छोटी काशी के नाम से जाना जाता है रुद्रपुर का दुग्धेश्वर नाथ मंदिर

देवरिया: सावन के महीने में जो भक्त बाबा बैद्यनाथ धाम नही जा पाते है उनके लिए देवरिया के रुद्रपुर स्थित बाबा दुग्धेश्वरनाथ मन्दिर ही दर्शन और जलाभिषेक के लिए उपयुक्त है। गोरखपुर मण्डल के देवरिया जिला मुख्यालय से 30 किलो मीटर की दूरी पर ऐतिहासिक दुग्धेश्वर नाथ मंदिर शिव भक्तों के लिए खास महत्व रखता है। इस जगह को छोटी काशी के नाम से भी जाना जाता है।

मान्यताओं के अनुसार दुग्धेश्वर नाथ मंदिर में द्वादश शिवलिंगों का उपलिंग है। इस क्षेत्र को छोटी काशी के रूप में भी जाना जाता है। इस मंदिर का प्राचीनतम इतिहास है। यहां श्रावण मास, अधिक मास और महाशिवरात्रि के पर्व पर प्रदेश से ही नहीं पड़ोसी नेपाल और आस-पास के राज्यों से भक्त बाबा की पूजा अर्चना के लिए आते हैं।

किवदंतियों के अनुसार यह स्थान सैंकड़ों वर्ष पूर्व घना जंगल था। इसा से लगभग 332 वर्ष पूर्व महाराजा दीर्घवाह के पुत्र ब्रजभान अपने कुछ सैनिकों के साथ अयोध्या से पूरब की ओर चल पड़े और रूद्रपुर पहुंचे।राजा ब्रजभान अपने सैनिकों के साथ जंगल में रहने लगे। राजा के सैनिकों ने देखा कि एक गाय ब्रह्म मुहुर्त में आकर टीले पर खड़ी हो जाती थी और उसके थनों से स्वत: दूध की धारा गिरने लगती थी।

यह बात राजा तक पहुंची और उन्होंने उस स्थान की खुदाई करानी शुरू की। खुदाई के बाद 10 फीट नीचे देखा गया तो, वहां एक शिवलिंग मिला। लेकिन, जैसे-जैसे शिवलिंग को निकालने के लिये खुदाई होती गई, वह नीचे खिसकता रहा। बाद में बाबा ने स्वप्न में राजा को आदेश दिया कि वहां मंदिर का निर्माण कराओ। इसके बाद राजा ने काशी के पंडितों को बुलाकर वहां एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया। जिसे दुग्धेश्वर नाथ के नाम से जाना जाता है।

इस मंदिर के पुजारी का दावा है कि धरातल से नीचे सोमनाथ के अलावा कहीं अन्य ऐसा शिवलिंग नहीं है। यहां के शिवलिंग को महाकालेश्वर द्वादश ज्योतिर्लिंगों का उपलिंग माना गया है।