देवरिया / कुशीनगर

दुदही, फाजिलनगर बना नगरपंचायत लेकिन पडरौना नगरपालिका का विस्तार क्यों नहीं!

आदित्य कुमार दीक्षित
कुशीनगर: लाख कोशिशों के बावजूद भी जिले के सबसे पुरानी नगरपालिका पडरौना का आखिरकार विस्तार क्यों नहीं हो रहा है? इस नगरपालिका के विस्तार के लिए आसपास के ग्रामीण तथा सम्भावित नगरपालिका निवासियों ने सड़क से संसद तक कि लड़ाई लड़ी।मुकदमा झेला। लेकिन उसके बावजूद भी अभी तक इस फ़ाइल पर कोई सुनवाई नहीं हुई है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कुछ माह पहले जब इस नगरपालिका के विस्तार के लिए लड़ाई लड़ी जा रही थी तो इसका विरोध करने वाले लोग वर्तमान नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना तक अपनी पैरवी लेकर गए थे। जिससे कि विस्तार पर रोक लगाई जा सके। लेकिन वहां से इन विरोधियों को निराशा हाथ लगी।

विशेष सुत्रों के अनुसार इस नगरपालिका विस्तार को रुकवाने में सबसे बड़ा हाथ यहां के सत्ताधारियों का रहा है। जिनके साथ मिलकर कुछ ग्राम प्रधानों ने इस कार्य को अंजाम दिया। जिस वक्त इस नगरपालिका विस्तार की लड़ाई लड़ी जा रही थी उस समय के तत्कालीन जिलाधिकारी आंद्रा वामसी ने इस मामले में आन्दोलनकारियों को भरपूर सहयोग देने का वादा किया था। लेकिन सत्ता पक्ष के दबाव में आकर वह भी चुप हो गये और पडरौना नगरपालिका विस्तार का मामला ठन्डे बस्ते में चला गया।

यहां एक बात और बताते चलें कि पडरौना के बाद बनी नगरपालिका कसया और हाटा का विस्तार पूर्व की सरकार द्वारा कर दिया गया और वर्तमान में हाटा नगरपालिका को जिले की सबसे बड़ी नगरपालिका का दर्जा भी प्राप्त हो गया है। लेकिन एक समय मे जिले की सबसे बड़ी नगरपालिका रही पडरौना का स्थान जनपद में अब वर्तमान समय में तीसरे नम्बर पर हो गया है।

यह तो बात रही पहले से घोषित नगरपालिकाओं की। जिनका विस्तार हुआ। अब बात करते हैं वर्तमान में नई घोषित नगरपंचायत दुदही और फाजिलनगर क्षेत्र की। जिन्हे अभी कुछ दिन पहले ही नगरपंचायत घोषित किया गया है।

अब सवाल यह उठता है कि सबसे पुरानी नगरपालिका पडरौना जिसका विस्तार अभी तक हो जाना चाहिये था। उसका विस्तार न कराकर उसके बाद के नगरपंचायतों को विस्तारित कर नगरपालिका का दर्जा दे दिया गया। इसके बाद दुदही और फाजिलनगर को नगरपंचायत घोषित कर दिया गया। लेकिन जिले की सबसे पुरानी और एक समय मे सबसे बड़ी नगरपालिका रही पडरौना नगरपालिका की उपेक्षा आखिर क्यों हो रही है?

डीएम एस वी एस रंगाराव ने की थी विस्तार की पहली पहल

आठ वर्ष पूर्व साल 2010 में तत्कालीन डीएम एसवीएस रंगाराव ने 29 मार्च 2010 को पडरौना नगरपालिका की सीमा विस्तार के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था। जिसमें नगर के समीपवर्ती 18 गांवों को नपा की सीमा में शामिल किया जाना है।

सत्तापक्ष ही बन रहा नगरपालिका विस्तार में रोड़ा

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पडरौना नगरपालिका के विस्तार में रुकावट कुछ सत्ताधारी ही बन रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि सत्तापक्ष को इस विस्तार की रुकावट करने से क्या लाभ हो सकता है। चुनाव नजदीक है अगर इस नगरपालिका का विस्तार नहीं होता है तो सूत्रों के मुताबिक सत्ता पक्ष को काफी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। विस्तार से सम्बंधित यहां एक बात और बात बता दें कि नगरपालिका विस्तार संघर्ष के मद्देनजर जानकारी में सूत्रों के मुताबिक सर्वदलीय धरना प्रदर्शन कई दिनों तक चला था। धरना को खत्म कराने और धरने से सम्बंधित मांग को तत्कालीन एसडीएम ने जेडीयू के जिलाध्यक्ष को जूस पिलाकर धरना स्थगित कराया था। लेकिन धरना खत्म होते ही सत्तापक्ष के सह पर फाइल को दबा दिया गया और फिर नगरपालिका विस्तार ठन्डे बस्ते में चला गया।

विशेष सचिव नगर विकास द्वारा जांच को भेजी गयी थी टीम

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक तत्कालीन डीएम आंद्रा वामसी के कार्यकाल में नगर विकास के विशेष सचिव द्वारा टीम भेजकर पडरौना नगरपालिका विस्तार से सम्बंधित जांच कर आख्या भी मांगी गयी थी। लेकिन सत्तापक्ष के जिलाध्यक्ष और कुछ सत्ताधारियों द्वारा तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा आख्या देने पर रोक लगवा दिया गया। जिससे आसपास के ग्रामीणों की नगरपालिका विस्तार की आस एक बार फिर धरी रह गयी।

सीमा विस्तार में इन गांवों को किया जाना है शामिल

नगरपालिका पडरौना की सीमा विस्तार करने के लिए समीपवर्ती गांवों जंगल विशुनपुरा, जंगल बकुलहां, भरवलिया, जंगल बेलवा, जंगल अमवा, नोनियापट्टी, सोहरौना, बंधू छपरा भाग-एक व दो, अहिरौली बुजुर्ग, बेलवा मिश्र, बलुचहां, भिस्वा सरकारी, मोती छपरा, दमवतिया, मिल्की, सेवक छपरा व परसौनी कला आदि राजस्व गांवों को शामिल करने के लिए तत्कालीन डीएम एस वी एस रंगाराव ने साल 2010 में शासन को प्रस्ताव भेजा था।

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