फाइनल रिपोर्ट स्पेशल

इस जज़्बे को सलाम: एक डॉक्टर की 'पहल' भर रही है मेडिकल कॉलेज में भूखों का पेट

pahalगोरखपुर: जी हां ! ये एक अच्छी ‘पहल’ और सुचना है कि जोश से लबरेज चन्द लोग बाबा राघव दास मेडिकल कालेज में आये मुसीबतजदा लोगों को मुफ्त में भोजन उपलब्ध करा रहे हैं। वह भी हर आम ओ खास से भिक्षाटन स्वरूप मिले भोज्य पदार्थों से।
pahal-3चौकिये मत! हम बात कर रहे है बीआरडी मेडिकल कालेज में एक स्वैच्छिक संस्था ‘पहल अन्नपोष अभियान’ की। जो इनसेफेलाइटिस पीड़ितों के मुसीबतजदा तीमारदारों को भोजन उपलब्ध कराती है। खास बात ये है की यह संस्था ना तो कोई एनजीओ है और न ही इसका फंड कहीं से आता है।
pahal-4पूर्वांचल का अभिशाप बन चुके इंसेफेलाइटिस रोग की चपेट में अपने नौनिहाल को हर कोई आनन फानन में मेडिकल कालेज की तरफ लेकर भागता है। ऐसे वक्त में उसे पहनने और खाने की चीजों को लेकर आने की फुर्सत नही रहती है। ऐसे में जब तीमारदार अपने बच्चे को अस्पताल में भर्ती कर देता है तो उसके सामने जो समस्या मुंह खोले खड़ी रहती है वह है पेट भरने और कपड़े बदलने की। कुछ इसी तरह की समस्याओं से निपटने के लिए उन्हें दुसरो का मुंह ताकना पड़ता है।
pahal-7कुछ इसी तरह की समस्याओं को बारम्बार देख कर इसी मेडिकल कालेज में कार्यरत एक डॉक्टर विजय कुमार श्रीवास्तव का हृदय द्रवित हो गया और उन्होंने ऐसे लोगों के बारे में सोचना शुरू कर दिया। अपने कुछ शुभेच्छुओं से बात चित के बाद उन्होंने दृढ प्रतिज्ञ होकर एकला चलो की तर्ज पर अपने फेसबुक पेज पर लोगो से मदद की अपील की।
pahal-2उन्होंने अपने अपील में लिखा कि अगर एक-एक आदमी केवल 300 रूपये के कच्चे भोज्य पदार्थ उन्हें भिक्षास्वरूप दे दे तो वह कुछ जरूरतमन्दों की सेवा कर सकेंगे। नतीजा सामने आया और पहले कुछ लोगो ने फिर धीरे धीरे अन्य लोगों ने इसमें हाथ बंटाना शुरू कर दिया। होता ये है कि जब कोई अपनी दैनिक रोजमर्रा की वस्तुएं लेने किराना की दुकान पर जाता है तो पहल के लिए भी 300 रूपये की आटा, चावल, दाल आदि भी ले लेता है ,जिसे वह संस्था को दे देता है।
pahal-5डॉक्टर विजय कुमार श्रीवास्तव के अनुसार वह भिक्षास्वरूप मिले इन भोज्यपदार्थों को मेडिकल कालेज परिसर में ही रैन बसेरा में चल रहे अन्नपूर्णा कैंटीन में देते है। जहाँ सुबह दोपहर शाम एक समयावधि तक ताजा भोजन मिलता है। इस दौरान सम्बन्धित जरूरतमंद तीमारदार को एक पर्ची दे दी जाती है और तीमारदार उस पर्ची को कैंटीन में देकर मुफ्त भोजन ग्रहण कर लेते है। जिसमे 6 रोटी, हाफ प्लेट चावल, दाल, सब्जी, प्याज व अचार दिया जाता है।
pahal-6डॉक्टर श्रीवास्तव के अनुसार 30 अगस्त 2016 से शुरू किये गए इस अभियान को पहले तो केवल दो माह के लिए ट्रायल के तौर पर चलकर देखा जाना था, जिसमे प्रतिदिन 100 लोगों को भोजन कराया जाता था, जिसे बाद में बढ़कर भोजकों की संख्या 150 हो गयी है। इस संस्था द्वारा 30 अगस्त से शुरू हुए अन्नपोष अभियान में 14 अक्टूबर तक 6000 लोगो को भोजन कराया जा चूका है।
pahal-1इमरजेंसी में लगा है हेल्पडेस्क
मेडिकल कालेज के इमरजेंसी कक्ष में पहल संस्था द्वारा हेल्प डेस्क की स्थापना की गयी है। जहाँ 8-8 घंटे की शिफ्टवाइज ड्यूटी के लिए 3-3 वालंटियर्स लगाये गए है। जो इंसेफेलाइटिस पीड़ित को पर्ची बनवाने से लेकर एडमिशन, जाँच ,दवा और भोजन उपलब्ध कराने की मदद करने को तत्पर रहतें हैं।
फाइनल रिपोर्ट डॉक्टर विजय कुमार श्रीवास्तव और उनकी ‘पहल’ को सलाम करता है.

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