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अव्यवस्था की भेंट चढ़ गया गोरखपुर का अपना ओपेन थियेटर; 28 साल बाद भी न बन सकी चारदीवारी!

open-1गोरखपुर: हजारों ख्वाहिशें ऐसी की, हर ख्वाहिश पे दम निकलें, बहुत निकले मेरे अरमां, लेकिन फिर भी कम निकलें।
मशहूर शायर गालिब की ये गजल कहीँ न कहीँ उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम द्वारा रामगढ ताल एरिया में निर्मित मुक्तकाशी मंच यानी ओपेन थियेटर पर जमती है। जो 28 वर्ष से बुमश्किल करीब 7 हजार वर्ग मीटर में अधूरा सा निर्माण नजर आता है।
सुबे में कांग्रेस सरकार में मुख्यमन्त्री रहे स्व वीर बहादुर सिंह की दिली तमन्ना थी कि अपना जनपद भी विश्वस्तर पर दिखे और अपने जनपद को विश्व पटल पर देखने की चाह में बनाई गयी परियोजनाओं में एक मुक्ताकाशी मंच उर्फ़ ओपन थियेटर भी था। जिसे बनाने में 1.43 करोड़ रूपए की लागत के बजट का प्रस्ताव था।
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शहर के बीच एक तरफ जहां एशिया का सबसे बड़ा प्रेक्षागृह बनाया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर करीब 12 हजार वर्ग मीटर में मुक्ताकाशी मंच। उनकी सुनहरी परियोजनाओं में तारामंडल, रामगढ़ताल, चंपादेवी पार्क आदि थे।
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मुख्यालय से सिर्फ ढाई किमी की दूरी पर मानचित्र के अनुसार करीब 7 हजार वर्ग मीटर में बन रही यह रंगशाला, अब धनाभाव के चलते अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है। शासन के 1.43 करोड़ रूपये के बजट में विभाग को सिर्फ 85.88 लाख रूपये ही मिले। कहने को यहां सुविधाएं तो हैं, परन्तु ऐसी, जिनका उपयोग कलाकार नहीं कर सकते।
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28 साल बाद भी विभाग न तो विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था कर सका और न ही चारदीवारी बनवा सका। एक अव्यवस्था की भेंट चढ़ चुका, तो दूसरे में चौकीदार का परिवार रहता है।इस मुक्ताकाशी मंच में शौचालय में ताले लटके रहते हैं। पानी के लिए चार टंकियां लगी हैं, पर कुछ दिनो पहले आंधी तूफान में टूट कर नीचे आ गई हैं। जो गिनती गिनाने के लिए मंच पर ही रख दी गयी हैं।
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यहां बने ग्रीन रूम के दरवाजे व खिड़कियों के शीशे टूटे हुए है। जहां इस मंच के निर्मित होने के बाद भी इसका पुरसाहाल लेने वाला कोई नही है।क्योंकि इस ओपन थियेटर को निर्माण करने का दायित्व राजकीय निर्माण निगम का था।जिसे निर्माण के बाद सांस्कृतिक विभाग को हस्तांतरित किया जाना था।
किन्तु बजट के अभाव में न तो निर्माण पूरा हुआ और न ही सम्बंधित विभाग को हस्तांतरित किया जा सका।इसके बाद से ही विभाग को एक अदद खरीदार या किसी नाट्यमञ्च के किरायेदार की बाट जोहनी पड़ रही है। नतीजा निर्माण निगम अब मजबूरन इसकी देखरेख के लिए विभाग के एक बिकलांग केयरटेकर को रख छोड़ा है।जो वर्ष 1998 से यहाँ अपने परिवार के साथ रहता है।
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यहाँ इन कार्यक्रमो का हुआ मंचन
वर्ष 2007 में संस्कृति विभाग द्वारा पूर्वांचल का लोक नृत्य फरूआही की प्रस्तुति हुई। इसी साल रंगमंडल द्वारा दो दिवसीय समारोह में नाटक बापू की हत्या हजारवीं बार का मंचन हुआ।
वर्ष 2010-11 में संस्कृति विभाग द्वारा लोक परंपरा की समृद्धि के लिए लोक नृत्य का प्रदर्शन।
वर्ष 2010 में कला संगम एवं अभियान के संयुक्त तत्वाधान में खूबसूरत बहू का मंचन।
वर्ष 2012 में संस्कृति विभाग के तत्वाधान में लोक गायिका प्रियंका सोना त्रिपाठी एवं साथी कलाकारों द्वारा विवाह संस्कार पर आधारित नृत्य नाटिका का मंचन।
मुक्ताकाशी मंच बनाने में विभाग को मिला बजट
वर्ष 1988-89 में 24.13 लाख रूपये
वर्ष 1995-96 में 25 लाख रूपये व 0.2 लाख रूपये।
वर्ष 1996-97 में 0.2 लाख रूपये
वर्ष 2005-06 में 18.05 लाख रूपये व 14.70 लाख रूपये।
कुल धनराशि 85.88 लाख रूपये।
सम्बंधित धनराशि में निर्मित कक्ष
विशिष्ट कक्ष 2
ग्रीन रूम 2
स्टेज 1
दर्शक दीर्घा 2
पुरूष शौचालय 1
महिल शौचालय 1

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