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औषधीय विशेषता के कारण भारतीय नीम के दातून की जगह पाकिस्तानी मिसवाक प्रयोग करते है रोजेदार

Miswakगोरखपुर: रमजान के इस पाक महीने मे हर रोजेदार अपने आप को पाक-साफ़ रखने की पूरी पूरी कोशिश करता है और इसीलिए भारत मे रमजान महीने मे पाकिस्तान से खास तौर से मिसवाक(पिलू) यानि की एक प्रकार का दातुन जिसे हर मुसलमान रोजे मे सुबह और शाम को प्रयोग करता है। शायद यही वजह है कि अधिकतर दन्त मन्जन बनाने वाली कम्पनिया अपने उत्पाद में इसका औषधीय प्रयोग करती है।
इसी लिए खास तौर से भारत सरकार पाकिस्तानी मिसवाक का आयात करती है,जिसकी भारत मे बड़े पैमाने पर मुस्लिम समाज मे माँग है, खास तौर से रोजेदारों के बीच इसका काफी महत्व भी है, वही रोजेदारों की माने तो मिसवाक (पिलू)एक नायाब तौफा है।
भारत मे पाये जाने वाले नीम के दातुन से काफी बेहतर होता है और इसे हर नमाज से पहले इस्तेमाल किया जाता है, इसको करने के बाद से नमाज की फजीलत 70% बढ़ जाती है, जैसे पाँच वक्त की नमाज जरूरी है वैसे ही इसे भी पाँच वक्त नमाज अदा करने से पहले किया जाता है।
इसके इस्तेमाल से मुह से किसी भी प्रकार की कोई बदबू नहीं आती और कई प्रकार के बीमारियों से बचा जा सकता है, इससे दाँतो मे चमक बनी रहती है और मसूड़े भी मजबूत रहते है, और सबसे खास इसके इस्तेमाल से पेट के अंदर की भी कई बीमारिया ख़त्म हो जाती है, रोजेदारों का गला नहीं सूखता है और दिन भर ताजगी बनी रहती है।
वही मुस्लिम धर्म के अनुसार इसके इस्तेमाल से रोजेदारों को 70% इनायत मिलती है, ये भारत मे सबसे ज्यादा पाकिस्तान से आता है और इसकी सबसे ज्यादा माँग रमजान महीने मे होती है, इसे पिलू की जड़ से बना हुआ बताया जाता है और ये रेगिस्तानी ईलाके मे ही पाया जाता है। कुराने पाक मे भी मिसवाक यानि पिलू के महत्व को बताया गया है।
वही इसके बेचने वाले शहर के प्रमुख विक्रेता अख्तर भाई ने बताया कि इसको हर नमाज के पहले दातुन के तौर पर किया जाता है इसका इस्लाम धर्म मे काफी महत्व है, ये ज्यादातर रेतीले इलाक़ो मे पाया जाता है और इसकी बड़ी संख्या मे पाकिस्तान और अरब से आता है । ये लाखो की संख्या मे रमजान मे इस्तेमाल मे लाया जाता है और एक पिलु कि कीमत 15 से 20 रुपये तक होती है ।
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