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मन की सभी मुरादें पूरी करती हैं रामकोला-पडरौना मार्ग स्थित मां धर्म समधा देवी

कुशीनगर (मोहन राव): जनपद के रामकोला-पडरौना मार्ग पर स्थित धर्म समधा देवी मंदिर भक्तों की आस्था का प्रतीक है। कहा जाता है कि जो भक्त सच्चे दिल से मां के दरबार में मनौती मांगता है वह अवश्य पूरा होता है। वैसे तो मां के दर्शन के लिए वर्ष भर श्रद्धालु आते जाते रहते हैं। लेकिन चैत नवरात्रि तथा शारदीय नवरात्रि में यहां काफी भीड़ रहती है।
चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन धर्म समधा मंदिर परिसर में परंपरागत ऐतिहासिक मेला भी लगता है जिसका इंतजार श्रद्धालु वर्षों से करते हैं । इस मेले में लाखों की भीड़ होती है।
धर्म समधा देवी मंदिर के पुजारी ने दुर्गा माता के मंदिर एवं महिमा के विषय में बताया कि प्राचीन समय में सोमल के बगल में स्थित कुसमही राज्य के राजा मदन पाल सिंह की कुल देवी हैं । उन्होंने स्थान के विषय में बताया कि अंग्रेजों के समय में एक दारोगा घोड़े पर सवार होकर गस्त पर निकले थे। तभी सोमल (वर्तमान में मंदिर के दक्षिणी तरफ जलजमाव का कई सौ एकड़ का जमीन ) के किनारे एक श्वेत वस्त्र धारी महिला को देखा। दरोगा ने महिला का पीछा किया। महिला भागते-भागते धर्म समधा नामक स्थान पर आकर एक खंडहर में अंतर्ध्यान हो गई।
दरोगा जी वहां पहुंचे तो उनका घोड़ा वहीं रुक गया और खुद व घोड़े से नहीं उतर पा रहे थे । उन्हें आभास हो गया कि जिस महिला का मैं पीछा कर रहा हूं वह साधारण महिला नहीं बल्कि शक्ति हैं। उन्होंने अपनी गलती की क्षमा याचना मांगा और उसी स्थान पर धर्म समदा देवी मंदिर का नीव पड़ी।
आज मंदिर अपने भव्य रूप में है। रामकोला के व्यवसाई वर्ग से लेकर क्षत्रिय परिवार के लोग माता जी के मंदिर में नित्य सहयोग करते रहते हैं।
देवी मंदिर के बगल में एक विशाल तालाब भी है वहां प्रसिद्ध सती माता का मंदिर है जो राजा मदन पाल सिंह से संबंधित है। ऐतिहासिक तालाब में लाल और सफेद रंग के कमल पाए जाते हैं ।चैत राम नवमी के दिन यहां विशाल मेला लगता है। भक्तों अपनी मनौती पूरा होने पर कढ़ाही वगैरह चढ़ाते हैं। लुप्त हो रहे पखावज नृत्य भी रामनवमी के मेले के दिन मन्दिर के परिसर में देखने को मिलता है।

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