फाइनल रिपोर्ट स्पेशल

देश के लिए शहीद हुआ गोरखपुर का लाल, लेकिन आज उसके परिवार की सुध लेने वाला कोई नहीं


(शहीद मेजर नीरज पांडेय के माता, पिता)
गोरखपुर: 17 मार्च 2016 मेजर नीरज पांडेय, जो गोरखपुर के तिवारीपुर के रहने वाले थे, ने अरुणाचल प्रदेश के इंडो-चाइना बॉर्डर पर देश की सरहदों की रक्षा करते हुए विकट परिस्थतिओं में अपनी जान की परवाह न कर अपने जवानों की जान बचाई और देश के कीमती एवम अति आवश्यक कम्युनिकेशन सिस्टम की हिफाजत करते हुए वीरगति को प्राप्त किया। जो एक सैनिक की और मात्र भूमि और मानवता के लिए दिया गया सर्वोच्च बलिदान है। जिसकी बहांदुरी पर उत्त्तर प्रदेश के साथ साथ पुरे भारत को नाज और गर्व महसूस होता है।
शहीद मेजर नीरज पांडेय को अंतिम विदाई देने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जिला प्रशासन के साथ साथ सांसद योगी आदित्य नाथ, विधायक राधा मोहन के अलवा ग्रुप कमांडर ब्रिगेडियर राज वीर सिंह तथा आर्मी के अनेक अधिकारी और सैकड़ो गणमान्य व्यक्तियो ने भाव भीनी श्रद्धांजलि समर्पित की और राजकीय सामान के साथ पुष्प समर्पित कर मुख अग्नि दी गयी।

शहीद नीरज पांडेय के पिता रविंद्र नाथ पांडेय गोरखपुर बिजली विभाग में कार्यरत है और नीरज की माता श्रीमती सरोज पांडेय एक गृहणी है। नीरज का एक छोटा भाई दीपक और एक छोटी बहन ममता भी है। नीरज का शुरू से ही रुझान देश सेवा के लिए था।
नीरज क्लास 5 तक पढ़ाई के बाद आगे की पढ़ाई के लिए सैनिक स्कूल, त्रिवेंद्रम केरल चले गए। फिर पढ़ाई पुरे होने के बाद आर्मी में कार्यरत हो गये। 2010 में नीरज की शादी सुष्मिता पांडेय से हुई।
नीरज के पिता रविंद्र नाथ पांडेय ने एक एक पैसा जोड़ कर नीरज की पढ़ाई पर खर्च किया और उसके साथ दो बच्चों की पढ़ाई पूरी कराने में जुटे रहे। नीरज के नौकरी पाने के बाद खुशियां और बढ़ गई थी और नीरज के पिता को लगा कि अब शायद जिम्मेदारियों से निजात पाने का वक्त आ गया है फिर 2012 में नीरज को पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई तो घर में और भी खुशियां बढ़ गई।

इसी बीच 17 मार्च 2016 का वो काला दिन भी आया, जो घर की सारी ख़ुशियों को ले डूबा।
आज नीरज के शहीद हो जाने के चंद दिनों बाद ही नीरज के परिवार का कोई भी सुध लेने नहीं पहुंचा। आज उनके पिता रविंदर पांडेय सहायता राशि को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार से कई बार गुहार लगा चुके है। लेकिन उनकी सुनने वाला कोई भी नहीं है।
नीरज की बीवी ने भी कई बार दिल्ली जा कर सेना मुख्यालय में अपनी समस्याओ को बताया , लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहा। क्या देश की आन बान और शान के लिए मर मिटने वाले इस शहीद के लिए यही श्रद्धांजलि है कि उसके शहीद होने के बाद उनके घर वाले दर दर भटके और उनकी माता और बहन का रो रो के बुरा हाल है।
क्या यही है सच्चे देश भक्त को श्रद्धांजलि ?
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