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गोरखपुर के लाल 2001 बैच के IRS अधिकारी प्रद्युम्न त्रिपाठी को मिला राष्ट्रपति पुरस्कार

राकेश मिश्रा
गोरखपुर: महानगर के निवासी और भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी डॉ प्रद्युम्न कुमार त्रिपाठी को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार दिया गया है।
राजधानी दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने डॉ प्रद्युम्न को आज यह पुरस्कार प्रदान किया। राष्ट्रपति ने देश के कुल 40 वाणिज्यिक सेवा के अफसरों को यह पुरस्कार देने की घोषणा की थी।

शहर के रुस्तमपुर निवासी श्री त्रिपाठी 2001 बैच के आईआरएस अधिकारी हैं। डॉ प्रद्युम्न वर्तमान में मेरठ में एडिशनल कमिश्नर के पद पर कार्यरत हैं। बीते वर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर डॉ प्रद्युम्न को यह अवार्ड देने की घोषणा हुई थी। राष्ट्रपति भवन ने उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए देश के सर्वोच्च राष्ट्रपति पुरस्कार देने का निर्णय लिया था।

इस अवसर पर Gorakhpur Final Report से बात करते हुए प्रद्युम्न के बड़े भाई पीडब्लूडी में कार्यरत और उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग मिनिस्टीरियल एसोसिएशन के क्षेत्रीय अध्यक्ष अश्विनी त्रिपाठी ने कहा कि छोटे भाई को राष्ट्रपति पुरस्कार मिलने से समूचे परिवार में हर्ष का माहौल है। उन्होंने कहा कि प्रद्युम्न ने अपनी प्रतिभा के दम पर अपने गाँव, अपने शहर और अपने राज्य का नाम रोशन किया है।

श्री त्रिपाठी ने बताया कि अवार्ड मिलने से ना केवल शहर के लोग बल्कि उनके गाँव छपरा बुजुर्ग के लोग भी ख़ुशी से पहले नहीं समा रहे हैं। श्री त्रिपाठी ने बताया कि प्रद्युम्न बचपन से ही मेधावी छात्र रहें हैं और यह अवार्ड उनके प्रोफेशन के प्रति उनकी समपर्ण को दर्शाता है।

आपको बता दें कि प्रद्युम्न देवरिया जिले के रुद्रपुर तहसील के छपरा बुजर्ग गाँव के मूल निवासी हैं। प्रद्युम्न के पिता स्वर्गीय श्री सोमेश्वर नाथ त्रिपाठी पीडब्लूडी में इंजीनियर थे, वहीँ उनकी माँ इन्द्रपरी त्रिपाठी एक गृहिणी हैं। प्रद्युम्न के पिता का देहांत जब वो बहुत छोटे तभी वर्ष 1990 में हो गया था। पिता के देहांत के बाद उनकी माता जी ने ही प्रद्युम्न और उनके तीन अन्य बच्चों को पढ़ाया लिखाया और इस काबिल बनाया की आज वो देश दुनिया में अपने परिवार, समाज का नाम रोशन कर रहे हैं।

प्रद्युम्न की पहली पोस्टिंग फरीदाबाद में कस्टम विभाग में हुई थी। वह दिल्ली व अन्य कई राज्यों में भी कस्टम व केन्द्रीय उत्पाद कर विभाग में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। बीते दो साल से वो सिंगापुर में वाणिज्य सचिव प्रथम के पद पर तैनात थे। दिल्ली के प्रतिस्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यायल के छात्र रह चुके प्रद्युम्न की प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा प्रदेश के गोंडा जनपद में हुई। उन्होंने गोरखपुर के सेंट एंड्रूज डिग्री कॉलेज से बीएससी की डिग्री लेने के बाद दिल्ली का रुख किया जहाँ उन्होंने जेएनयू से परास्नातक और पीएचडी की उपाधि ली।

गौरतलब है कि डॉ प्रद्युम्न की पत्नी पारोमिता त्रिपाठी भी 2001 बैच की भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी हैं और वर्तमान में जर्मनी में डिप्टी हाई कमिश्नर के पद पर तैनात हैं। वहीँ प्रद्युम्न के छोटे भाई अरुण कुमार त्रिपाठी, जो वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाते हैं, की पत्नी भी भारतीय विदेश सेवा की 2007 बैच की अधिकारी हैं। पॉलोमी इस समय संयुक्त राष्ट्र में प्रथम सचिव के पद पर कार्यरत हैं। वो इससे पहले चार साल साउथ ब्लॉक में डिप्टी सेक्रेटरी (एडमिनिस्ट्रेशन) रह चुकी हैं।

बीते वर्ष सितम्बर में पॉलोमी त्रिपाठी ने ही संयुक्त राज्य में भारत की तरफ से ‘राइट टू रिप्लाई’ के तहत जवाब देते हुए पाकिस्तान पर करारा प्रहार किया था।

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