फाइनल रिपोर्ट स्पेशल

योगी सरकार में भी क्या भ्रष्टाचारी ही करेंगे भ्रष्टाचार की जांच!

गोरखपुर (संदीप त्रिपाठी): उत्तर प्रदेश की सत्ता सम्हालते ही बीजेपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने समाजवादी सरकार के शासन काल के पांच प्रमुख योजनाओ की जाँच तो बैठा दी मगर इस मामले में संलिप्त अफसर और इन्जीनियर अब भी उसी पद पर काबिज हैं। ऐसे में इस पर सवाल उठना लाजमी हैं उन्ही दागियो की मौजूदगी में जच कितनी निष्पक्ष होगी और क्या ये अफसर और इंजीनियर इन मामलों में सहयोग करने को तैयार हैं?
हलाकि बुधवार को योगी सरकार ने प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद पहला बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 20 आईएएस अफसरों के तबादले कर दिए। इसमें से नौ अधिकारियों को प्रतीक्षा सूची में रखा गया है। ये सभी अधिकारी पूर्ववर्ती मायावती और अखिलेश सरकार के खास माने जाते हैं। मायावती और अखिलेश सरकार के खास आईएएस अधिकारी नवनीत सहगल से सभी चार्ज छीनकर अवनीश अवस्थी को दे दिया गया है।
हलाकि जिन परियोजनाओं की जांच के आदेश दिए गएँ हैं उनमे अभी भी कुछ अधिकारी अपने पदों पर काबिज हैं। गौरतलब है की भाजपा सरकार ने जिन पांच मामलो में जांच शुरू की है। उनमे गोमती रिवर फ्रंट परियोजना, जेपी इंटरनेशनल सेंटर, मायावती राज में चीनी मिलों की बिक्री, खनन आदि हैं। आइये जरा नजर डालते हैं इन परियोजनाओं पर:
1 गोमती रिवर फ्रंट परियोजना की जाँच पूर्व न्यायाधीश एन के सिंह संभाल रहें हैं। इस मामले में मुख्य से रूप सिंह, प्रदीप कुमार, अनिल कुमार और अजय यादव की चौकड़ी जांच के दायरे में है। इन्समे से अनिल यादव, जिन्हे आज आदित्यनाथ ने अपने पद से हटा कर प्रतीक्षारत कर दिया है, को छोड़ बाकी सभी अधिकारी अपने पद पर काबिज हैं। रिवर फ्रंट में लगने वाली लाइट से फब्बारो तक का ठेका ब्लैक लिस्टेड कंपनी को मिला हुआ है और अग्रिम भुगतान भी हो चूका है। जाहिर है भुगतान इन्ही अधिकारियों द्वारा किया गया होगा। गौरतलब है की भुगतान के बाद सप्लाई आज तक नही हो सकी है। इस सब के बाद भी भ्रष्टाचार में शामिल इन अफसरों का निलंबन तो दूर अभी तक तबादले भी नही हुए हैं।
2 पूर्व मुख्य मंत्री के चाचा और तात्कालिक लोक निर्माण मंत्री के प्रमुख सचिव दीपक सिंघल तक भी जांच की आंच आ चुकी है। बीते दिनों शिवपाल मुख्य मंत्री योगी से मिलने गए थे तब से इसकी चर्चा जोरो पर है की ये जांच के दायरे से खुद को अलग रखना चाहते है। बताते चले की ये वही दीपक सिंघल है जो सपा सरकार के अन्तर कलह के जिम्मेदार भी बने थे।
3 जेपी इंटेरनेशनल सेंटर के लिए मंत्री आशुतोष टंडन के नेतृत्व में कमेटी बनी है। अपने कारनामो से चर्चा में रहे आईएएस अधिकारी सत्येंद्र सिंह अभी भी विकास प्राधिकरण के मुखिया बने हुए हैं। सरकार बदलने के बाद सत्येंद्र यह दिखाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं की वो पूरी सख्ती से काम करते और कराते हैं। जांच शुरू होने के बाद भी इनका इस पद पर काबिज रहना बड़े सवाल खड़े करता है।
4 मायावती के शासन कल में चीनी मील बिकने की जांच के आदेश हो गए है। इन मामलों में जांच के दायरे में वर्तमान मुख्या सचिव राहुल भटनाकर भी हैं। भटनागर उस समय गन्ना सचिव थे और इस मामले में शराब करोबारी पोंटी चड्डा को लाभ देने के लिए कई नियम बदले गए।
5 जेएनएनयूआरएम में भी सिबर से सप्लाई तक घेरे में है इस मामले में भी वर्तमान एमडी पर ऊँगली उठीI विकास मंत्री सुरेश खन्ना के नेतृत्व में समिति को जांच सौपा गया है।
6 समाजवादी सरकार में भ्रष्टाचार का पर्याय रहा खनन विभाग की जांच उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य की देख रेख में हो रहा है। मगर प्रमुख सचिव गुरुदीप सिंह और खनन निदेशक भास्कर जो खुद शक के दायरे में है अभी भी उसी पद पर काबिज हैं। है
ऐसे में गलत नहीं होगा की योगी सरकार ने जांच के फैसले तो बहुत तेज़ी से लिए मगर उन परियोजनाओं में शामिल अफसरों पर मेहरबानी बड़े सवाल खड़े कर रहें हैं।

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