देवरिया में जिला प्रशासन की लापरवाही से इंसेफेलाइटिस फैलने का खतरा

देवरिया: पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस बीमारी के डेंजर जोन में शामिल देवरिया में जिला प्रशासन की लापरवाही से इंसेफेलाइटिस बीमारी के फैलने का खतरा बढ़ गया है।

गौरतलब है कि इंसेफेलाइटिस बीमारी के वाहक माने जाने वाले सुअर शहर के मुहल्लों व सड़कों पर घुमते नजर आ रहे हैं। आबादी के बीच सुअरों की चहलकदमी से यहां बीमारी फैलने की आशंका बढ़ जा रही है। यह जिला इंसेफेलाइटिस बीमारी को लेकर काफी संवेदनशील माना जाता है तथा हर साल सैकड़ों मासूम और लोग इस बीमारी के चपेट में आते रहते हैं। इस बीमारी से बहुत से मासूमोँ को असमय ही अपनी जान गवानी पड़ती है। लेकिन इसके बाद भी यहां का प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस बीमारी के मुख्य वाहक सुअरों को घनी आबादी से दूर करने में अभी तक नाकाम साबित हुआ है।

अपर मुख्य सचिव अरूण कुमार सिंह ने 18 मई को देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर, महराजगंज समेत प्रदेश के करीब तीन दर्जन जिलों के नगर आयुक्त/अधिशासी अधिकारी को पत्र भेजकर शहर में आबादी के बीच में चल रहे सुअर बाड़ों को हटाने व कार्रवाई से अवगत कराने का निर्देश दिया है। लेकिन इसके बाद भी यहां सुअर घनी आबादी के बीच में बिचरड़ करते दिख रहे हैं। यह सबसे बिकट स्थित जिला अस्पताल परिसर की है। जहां सुअर परिसर में बिचरड़ करते आराम से देखे जा सकते हैं।

इस बीमारी के रोकथाम तथा बचाव के लिये सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जहां विशेष पहल कर टीकाकरण अभियान की शुरुआत कुशीनगर से कर मासूमों को बचाने के लिये पहल किया है। वहीं जिला प्रशासन की लापरवाही इस जंग से लड़ने में बाधक हो सकती है।

इस सम्बन्ध में नगर पालिका अध्यक्ष अलका सिंह ने कहा कि शहर में चलने वालों सुअर बाड़ों को हटाने के लिये उनके संचालकों नोटिस दिया गया है और तय सीमा तक ये संचालक अपने सुअर बाड़े घनी आबादी से दूर नहीं ले जाते है तो उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जायेगी।