फाइनल रिपोर्ट स्पेशल

बाल दिवस स्पेशल: शहर में प्रशासन की नाक के नीचे आप को मिल जायेगा कूड़े और नशे के बीच पीसता बचपन


गोरखपुर: भले ही प्रदेश व केंद्र सरकार अपने द्वारा किए गए कार्यों को गिनाने मे नहीं थक रही हो। कितने ही कार्य उन लोगो ने जनता के लिए किए हो लेकिन क्या आप ने कभी रेलवे स्टेशनों पर उस बच्चों को देखा है जो सारा-सारा दिन नशे में चूर रहते है और इस कोने उस कोने में पड़े रहते है, कोई कबाड़ बिनता है तो कोई यात्रियों से पैसे मांगता है और सबसे ख़ास यही बच्चे हमारे आप के द्वारा फेके हुए पानी के बोतलों को इकठ्ठा करके उसमे पानी भरके बेचने का भी काम करते है।
यह स्टोरी आज उन बच्चों की है जो अपने आप को पूर्ण रूप से नशे के आगोश में झोक चुके है, और ये सब होता है प्रशासन के नाक के नीचे। लेकिन प्रशासन इस बात की कोई परवाह नहीं करता है। उन्हें तो केवल अपने आप ही अपनी पीठ थप-थपाने में ही मजा आता है।
bachpanगोरखपुर के सिविल लाइन, रेलवे स्टेशन और धर्मशाला बाजार के पास रहने वाले ये वो बच्चे है जो कूड़ा बीनने का काम रेलवे स्टेशन पर यात्रियों द्वारा फेके गए बोतलों को बीनने का काम और उन्ही बोतलों मे फिर पानी भर कर ट्रेन मे यात्रियों को बेचने का काम करते है करते है और उनसे मिलेने वाले पैसों से नशे का समान खरीद कर उसका उपयोग करते है।
bachpan-1लेकिन इस बात की परवाह वहा पर मौजूद प्रशासन के लोगो को नहीं है, और तो और जिम्मेदार भी यही कहते है की आखिर हम करे तो करे क्या जब इस बच्चों को रेलवे स्टेशन से पकड़ा जाता है तो यहां से भाग कर बाहर चले जाने है और हमलोगो के जाने बाद फिर से बच्चे अपनी आदतो के अनुसार नशे में लग जाते है। ऐसे बच्चों के लिए रेलवे प्रशासन ने, अपना घर जैसी संस्थाओ को भी लागया गया है बच्चे वहा से भी भागकर यही आ जाते है| बड़ा सवाल ये है की इन बच्चों को नशे की समान कोन देता है और कहा से खरीदते है ये बच्चे नशे की समान।
bachpan-2जब फाइनल रिपोर्ट की टीम ने रेलवे स्टेशन पर नशा कर रहे बच्चे से पूछा की तुम ये क्या कर रहे थे तो उसने कहा की हम सुलेसन पी रहे थे ,और सुलेसन हम बहुत दिन से पी रहे है और एक दिन मे हम 8 ,9 सुलेसन पी जाते है। ये 50 रुपये का आता है हम लोग इसे दुकान से खरीद कर लाते है ,मीडिया द्वारा पूछे जाने पर की पैसा कहा से पाते हो तो राजू ने बताया की हम लोग कबाड़ बैंकर बोतल का पानी बेच कर पैसा पाते है।
bachpan-3वही इस बारे मे पूछे जाने पर समाज सेवी आज़ाद पाण्डेय ने बताया की कई सालों से मैंने रेलवे स्टेशन का दौरा किया है और इन बच्चों पर हम लोगो ने एक रिसर्च भी किया है। इन बच्चों को मैं रोज देख रहा हूँ ये बच्चे सैकड़ों की संख्या मे स्टेशन पर रहते है। इन बच्चों को नशे का आदि मात्र इस लिए बना दिया जाता है क्यो की कई गिरोह इन बच्चों पर कार्य कर रहे है।

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