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सिविल लाइन्स नहीं इसे UNCIVIL LINES कहिये जनाब

civil-lines-gorakhpurगोरखपुर: दोस्तों यह तश्वीर कहीं और की नहीं बल्कि अपने गोरखपुर के पॉश एरिया सिविल लाइन्स की है। तश्वीर देख कर आप अन्दाज लगा सकतें यहाँ के हालात की। यह जगह भी नगर निगम के ऑफिस से कोई मीलों दूर नहीं है बल्कि बमुश्किल 2 किलोमीटर पर स्थित है।
यही नहीं इसी रोड पर कई स्कूल जैसे अमर सिंह और एचपी भी आप को मिल जायेंगे। सड़क भी कोई कम चौड़ी नहीं है। ये अलग बात है की नाले ने सड़क के आधे हिस्से और साथ-साथ नगर निगम के कर्मचारियों की मानसिकता के पुरे हिस्से का अतिक्रमण कर लिया है।
civil-lines-gorakhpur-1यहाँ लगने वाले जाम का कारण नगर निगम है, पहले तो नाले साफ ही नहीं होते और नाले का पानी पूरे साल सड़क पर ओवरफ्लो होकर बहता रहता है। जानकारी के अनुसार गोरखपुर के कमिश्नर के कारण कुछ दिनों पहले नाले का सिल्ट निकाला गया है तो वो भी 4-5 दिनों से सड़क पर ही पडा़ हुआ है, जो जाम का कारण बन रहा है। सिल्ट निकालने के बाद भी नाली का पानी ओवरफ्लो कर रहा है, क्योंकि आगे का नाला कई महिनों से जाम है।
बड़ी ताज्जुब की बात है की ऐसे वक़्त में जब हर तरफ स्वच्छ भारत का जैम कर ढ़िढोरा पीटा जा रहा है गोरखपुर के ह्रदय स्थली गोलघर के नजदीक ऐसा नजारा देखने को मिला रहा है। नाले के कारण सड़क आधे से भी कम रह गयी है और ऐसे में यहाँ जाम का लग्न बड़ी आम बात है।
वैसे अब इन बातों से फ़र्क़ पड़ता किसको है? इस सड़ी गली व्यवस्था की तरह हम सब भी इसके आदि हो चुकें हैं। बस हम रोज यहाँ से गुजरते हैं तो बार नगर निगम, उसके पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को दो चार बातों से नवाज़ कर खुस हो लेते हैं और चले जातें हैं अपने काम पर। रोज रोज हम यही प्रक्रिया अपनाते हैं। वही दूसरी तरफ इस व्यवस्था के जिम्मेदार लोग मलाई काटने में लगे रहते हैं।
फोटो साभार: अपना गोरखपुर के फेसबुक वाल से

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