कुशीनगर: चुनाव परिणाम बदलने में किसानों की रही अहम भूमिका

Women sow paddy in a field at Pawara, about 63 kilometers (39 miles) south of Allahabad, India, Friday, Aug. 12, 2005. Monsoon rains flooded farmland, destroying crops and homes of impoverished farm laborers across the country. (AP Photo /Rajesh Kumar Singh)

कुशीनगर (मोहन राव): जनपद में भाजपा की लहर के साथ-साथ किसानों की जागरुकता भाजपा को जीत दिलाने में अहम रही है जिले में गन्ना मिल के अलावा अन्य कोई उद्योग नहीं है। लगातार बंद होते इस उद्योग पर जनप्रतिनिधि खामोश रहे। जिससे किसानों ने लगातार वाच किया। भाजपा के चुनावी वायदों में कृषि ऋण माफी की घोषणा थी। जिसको किसानों ने काफी पसंद किया और इस बार भाजपा के पक्ष में मतदान कर दिया।

इस संबंध में गोरखपुर फाइनल रिपोर्ट की टीम ने जनपद के कई जमीनी हकीकत को चुनावी खबर में लिखकर अंदेशा भी जताया था।

यहां बता दें कि 2012 के चुनाव में कुशीनगर के सात विधानसभा सीटों पर एक मात्र फाजिलनगर सीट पर भाजपा के प्रत्याशी गंगा सिंह कुशवाहा जीते थे। वही सपा के खाते में तीन बसपा के एक तथा कांग्रेस के खाते में दो सीटें गई थी। सपा सरकार में इस जनपद से दो मंत्री भी बने। पिछले चुनाव में सपा के नेता अपने को किसानों का हितैषी के रुप में प्रस्तुत कर किसानों के दुखों को सहलाते हुए कहते थे कि हमारी सरकार बनी तो गन्ना किसानों को ₹400 प्रति कुंतल गन्ने का दाम दिया जाएगा। लेकिन सरकार बनने के बाद वादा भूल गए और किसानों के गन्ने का मूल्य ₹300 प्रति कुंतल की दर से भी नीचे रखा तथा वह भी कई किस्तों में कई महीनों में भुगतान हुआ।

जिले में खाद्य माफियाओं पर नकेल नहीं था। सत्ता के गलियारों में उनकी पकड़ थी। इसलिए गेहूं और धान की खरीदारी भी सरकारी केंद्रों पर सुचारू रूप से नहीं हो पाती थी। लगातार दो साल तक सूखे की मार झेल रहे किसानो को भी राज्य सरकार से खास सुविधा मुहैया नहीं हो पाया । राहत के नाम पर प्रति किसान एक हजार रुपए से लेकर 15 सौ रुपए तक देकर खानापूर्ति कर दियी गया।

किसान नेताओं के रूप में सपा के राधेश्याम सिंह, ब्रह्मा शंकर त्रिपाठी और डॉक्टर पूर्णमासी देहाती चर्चित हैं। सपा की सरकार रहते किसानों की दुर्दशा का आवाज यह नेता नहीं उठा पाए और न ही किसानों की कसौटी पर खरा उतर पाए।

राधेश्याम सिंह कृषि राज्यमंत्री रहते हुए किसानों के लिए कुछ विशेष नहीं कर पाए ऐसा किसान मानते हैं। जबकि किसान उन्हें पांच साल तक आशा भरी नजरों से देखता रहा। जनपद के सभी गांव में किसान भारी संख्या में किसान कृषि ऋण लिए हैं दो साल से फसल नुकसान की वजह से कर्ज़ देने की छमता में नहीं है। ऐसे में भाजपा का कृषि ऋण माफी का एजेंडा किसानों के लिए उम्मीद दिख गई और किसान एक तरफा भाजपा के पक्ष में वोट कर गए।

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