सिद्धार्थनगर: जिला अस्पताल में नही बैठ रहे डाक्टर कैसे हो मरीजों का इलाज

सिद्धार्थनगर: बदलते मौसम के चलते जिला अस्पताल में मरीजों की तादाद निरंतर बढ़ती जा रही है। जहां प्रतिदिन मरीजों की संख्या 520 से 700 रहती थी, अब यह संख्या एक हजार का अंक पार कर गई है। इसके बावजूद जिला अस्पताल में डाक्टरों के न बैठने और मनमानी करने के कारण मरीजों को इलाज मुहैया नहीं हो रहा है। ऐसे में निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर होना पड़ रहा है।

जिला अस्पताल की साफ-सफाई व सुविधा को देखते हुए केन्द्र व प्रदेश सरकार तमाम पैकेज भी उपलब्ध करवाती रहती है समय समय पर जिसका उपयोग अस्पताल को और सुसज्जित करने और मरीजों को सुविधाएं मुहैया कराने के लिये होना है, लेकिन इसके बावजूद यहां मरीजों को इलाज मुहैया नहीं हो रहा है।

अस्पताल में दवाओं का आभाव है। रैबीज के इंजेक्शन सहित खांसी, दर्द जैसी बीमारियों के लिये सभी आवश्यक दवाएं उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं, चिकित्सकों का अस्पताल में मनमाने तरीके से न बैठना बहुत बड़ी कमी है।जब चिकित्सक मौजूद होये हैं तो मरीजों को बाजार की दवाएं लिखते हैं अथवा उन्हें रेफर कर अपनी जिम्मेदारी से किनारा कर लेते हैं। मरीजों की तादाद बढने से मनमाने चिकित्सक उनका न तो इलाज कर पा रहे हैं और न ही संतुष्टि दे पा रहे हैं।

आज फाइनल रिपोर्ट जिला अस्पताल सिद्धार्थनगर पहुंची। जहां प्रशासन मस्त और मरीज पस्त का नजारा देखने को मिला। दिन के 12 बजे अधिकतर चिकिसक अस्पताल में मौजूद नही मिले। जब हमने एक कर्मचारी से बात किया तो नाम न छापने की शर्त पर उसने बताया कि कुछ नही बदला है सब जस का तस है हर कोई अपनी मर्जी का मालिक है। यदि कोई मरीज इन सबका विरोध करता है तो सिरि स्टाफ मिलकर उसे पीट देता है असली गुंडाराज तो यहां चल रहा है जिसकी किसी को कोई फिक्र नही।

Martia Jewels
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