी हरिन्द्र तिवारी ने बताया की तुर्कपट्टी में मिली सूर्य की मूर्ति अदभुत है। पुराणों में जो सूर्य के लक्षण बताये गएँ हैं, वो इस मूर्ति में दिखतें हैं। उन्होंने बताया की यहाँ पहली बार 1985 में सूर्य महोत्सव का आयोजन किया गया था। देश-विदेश से यहाँ पर्यटक आते थे। लेकिन 1992 से सूर्य महोत्सव बंद हो जाने के बाद यह सूर्य मंदिर पूरी तरह से उपेक्षा का शिकार हो गया।
यही नहीं 24 अप्रैल, 1998 की रात नीलमणि पत्थर की मूर्ति चोरी हो गयी। हलाकि काफी प्रयास के बाद पुलिस ने मूर्ति को तो बरामद कर लिया लेकिन आज तक वहां सुरक्षा की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गयी है।
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