फाइनल रिपोर्ट स्पेशल

कैसे मिलेगी यात्रा की सफलता, जब अगुआ एसी से बाहर निकलने का नही जुटा पा रहे हौसला

UP-Congress-President-Raj-Bगोरखपुर: बीते 27 वर्ष से प्रदेश की सत्ता से वंचित कांग्रेस अब तमाम मंथन और टीम पीके की सलाह पर यूँ तो मैदान में उतर कर सत्ता पाते ही ‘बेहाल यूपी को खुशहाल यूपी’ में तब्दील करने की बात कर रही है। किंतु पार्टी के बड़े नेता जैसे की प्रदेश अध्य्क्ष और मुख्य मंत्री पद की उम्मीदवार अपने नेता राहुल गांधी के मूल मंत्र संकल्प के साथ सबसे सम्पर्क वाले नजरिये को नजरंदाज कर बस औपचारिकता भर निभा रही है। ऐसे में किस तरह से सम्भव है कि पार्टी किस तरह से सत्ता या सत्ता के समीप भी पहुँच पायेगी।
बीते रविवार से गोरखपुर अंचल में शुरू हुए ’27 साल, यूपी बेहाल’ नारे के साथ प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर यात्रा कर रहे हैं। इसके लिए सड़क मार्ग से आमजन से मिलने की कवायद में बकायदे एक बस में बैठ कर राजबब्बर और उनके साथ कई दिग्गज नेता अलग-अलग जिलों से होकर गुजर रहे है। अपने पार्टी कार्यकर्ताओं और आमलोगों को जागरूक करके बाकी पार्टियों के बारे में बताने के लिए ये ’27 साल, यूपी बेहाल’ के नारे के साथ ये यात्रा निकाली है, लेकिन जिस भी जगह से ये यात्रा गुजर रही है वहाँ कार्यकर्ताओं और नेताओं का हुजूम तो जम कर दिख रहा है, लेकिन अभिनेता से नेता बने प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर इतनी भी जहम नहीं उठा रहे है, कि वो बस से निचे उतर कर कार्यकर्ताओं से मिल सके और उन्हें कुछ गुरु मन्त्र दे सके।
इसी क्रम में कल वो देवरिया से चल कर बडहलगंज पहुचे थे। सुबह 11 बजे का समय था, लेकिन वो पहुचे 3 बजे के बाद तब तक सभी कार्यकर्ता और नेता पलकें बिछाए राजबब्बर का इन्तजार कर रहे थे। इस तपती धुप के बावजूद कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और नेताओं का मनोबल थोड़ा भी कम नहीं हुआ, और राजबब्बर का इन्तजार करते रहे।
बडहलगंज में ही दो जगह पर राजबब्बर का स्वागत होना था, और मंच बना कर राजबब्बर के बातो को सुनने के लिए लोग उनका इंतजार कर रहे थे, लेकिन राजबब्बर जब आये तो वो उनसे मिलने के लिए बस से एक पल के लिए नीचे भी नहीं उतरे, और बस के सीढ़ियों पर ही खड़े होकर इंतजार कर रहे डॉ संजय कुमार (जो की बांसगांव के पूर्व लोक सभा प्रत्याशी भी रह चुके है) को अपने बगल में खड़ा कर उनसे माला पहन कर उसी पर से माइक लेकर नसीहत देते हुए औपचारिकता वश दो शब्द कह कर आगे बढ़ गए।
इससे वहा के लोग काफी नाराज भी हुए। उनका कहना था की जिनका वो इतनी बेसब्री से इन्तजार कर रहे थे, वो एक पल रुक कर उनसे सही ढंंग से रूबरू भी नहीं हुए। मौके पर उपस्थित जनता ने तो प्रदेश अध्यक्ष के इस रवैये को काफी गैर जिम्मेदाराना भी करार दिया।
इसी तरह यात्रा की शुरुआत में ही गोरखपुर मण्डल में यात्रा की अगुआई की जिम्मेदारी ओढ़े आयी प्रदेश में कांग्रेस की मुख्यमंत्री चेहरा और दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित भी यात्रा में कार्यकर्ताओं के कदम से कदम भी मिला कर नही चल सकीं। यात्रा के कुशीनगर पड़ाव के दौरान ही तबियत नासाज़ होने का बहाना बनाकर उड़नखटोले से दिल्ली की राह पकड़ लीं।
जिससे कार्यकर्ताओ में गलत संदेश न् जाये इसलिए बस्ती मण्डल में अगुआई करके लौटे प्रदेश अध्यक्ष को ही फिर से यह यात्रा पूरी करने की जिम्मेदारी दी गयी थी। जिसमें नेता का चोला ओढ़े अभिनेता प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बरअभी भी वातानुकूलित कक्ष से बाहर निकलकर धुप में कार्यकर्ता और आमजन से मिलने का हौसला नही जूटा पा रहे है।
ऐसे में जिस तरह से ’27 साल, यूपी बेहाल’ का नारा देकर कांग्रेस पूर्वांचल में अपनी जमीन तलाश रही है, और इसकी जिम्मेदारी प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर को सौपी गई है। लेकिन जिस तरह से अभिनेता से राजनेता बने राज बब्बर जिस तरीके से यात्रा कर रहे है, उसे देखने के बाद कांग्रेस की कथनी और करनी में फर्क साफ़ समझा जा सकता है।
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