देवरिया / कुशीनगर

विधान सभा चुनाव 2017: फाजिलनगर में किस पर भाजपा लगाएगी दांव!

कुशीनगर (विजेंद्र दुबे): जनपद का फाजिलनगर विधान सभा क्षेत्र उत्तर प्रदेश के सबसे पूर्वी छोर पर स्थित है जो कि बिहार का सीमावर्ती क्षेत्र भी है। अगर हम बात करें विकास की तो इस मामले में यह क्षेत्र आज सबसे पिछड़ा क्षेत्र है। आज भी यहाँ गाँव में बहुतायत लोग खुले मे शौच करने को मजबूर है। अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थली कुशीनगर के समीप होने के बावजूद भी यह क्षेत्र केंद्र सरकार के स्वच्छता अभियान से अभी भी अनछुआ है।
खैर अभी हमने बात विकास की नहीं करनी है। क्योंकि विकास हो या न हो हर पांच साल पर और कभी कभी उससे पहले भी नेतागण हमारे दरवाजे पर वोट माँगने आतें हैं और हर बार हम उम्मीदों का दामन थाम जाड़ा, गर्मी और बरसात झेलते हुए लाइन में लोग कर अपना जनप्रतिनिधि चुनते हैं। विकास हो न हो जन प्रतिनिधि तो इस इस बार भी चुना जायेगा।
प्रदेश के अन्य विधान सभाओं की तरह यहाँ भी लड़ाई त्रिकोणीय हो सकती है। मुख्य खिलाडी भाजपा, सपा और बसपा हैं। अगर हम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बात करें तो हर जगह की तरह यहाँ भी कई दावेदार हैं। मुख्यतः वर्तमान विधायक गंगा सिंह कुशवाहा, रामाशिष राय, नंदकिशोर तिवारी, बैरिस्टर जायसवाल, राधेश्याम पाण्डेय, सीए ओ पी मिश्रा, नथुनी सिंह कुशवाहा, सतीष मणि बीजेपी से टिकट पाने की होड़ में लगें हैं।
वैसे तो क्षेत्र की आतंरिक रिपोर्ट हाई कमान को जा चुकी है और अगले कुछ दिनों में प्रत्याशी भी तय हो जायेगा लेकिन अगर हम जमीन पर किये गए कार्यों की बात करें तो प्रदेश में सपा सरकार होने पर भी भाजपा विधायक गंगा सिंह कुशवाहा ने जो काम इस क्षेत्र में किया उससे लोगो की उम्मीदें कुछ बढ़ी है। श्री कुशवाहा ने कुछ गांवो में विद्युतीकरण, इण्टरलाकिंग तथा खड़ंजा का काम कराया है। कुशवाहा की छवि काफ़ी मिलनसार है लेकिन कुछ युवा वर्ग इनकी ढ़लती उम्र के वजह से किसी युवा चेहरे को सामने लाए जाने की अपेक्षा कर रहे है।
अगर हम रामाशीष राय की बात करें तो ये पहले भाजपा फिर कांग्रेस और अब एक बार फिर भाजपा के लिए प्रयत्नशील है। श्री राय एक कुशल वक्ता के रुप में अपनी छाप छोड़ चुके हैं। नंदकिशोर क्षेत्र के काफी अनुभवी नेताओं में से एक हैं। वहीँ बैरिस्टर जायसवाल को क्षेत्र के कुछ लोग कुछ सवर्ण विरोधी बताते हैं और सैयद यही बात इनके विपरीत जा सकती है।
अब आते हैं ओपी मिश्रा पर तो पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट होने के नाते क्षेत्र में इनको सम्मान की दृष्टि से देखा जा सकता है। वहीँ सतीष मणि नया चेहरा तो हैं लेकिन बीते दिनों इनकी छवि इस क्षेत्र में निखरी है।
अब आगे यह देखना दिलचस्प होगा की भाजपा किस चेहरे पर अपना दांव लगाती है और क्या वो चेहरा भाजपा को जीत के रूप में उपहार दे पता है या नहीं!

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