फाइनल रिपोर्ट स्पेशल

गोरखपुर शहर पस्त लोग मस्त!

गोरखपुरिये मस्त है। होना भी चाहिए आखिर उनके शहर का पीठाधीश्वर राजनेता मुख्यमंत्री जो बना है। यकीन करना चाहिए कि आदित्यनाथ योगी एक बेहतर, संजीदा और ईमानदार मुख्यमंत्री साबित होंगे जो अपने शहर के लिए कुछ ठोस काम करेंगे साथ ही यूपी का चौतरफा विकास भी करेंगे। मगर अभी हाल बुरा है। लखनऊ से गोरखपुर तक एनएच-28 पर भाजपा की झंडा लगी भागती स्कार्पियो यूं चल रही थीं मानो सिवाय गाय के और किसी को भी कुचल देने की उनको पूरी आजादी है।
जब भी कोई भाजपा झंडा लगी स्कार्पियो बगल से गुजरती हमारी इनोवा का ड्राइवर तत्काल उसे जगह दे देता। क्या पता गाड़ी चढ़ाता हुआ निकल जाए। खैर एक बात और कि सम्पूर्ण भारतवर्ष में मतदाताओं की याददाश्त बहुत कमजोर होती है। बस उगते हुए सूर्य की आराधना करने का, प्रणाम करने का, नमस्कार करने का ही चलन यहां है। वर्ना क्या वजह थी कि गोरखपुरिये अपने उस मुख्यमंत्री वीरबहादुर सिंह को भूल गए जिसने गोरखपुर को पर्यटन का तीर्थस्थल बनाने की योजना बनाई थी।
करीब बीस किमी के पेरीफेरियल में फैली रामगढ़ ताल झील में एक तैरता हुआ होटल, चारो तरफ हेस्टिंग्स और बोटिंग का सपना देखा था। अगर प्रशासन और शासन उस दिशा में काम करता तो यकीन मानिए कि गोरखपुर श्यामला हिल्स के सौंदर्य को फीका कर देता। उदयपुर की बजाय शायद गोरखपुर देश के एक बड़े पर्यटन स्थलों में शुमार होता। आज वह ताल उपेक्षित पड़ा है। थोड़ा-बहुत नौकायन होता जरूर है पर लोकल लोगों के तफरीहन। उस झील को लगातार सुखाया जा रहा है और उसके किनारे की जमीन बेची जा रही है। पास का जंगल उजाड़ दिया गया। सारे वृक्ष काट डाले गए।
आज तो गोरखपुर में मुझे लैंड माफिया, जंगल माफिया और तस्करों का मायाजाल ही तैरता दिखा। शहर सुंदर है, लोग सुंदर हैं, उनकी बोली मीठी है। गाली भी दें तो लगता है कि प्यार जता रहे हैं। यहां पर टैलेंट भी दिखा, उद्यमशीलता भी है। मुझे जिस लिटरेरी फेस्टीवल में न्यौता गया था वहां पर सुनने आई भीड़ कोई सामान्य भीड़ नहीं थी बल्कि उनके तर्क और जिज्ञासा लाजवाब थी। यहां की यूनीवर्सिटी सुंदर है और कारमेल गर्ल्स कालेज भी। पर नहीं सुंदर दिखा तो प्रशासन, राजनेता और उनके पाले-पोसे दलाल। गोरखपुर की चुनौती यही है कि गोरखपुर को बचा लो।
कितना बड़ा दुर्भाग्य है कि कल मैने रामगढ़ ताल पर खड़े होकर एक फोटो खिंचवाई और उसे फेसबुक पर डाला तो जो कमेंट आए वे शर्मिन्दा कर देने वाले थे। अधिकतर लोगों ने लिखा कि आप तो गोरखपुर जाने का झांसा देकर मुंबई निकल लिए। हमें चिढ़ाने के लिए मैरीन ड्राइव का फोटो डाल रहे हैं। इसलिए मेरी तो गोरखपुर वासियों से अपील है कि अपना इतिहास और भूगोल भी मत भूलो। वीर बहादुर को भी याद करते चलो भाई और उसके सपने को साकार करवाओ गोरखपुरियों!
(वरिष्ठ पत्रकार शम्भू नाथ शुक्ल की फेसबुक वाल से)

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *