घिवहां के बउरहवा बाबा की महिमा अपार, सावन में हजारों कांवरिये करते हैं जलाभिषेक

महराजगंज: जनपद मुख्यालय से 22 किलोमीटर दूर घुघली सिसवा-मार्ग पर स्थित घिवहां उर्फ हरपुर पकडी ग्राम में बउरहवा बाबा मन्दिर श्रद्धालुओं के आस्था का केन्द्र है। इस प्राचीन शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि भगवान शिव इसी स्थान पर बउरहवा रूप धारण किये थे। यहीं शिवलिंग का प्रादुर्भाव हुआ है।

चार खण्डों में स्थापित इस मन्दिर में धरती से प्रकट बउरहवा बाबा शिवलिंग, दूसरे खण्ड पर विष्णु-लक्ष्मी, तीसरे खण्ड पर मां जगदम्बा तथा 70 फुट उंची आकाशीय खण्ड पर महादेव शिव की प्रतिमा मन्दिर के आकर्षण हैं।

जनश्रुतियों के अनुसार वर्षों पूर्व एक घी के व्यापारी घृतवाह को संतान के लिए बउरहवा बाबा का स्वप्न में दर्शन हुए। इस पर घृतवाह ने घिवहां में जमीन से निकले शिवलिंग की खोजकर कई दिनों तक भगवान शिव का पूजा-अर्चना किया। इसके उपरान्त घृतवाह को भगवान शिव का दर्शन हुआ। साथ ही शिव ने उसे पुत्रवान बनने का आर्शीवाद दिया। शिव की कृपा से व्यापारी को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।

दूसरी जनश्रुति के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती काशीनगरी से हिमालय की ओर जा रहे थे। रास्ते में इसी स्थान पर माता उमा के आग्रह पर भगवान शिव ने बउरहवा रूप धारण किया था। तभी से इस स्थान का नाम बउरहवा बाबा पड़ गया। यह आज भी सिद्ध स्थान के रूप में जाना जाता है। यहां प्रत्येक वर्ष श्रावण मास में हजारों की संख्या में कांवरिये बाबा का जलाभिषेक करते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से बउरहवा बाबा को बेलपत्र चढाकर 108 बार जलाभिषेक करता है, बउरहवा बाबा उसकी मनोकामना जरूर पूरी करते हैं।

सर्पों का बसेरा लेकिन किसी को नहीं डंसते सांप

बउरहवा बाबा मन्दिर से कई प्रसंग जुडे हैं। बताते हैं कि गुजरे जमाने में एक निषाद का पुत्र मन्दिर के पास सर्प के बिल में लकडी कुरेदने लगा। तभी उस बिल से निकले सर्प ने उसे डंस लिया। उसके बाद मृत बालक का पिता बउरहवा बाबा के शिवलिंग पर अपना माथा पटक कर विलाप करने लगा। कुछ देर बाद एक साधू वेष धारी महात्मा प्रकट हुये। उन्होंने उसके पुत्र को जीवित करते हुए उपदेश दिया कि किसी को अकारण नहीं छेडना चाहिए। महात्मा ने कहा कि यहां किसी को आज के बाद सांप नहीं काटेंगे। तब से आज तक यहां किसी को सर्पों ने नहीं डंसा है।