देवरिया / कुशीनगर

देवरिया: SC-ST एक्ट पर सवर्णों का विरोध कहीं 2019 में डुबो ना दे भाजपा की लुटिया

वेद प्रकाश दुबे/राकेश मिश्रा  
देवरिया: केंद्र सरकार द्वारा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन जाति (एससी-एसटी) कानून में किये गए संशोधन का विरोध लगातार बढ़ता ही जा रहा है। सवर्ण समाज के विभिन्न संगठनों ने 6 सितम्बर को इस एक्ट में विरोध में भारत बंद का आह्वान कर यह दर्शा दिया था कि अगर उनकी बाते नहीं सुनी गयी तो आने वाले समय में वो भाजपा को सबक सीखाने को पूरी तरह से तैयार हैं।

समूचे देश में खास कर उत्तरी भारत के क्षेत्रों में इस एक्ट का जबरदस्त विरोध हो रहा है। देवरिया भी इस मामले में पीछे नहीं है। वैसे भी इस लोक सभा सीट पर सवर्णों ख़ास कर ब्राह्मणों की अच्छी खासी संख्या है। उनको नाराज कर कोई भी पार्टी यहाँ जीत तो दूर इस बारे में सोच भी नहीं सकती। वो देवरिया ही था जहाँ के युवाओं ने केंद्र सरकार द्वारा संशोधन लाने के ठीक बाद अपना सर मुंडवा कर जबरदस्त विरोध प्रकट किया था।

इस कानून में संशोधन से पूरे देश के अगड़ी जाति के लोग नाराज हैं और इसका विरोध कर रहे हैं। कहा तो यहां तक जा रहा है कि देश और प्रदेश में तमाम सांसदों को अपने क्षेत्रों में निकलना मुश्किल होता जा रहा है। उन्हें विरोध का सामना करना पड़ रहा है। जमीन पर विरोध का स्वरुप भले अभी तक बहुत तीखा ना हो पाया हो लेकिन सोशल मीडिया पर तो हालत बहुत ख़राब है। लोग लगातार इस एक्ट का विरोध कर अगले चुनाव में NOTA पर मुहर लगाने की बता कर रहे हैं।

पिछले दिनों भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और स्थानीय सांसद कलराज मिश्र ने इस कानून में संशोधन के खिलाफ अपनी असहमती जताकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि इस कानून में संशोधन करने से सवर्ण जाति के लोग नाराज हैं तथा इसका दुरूपयोग भी हो सकता है।

एससी-एसटी कानून में संशोधन के विरोध में जहां पूरे देश में विरोध के स्वर सुनाई पड़ रहे हैं, वहीं लोकसभा चुनाव में राजनैतिक पार्टियों की सत्ता के द्वार की दशा और दिशा तय करने वाले राज्य जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान आदि राज्यों में इस कानून में संशोधन का भारी विरोध देखने को मिला है। इन राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं और वहां की जनता ने इस कानून में संशोधन के खिलाफ विरोध करके जता दिया है कि आगामी लोकसभा चुनाव 2019 यहां भाजपा के लिये रास्ते ठीक नहीं हो सकते हैं।

देवरिया में पेशे से अधिवक्ता सुनील श्रीवास्तव का कहना है कि एससी-एसटी अधिनियम में संशोधन से इसका दुरूपयोग होगा, इसे नकारा नहीं जा सकता। भाजपा को सवर्णों के साथ अन्य जातियों का भरपूर मत पिछले चुनाव में मिला था। लेकिन यह पार्टी अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति को रिझाने के चक्कर में एक्ट में संशोधन कराकर अपनी 2019 की चुनावी वैतरणी पार करने के लिये एक गन्दा खेल, खेल रही है।

वहीँ स्थानीय निवासी गृहणी कालिन्दी दुबे का मानना है कि एक्ट में संशोधन कर भाजपा 2019 के चुनाव में एससी-एसटी का वोट पक्का मान कर चल रही है। लेकिन सच्चाई तो यह है कि इस कानून में संशोधन से सवर्णों का भाजपा से मोह भंग होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ते जा रहे हैं। पांच साल बीतने जा रहे हैं। लेकिन भाजपा जो वादा देश की जनता से कर सत्ता में आई है, उन पर अभी तक पूरी तरह से खरी नहीं उतर पायी है।

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