प्राचीन पौराणिक एवं ऐतिहासिक परम्परा का स्मरण कराता है ‘धनतेरस’

image-for-representation-1गोरखपुर: भारत की प्राचीन पौराणिक एवं ऐतिहासिक परम्परा का स्मरण कराता है ‘धनतेरस’। देवासुर संग्राम में कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (धनतेरस) के दिन ही भगवान धन्वतरि का अवतरण हुआ था। यह तिथि देवताओं के वैद्य धन्वतरि की जयन्ती के रूप में भी विख्यात है। धनतेरस का दिन सनातन हिन्दू धर्म के परिवारों के लिये घर में नये-नये सामानों को क्रय करने की शुभ तिथि के रूप में मान्यता है तथा श्री लक्ष्मी मॉ का वास होता है।

देवासुर संग्राम में समुन्द्र मंथन के फलस्वरूप निकले 14 रत्नों में अमृत कलश लेकर भगवान धनवन्तरि जी का अवतरण हुआ। यह अमृत कलश स्वास्थ्य और निरोगता का प्रतीक है। भारत की प्राचीन आयुर्वेद पद्धति में धनवन्तरि शब्द शल्य चिकित्सा के लिए विख्यात है।

धन्वतरि जयन्ती के अवसर पर दिनांक 28अक्टूबर, दिन शुक्रवार को पूर्वाह्न 9.30 बजे महन्त दिग्विजयनाथ आयुर्वेद चिकित्सालय मेें पूजन एवं संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया है। ‘धनतेरस’ तथा ‘धनवन्तरि जयन्ती’ पर सभी भक्तों, श्रद्धालुजनों को मंगलमय शुभकामनायें।

Martia Jewels
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