फाइनल रिपोर्ट स्पेशल

तख्ता: गोरखपुर का एक ऐसा गांव जहां 20 सालों से नहीं हुआ है कोई अपराध (फाइनल रिपोर्ट एक्सक्लूसिव)

Sahjanwa-railway-stationगोरखपुर: कहते है पूर्वांचल में अपराध व अपराधी से पुराना नाता है। कभी मिनी शिकागो के नाम से मशहूर पूर्वांचल में अपराध की तीन वजह है, जर, जोरु और जमीन। लेकिन हम आपको इसी पूर्वांचल के एक ऐसे गांव में लिए चलते हैं जहां पिछले करीब 20 साल से एक भी वारदात नहीं हुई और ना ही एक दरख्वास्त पुलिस के पास पड़ी।
यह गाँव है गोरखपुर शहर मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर तख्ता उर्फ़ महिउद्दीनपुर। गांव की आबादी का 75 प्रतिशत हिस्सा ब्राह्मण बिरादरी का है। 25 प्रतिशत में दलित एवं अन्य जातियां हैं। इस गांव में करीब 20 वर्षो से कोई अपराध नहीं हुआ है।
गोरखपुर जिले के सहजनवा थाना क्षेत्र स्थित करीब 1500 की आबादी वाले महिउद्दीनपुर उर्फ तख्ता गांव के लोगों को इस बात पर गर्व है कि उनका गांव अपराध की काली छाया से दूर है। उनका दावा है कि विगत 20 वर्षो में यहां मारपीट, फौजदारी,चोरी, लूट, अपहरण या हत्या जैसी कोईआपराधिक घटना नहीं हुई है।
पुलिस के रिकार्ड भी उनके दावों पर मुहर लगाते हैं। सहजनवा थाने के रिकार्ड में यह गांव डेढ़ दशक से बिल्कुल बेदाग है। हत्या या अपहरण जैसे बड़े अपराधों को तो छोड़ ही दीजिए, पर्स चोरी, झपटमारी और चोरी जैसे छोटे अपराध की शिकायत भी इस गांव से वर्षो से नहीं आई है।
तख्ता गांव भले ही 20 वर्षो से अपराध-मुक्त रहा हो, लेकिन ऐसा नहीं है कि दूसरे गांवों की तरह यहां के लोगों में आपसी मनमुटाव नहीं होता। अगर कभी किसी के बीच मनमुटाव हो भी गया तो गांव के बड़े-बुजुर्ग और पंचायत, गांव की सरहद के अंदर ही मामला सुलझा देते हैं। इसलिए छोटे-मोटे मामले थाना तक नहीं पहुंचते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़े-बुजुर्गो का सम्मान और उनके प्रति भरोसा जताए जाने के कारण आसपास के इलाके में उनके गांव को विशिष्ट पहचान मिली है। गांव के ज्यादातर लोग खेती करते हैं और कई घरों के लोग सरकारी और निजी नौकरियों में भी हैं। जहां गोरखपुर अपराधिक घटनाओं से जुझ रहा है तख्ता गांव देता है नई आशा।

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